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दुनिया में बजेगा भारत का डंका: सेना की सबसे ताकतवर तोपों धनुष और सारंग को मिले हजारों करोड़ के ऑर्डर, कांपेंगे दुश्मन

विश्व पटल पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों, रूस-यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया के संकट और क्षेत्रीय विवादों के बीच दुनिया भर के देशों ने अपनी सैन्य और रक्षा तैयारियों को अभेद्य बनाने की दिशा में काम तेज कर दिया है। इस वैश्विक रक्षा परिदृश्य में भारत के स्वदेशी सैन्य साजो-सामान और तोपखाने का दबदबा तेजी से स्थापित हो रहा है। 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत विकसित सेना की सबसे शक्तिशाली तोपों 'धनुष' (Dhanush) और 'सारंग' (Sarang) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तहलका मचा दिया है।

उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक और रक्षा केंद्र कानपुर स्थित ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों और रक्षा उपक्रम एडवांस्ड वेपंस एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड (AWEIL) को इन तोपों व अत्याधुनिक हथियारों के निर्माण के लिए ₹10,000 करोड़ से अधिक के बड़े ऑर्डर हासिल हो चुके हैं। इनमें अकेले धनुष और सारंग तोपों के निर्माण व अपग्रेडेशन के लिए ₹1,000 करोड़ से ज्यादा के नए वर्क ऑर्डर शामिल हैं। इसके अलावा कंपनी अंतरराष्ट्रीय और घरेलू स्तर पर ₹20,000 करोड़ के अतिरिक्त ऑर्डर्स हासिल करने के लिए टेंडर प्रक्रिया में मजबूती से अपनी दावेदारी पेश कर चुकी है।

'देसी बोफोर्स' धनुष की 38 से 42 KM तक अचूक मारक क्षमता

'धनुष' को रक्षा विशेषज्ञ और सेना के जवान 'देसी बोफोर्स' के नाम से भी जानते हैं। 155 एमएम और 45-कैलिबर वाली यह अत्याधुनिक टोड होवित्जर तोप 1980 के दशक की बोफोर्स तकनीक से कई कदम आगे निकल चुकी है:

  • लंबी मारक दूरी: सामान्य बोफोर्स की मारक दूरी जहां 27 किलोमीटर थी, वहीं धनुष तोप 38 किलोमीटर और स्पेशल एल/52 बैरल के साथ 42 किलोमीटर तक के लक्ष्य को पिन-पॉइंट सटीकता के साथ ध्वस्त करने में सक्षम है।

  • 80% से अधिक स्वदेशी घटक: इसके 80 प्रतिशत से अधिक कलपुर्जे पूरी तरह देश में ही निर्मित हैं, जिससे रख-रखाव और स्पेयर पार्ट्स की निर्भरता विदेशी कंपनियों पर खत्म हो गई है।

  • अत्याधुनिक इनर्शियल नेविगेशन और थर्मल साइट: इसमें ऑटोमैटिक गन अलाइनमेंट, डे-नाइट थर्मल साइटिंग, ऑनबोर्ड कंप्यूटर और डिजिटल फायर कंट्रोल सिस्टम लगा है।

  • गोले दागने की तीव्र रफ्तार: यह तोप बर्स्ट मोड में मात्र 15 सेकंड के भीतर 3 राउंड और इंटेंस मोड में 3 मिनट में 15 राउंड फायर कर सकती है।

सारंग तोप: 130 एमएम से 155 एमएम अपग्रेड का चमत्कारी फॉर्मूला

भारतीय सेना के पुराने तोपखाने को आधुनिक रूप देने में 'सारंग' प्रोजेक्ट सबसे सफल इंजीनियरिंग मॉडल बनकर उभरा है:

  • कैलिबर अपग्रेडेशन: सारंग के तहत सेना की पुरानी सोवियत दौर की 130 एमएम की रूसी फील्ड तोपों को अत्याधुनिक 155 एमएम/45 कैलिबर में तब्दील किया जा रहा है।

  • रेंज में भारी इजाफा: इस अपग्रेड के बाद तोप की स्ट्राइक रेंज 27 किलोमीटर से बढ़कर सीधे 39 किलोमीटर हो गई है।

  • घातक विस्फोटक क्षमता: 155 एमएम का गोला 130 एमएम की तुलना में तीन गुना अधिक विनाशकारी होता है, जिससे दुश्मन के बंकरों और सैन्य ठिकानों को पलक झपकते ही मलबे में बदला जा सकता है।

  • किफायती और टिकाऊ समाधान: बिल्कुल नई तोप खरीदने की तुलना में पुरानी तोपों का स्वदेशी अपग्रेडेशन देश के रक्षा बजट के अरबों रुपये बचा रहा है।

कानपुर और जबलपुर से लेकर दुनिया भर में बज रहा है डंका

उत्तर प्रदेश की औद्योगिक राजधानी कानपुर स्थित ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियां और मध्य प्रदेश की गन कैरेज फैक्ट्री (GCF) जबलपुर इन तोपों के उत्पादन की मुख्य धुरी बनी हुई हैं। कानपुर में आयोजित रक्षा प्रदर्शनियों के दौरान धनुष, सारंग तोपों और अत्याधुनिक रिमोट-कंट्रोल्ड गन सिस्टम्स को देखने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों और नागरिकों की भारी भीड़ उमड़ती रही है।

वैश्विक स्तर पर छोटे और मध्यम देश अब पश्चिमी देशों के महंगे हथियारों के विकल्प के रूप में भारतीय रक्षा उत्पादों को अपनी पहली पसंद बना रहे हैं। भारत के हथियार न केवल बेहद किफायती और टिकाऊ हैं, बल्कि हिमालय के शून्य से 40 डिग्री नीचे के तापमान से लेकर थार के 50 डिग्री रेगिस्तान तक हर विषम परिस्थिति में परखे जा चुके हैं।

300 अतिरिक्त धनुष तोपों के साथ सेना बनाएगी 15 नई रेजिमेंट

रक्षा मंत्रालय की रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने भारतीय सेना के लिए 300 अतिरिक्त धनुष तोपों की खरीद के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। इस ऐतिहासिक मेगा ऑर्डर से भारतीय सेना के तोपखाने में 15 नई रेजिमेंट तैयार की जाएंगी, जिन्हें वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) और नियंत्रण रेखा (LoC) पर तैनात किया जाएगा।

यह कदम न केवल सीमा पर देश की आर्टिलरी फायरपावर को कई गुना बढ़ाएगा, बल्कि भारतीय रक्षा उद्योग को दुनिया के शीर्ष हथियार निर्यातकों की कतार में मजबूती से खड़ा करेगा।