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नागपुर बीजेपी की टेंशन बरसों की वफादारी और ऐन मौके पर कटा टिकट

News India Live, Digital Desk: नागपुर को बीजेपी का एक मजबूत किला माना जाता है। संघ का मुख्यालय हो या बड़े नेताओं का दबदबा, यहाँ पार्टी की पकड़ हमेशा से गहरी रही है। लेकिन, आगामी नागपुर नगर निगम (NMC) चुनाव से पहले इस बार कहानी थोड़ी बदलती दिख रही है। ताज़ा हलचल ये है कि पार्टी के भीतर ‘अपनों’ ने ही बगावत का बिगुल फूंक दिया है।अक्सर कहा जाता है कि राजनीति में ‘टिकट’ केवल एक कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि सालों की मेहनत का इनाम होता है। जब पार्टी ने अपनी लिस्ट जारी की, तो कई ऐसे दिग्गज नेता हैरान रह गए जिन्हें उम्मीद थी कि इस बार मौका उन्हें ही मिलेगा। पर जब नाम गायब मिला, तो नाराजगी आंसुओं और फिर बगावत में बदल गई। नतीजे में, अब कई प्रभावशाली नेता पार्टी से नाता तोड़कर निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल कर चुके हैं।कार्यकर्ताओं का गुस्सा और चुनाव पर असरराजनीति के जानकार मान रहे हैं कि ये छोटे-छोटे बागी चेहरे बीजेपी के लिए बड़ा सिरदर्द साबित हो सकते हैं। समस्या सिर्फ एक सीट हारने की नहीं है, बल्कि ‘वोट कटने’ की है। नागपुर की राजनीति में जमीन से जुड़े इन नेताओं का अपना एक खासा वोट बैंक है। अगर ये नेता निर्दलीय मैदान में डटे रहते हैं, तो इसका सीधा फायदा विपक्ष (कांग्रेस या अन्य दलों) को मिल सकता है।क्यों फूटा नेताओं का गुस्सा?इन बागी उम्मीदवारों का कहना है कि उन्होंने पार्टी के लिए सालों तक दिन-रात काम किया, लेकिन जब फल मिलने का समय आया तो पैराशूट उम्मीदवारों या नए चेहरों को तवज्जो दी गई। नागपुर के कई वार्डों में स्थिति ऐसी है कि बीजेपी के ही पुराने कार्यकर्ता अब आमने-सामने खड़े हैं। कुछ नेताओं ने तो यहाँ तक कह दिया कि ‘पार्टी हाईकमान ने उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाई है।’फडणवीस के गढ़ में बड़ी चुनौतीदेवेंद्र फडणवीस का गृह नगर होने के कारण नागपुर चुनाव बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई है। ऐसे में अपने ही घर में इस तरह की खींचतान पार्टी की छवि पर सवालिया निशान लगाती है। हालांकि, पार्टी के बड़े नेता डैमेज कंट्रोल की कोशिश में लगे हैं और नाराज लोगों को मनाने का सिलसिला जारी है, लेकिन क्या नामांकन वापस लेने के आखिरी समय तक ये ‘बाग़ी’ मानेंगे? यह कहना अभी मुश्किल है।फिलहाल, नागपुर की सड़कों पर चर्चा यही है कि क्या बीजेपी इस आपसी कलह को थाम पाएगी, या फिर अपनों की नाराजगी सत्ता की राह में कांटा बन जाएगी। चुनावी समीकरणों का खेल अब रोमांचक मोड़ पर है।