
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग पूरे सात साल के एक लंबे अंतराल के बाद उत्तर कोरिया के दौरे पर जा रहे हैं। इस दौरे की खबर ने न केवल वाशिंगटन बल्कि मॉस्को तक राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन और शी जिनपिंग के बीच होने वाली यह मुलाकात ऐसे समय पर हो रही है, जब वैश्विक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। जानकार मान रहे हैं कि यह महज एक द्विपक्षीय दौरा नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बहुत बड़ा भू-राजनीतिक खेल छिपा हुआ है, जो आने वाले दिनों में महाशक्तियों के बीच के संतुलन को पूरी तरह से बदल कर रख सकता है। डोनाल्ड ट्रंप की बढ़ी मुश्किलें और वाशिंगटन की चिंताएं शी जिनपिंग के इस कदम ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के लिए एक नया सिरदर्द पैदा कर दिया है। अमेरिका लंबे समय से उत्तर कोरिया पर परमाणु नियंत्रण और प्रतिबंधों को लेकर दबाव बनाने की कोशिश करता रहा है। ऐसे में चीन के राष्ट्रपति का सीधे प्योंगयांग पहुंचना किम जोंग उन को एक बहुत बड़ा रणनीतिक और आर्थिक सुरक्षा कवच प्रदान कर सकता है। अगर चीन और उत्तर कोरिया के बीच के रिश्ते एक नए स्तर पर जाते हैं, तो अमेरिका के लिए किम जोंग उन पर किसी भी तरह का दबाव बनाना बेहद मुश्किल हो जाएगा, जिससे ट्रंप की विदेश नीति के सामने एक गंभीर चुनौती खड़ी हो सकती है। सिर्फ अमेरिका ही नहीं बल्कि रूस का खेल भी बिगड़ेगा आमतौर पर माना जाता है कि चीन और रूस मिलकर अमेरिकी वर्चस्व को चुनौती देते हैं, लेकिन इस बार कूटनीतिक विशेषज्ञों का आकलन थोड़ा अलग है। हाल के दिनों में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और किम जोंग उन के बीच नजदीकी काफी ज्यादा बढ़ी है, खासकर सैन्य और हथियारों के मोर्चे पर। उत्तर कोरिया और रूस के इस बढ़ते गठबंधन से चीन कहीं न कहीं खुद को इस क्षेत्र में थोड़ा पीछे महसूस कर रहा था। अब शी जिनपिंग खुद उत्तर कोरिया का रुख करके किम जोंग उन को यह साफ संदेश देना चाहते हैं कि उत्तर कोरिया का असली और सबसे बड़ा 'बिग ब्रदर' चीन ही है। इस तरह यह दौरा रूस के बढ़ते प्रभाव को नियंत्रित करने की चीन की एक मूक कोशिश भी माना जा रहा है। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में नए शक्ति संतुलन की शुरुआत इस ऐतिहासिक यात्रा के दूरगामी परिणाम होने तय हैं। शी जिनपिंग का यह दौरा किम जोंग उन को अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक मजबूत मोलभाव की स्थिति में लाकर खड़ा कर देगा। चीन इस बात को अच्छी तरह समझता है कि उत्तर कोरिया के जरिए वह अमेरिका और उसके सहयोगी देशों जैसे दक्षिण कोरिया और जापान को हमेशा दबाव में रख सकता है। वहीं दूसरी ओर, पुतिन को भी अब किम जोंग उन के साथ अपने सौदों को लेकर नए सिरे से रणनीति बनानी होगी। कुल मिलाकर, शी जिनपिंग की यह उत्तर कोरिया यात्रा आने वाले समय में वैश्विक राजनीति के नक्शे पर एक नई लकीर खींचने जा रही है, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।
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