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दुनिया की सांसें अटकीं ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर रखी कड़े शर्तें, कहा सुरक्षित निकलना है तो हमारी बात मानो

News India Live, Digital Desk: मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में बारूद की गंध के बीच ईरान ने दुनिया की लाइफलाइन कहे जाने वाले ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को लेकर बेहद सख्त रुख अपना लिया है। अमेरिका के साथ बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि इस समुद्री रास्ते से व्यापारिक जहाजों का गुजरना अब उसकी शर्तों पर निर्भर करेगा। ईरान ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि अंतरराष्ट्रीय शक्तियों को इस रास्ते से सुरक्षित निकास चाहिए, तो उन्हें तेहरान की ओर से तय किए गए नियमों और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करना होगा।हॉर्मुज की घेराबंदी: क्यों डरी हुई है पूरी दुनिया?हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का वह संकरा समुद्री रास्ता है, जहाँ से वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। यदि ईरान इस रास्ते को ब्लॉक करता है या यहाँ कड़े प्रतिबंध लगाता है, तो पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। ईरान के सैन्य अधिकारियों का दावा है कि इस क्षेत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी उनकी है, और किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ईरान का यह बयान ऐसे समय में आया है जब खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी युद्धपोतों की हलचल बढ़ गई है।ईरान की ‘शर्तें’ और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतराईरानी नेतृत्व ने संकेत दिए हैं कि वे केवल उन देशों के जहाजों को सुगम रास्ता देंगे जो ईरान के प्रति ‘मित्रवत’ व्यवहार रखते हैं या उनके हितों को नुकसान नहीं पहुँचाते। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान इस रास्ते का इस्तेमाल एक रणनीतिक हथियार के रूप में कर रहा है ताकि पश्चिमी देशों पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों का दबाव कम किया जा सके। अगर ईरान यहाँ जहाजों की आवाजाही रोकता है, तो भारत, चीन और जापान जैसे देशों की ऊर्जा आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हो सकती है।अमेरिका और ईरान के बीच ‘माइंड गेम’ शुरूव्हाइट हाउस और पेंटागन लगातार ईरान की इन धमकियों पर नजर रखे हुए हैं। अमेरिका का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं, ईरान ने पलटवार करते हुए कहा है कि ‘सुरक्षित निकास’ का एकमात्र रास्ता ईरान के संप्रभु अधिकारों का सम्मान करना है। इस कूटनीतिक और सैन्य खींचतान ने खाड़ी देशों में युद्ध की आशंका को और गहरा दिया है, जिससे वैश्विक शेयर बाजारों में भी अनिश्चितता का माहौल है।भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर बहुत अधिक निर्भर है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी प्रकार की रुकावट का मतलब है भारत आने वाले तेल टैंकरों का फंस जाना। हालांकि, भारत ने हाल ही में सऊदी और यूएई से अतिरिक्त आपूर्ति सुरक्षित करने की कोशिश की है, लेकिन हॉर्मुज का रास्ता बंद होना पूरी सप्लाई चेन को तहस-नहस कर सकता है। भारतीय विदेश मंत्रालय इस पूरे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर बनाए हुए है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।