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देश में रिकॉर्ड नकदी के बाद भी आखिर क्यों सूखे पड़े हैं एटीएम? नोटों की ‘रहस्यमयी’ कमी के पीछे की इनसाइड स्टोरी

देश की अर्थव्यवस्था और बैंकिंग सिस्टम से एक बेहद हैरान करने वाली पहेली सामने आ रही है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के तमाम दावों और सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस समय देश के बाजार में नकदी (कैश) का सर्कुलेशन अपने अब तक के सबसे ऊंचे यानी रिकॉर्ड स्तर पर चल रहा है। लेकिन इस भारी-भरकम नकदी के बावजूद जमीन पर हकीकत इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है। देश के कई राज्यों, खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में एटीएम (ATM) अचानक से सूखे पड़ गए हैं। लोग अपनी ही गाढ़ी कमाई निकालने के लिए एक एटीएम से दूसरे एटीएम के चक्कर काटने को मजबूर हैं। आंकड़ों और इस जमीनी हकीकत के बीच का यह विरोधाभास हर किसी को हैरान कर रहा है। आखिर कहां गायब हो रहा है सारा पैसा और क्या है एटीएम खाली होने की वजह जब देश में नोटों की छपाई और सप्लाई में कोई कमी नहीं है, तो फिर एटीएम में 'नो कैश' के बोर्ड क्यों लटक रहे हैं? बैंकिंग विशेषज्ञों और लॉजिस्टिक्स कंपनियों के मुताबिक, इसके पीछे कई बड़े कारण एक साथ काम कर रहे हैं। सबसे पहला कारण कैश मैनेजमेंट और एटीएम रीफिलिंग कंपनियों के बीच का तालमेल बिगड़ना है। त्योहारों, शादियों के सीजन या चुनावी माहौल के दौरान अचानक से नकदी की मांग कई गुना बढ़ जाती है। इसके अलावा, कई बैंकों द्वारा डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के चक्कर में एटीएम में कैश डालने की फ्रीक्वेंसी को कम किया गया है। कुछ तकनीकी खराबी और बैंकों के मर्जर के बाद सॉफ्टवेयर अपडेट की वजह से भी एटीएम तक पैसा समय पर नहीं पहुंच पा रहा है। क्या लोग बैंकों से ज्यादा घरों में कैश जमा करने लगे हैं इस पूरी कहानी का एक और दिलचस्प पहलू यह है कि लोग डिजिटल इंडिया के इस दौर में भी अपने पास कैश रखना ज्यादा सुरक्षित मान रहे हैं। आर्थिक अनिश्चितताओं या ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव के डर से कई लोग बैंकों में पैसा जमा रखने या उसे खर्च करने के बजाय अपने पास लिक्विड कैश के रूप में होल्ड कर रहे हैं। जब बाजार से पैसा बैंकों के पास वापस सर्कुलेशन में नहीं लौटता, तो बैंकिंग सिस्टम में नकदी का रोटेशन धीमा हो जाता है। यही वजह है कि आरबीआई की रिपोर्ट में तो कैश ऑन रिकॉर्ड दिख रहा है, लेकिन बैंकों के पास एटीएम में डालने के लिए तत्काल नकदी की शॉर्टेज हो जाती है। आंकड़ों के चक्रव्यूह में उलझी देश की जनता और आगे का रास्ता बैंकिंग और इकोनॉमी के जानकारों का मानना है कि इस समस्या का समाधान सिर्फ ज्यादा नोट छापना नहीं, बल्कि उनका सही डिस्ट्रीब्यूशन है। आरबीआई और सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और बैंकों को निर्देश दिए जा रहे हैं कि वे एटीएम में कैश की उपलब्धता को हर हाल में सुनिश्चित करें। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां आज भी लोग पूरी तरह से नकदी पर निर्भर हैं, वहां मोबाइल एटीएम और कैश वैन की संख्या बढ़ाई जा रही है। जब तक बैंकों का लॉजिस्टिक्स नेटवर्क इस बढ़ी हुई डिमांड के मुताबिक खुद को अपग्रेड नहीं कर लेता, तब तक जनता को इस कैश क्रंच यानी नोटों की किल्लत से जूझना पड़ सकता है।