
दिनभर की कड़ी मेहनत और थकान के बाद जब हम रात को सुकून भरी नींद लेने के लिए अपने बिस्तर पर लेटते हैं, तो शरीर और मन दोनों धीरे-धीरे विश्राम की अवस्था में जाने लगते हैं। हमारी आंखें बंद होती हैं, सांसें धीमी होने लगती हैं और हम सपनों की दुनिया में कदम रखने ही वाले होते हैं कि अचानक हमारे साथ कुछ ऐसा अजीब होता है जो हमें झकझोर कर रख देता है। हमें ऐसा महसूस होता है जैसे हम किसी बहुत ऊंची इमारत, पहाड़ या गहरी खाई से नीचे की तरफ तेजी से गिर रहे हैं। इस भयानक अहसास के साथ ही हमारे शरीर में एक तेज झटका लगता है और हमारी आंखें एकदम से खुली की खुली रह जाती हैं। दिल की धड़कनें तेज हो जाती हैं और कुछ पल के लिए समझ ही नहीं आता कि आखिर हमारे साथ हुआ क्या है। विज्ञान और चिकित्सा की दुनिया में इस आम लेकिन रहस्यमयी अनुभव को 'हिप्निक जर्क' (Hypnic Jerk) या 'स्लीप स्टार्ट' कहा जाता है। यह अनुभव इतना वास्तविक और डरावना होता है कि कई बार इंसान डर के मारे पसीने-पसीने हो जाता है, लेकिन इसके पीछे का विज्ञान बेहद दिलचस्प है।
क्या है हिप्निक जर्क और शरीर के भीतर उस समय क्या चल रहा होता है?
आखिर यह सवाल हर किसी के मन में आता है कि जब हम पूरी तरह से सोए हुए होते हैं, तो अचानक शरीर में यह हरकत क्यों पैदा होती है। न्यूरोलॉजिस्ट और नींद के जानकारों के अनुसार, हिप्निक जर्क एक प्रकार का अनैच्छिक मांसपेशियों का संकुचन है, जो तब होता है जब शरीर जागने की स्थिति से पूरी तरह नींद की शुरुआती अवस्था में प्रवेश कर रहा होता है। इस पूरी प्रक्रिया को समझने के लिए हमें मानव शरीर के नर्वस सिस्टम को समझना होगा। जब हम बिस्तर पर सोते हैं, तो हमारा मस्तिष्क हमारे शरीर को आराम की मुद्रा में ढालने की कोशिश करता है। इस दौरान हमारी हृदय गति यानी हार्ट रेट कम होने लगती है, ब्लड प्रेशर गिरने लगता है और मांसपेशियों का तनाव धीरे-धीरे कम होने लगता है। लेकिन कभी-कभी मस्तिष्क का नियंत्रण केंद्र और हमारी मांसपेशियां इस ट्रांसिशन को ठीक से तालमेल में नहीं ला पाती हैं। मस्तिष्क को ऐसा भ्रम होने लगता है कि शरीर का संतुलन बिगड़ रहा है या हम कहीं नीचे गिर रहे हैं। इस भ्रम से निपटने के लिए मस्तिष्क तुरंत मांसपेशियों को एक आपातकालीन सिग्नल भेजता है, जिससे अचानक शरीर सिकुड़ जाता है या झटका खाता है और हम नींद से तुरंत बाहर आ जाते हैं।
किन कारणों से बढ़ जाती है सोते समय ऊंचाई से गिरने वाले इन झटकों की आवृत्ति?
यूं तो हिप्निक जर्क होना एक बेहद सामान्य शारीरिक क्रिया है और जीवन में कभी न कभी लगभग हर व्यक्ति को इसका अनुभव जरूर होता है। लेकिन कुछ खास परिस्थितियां ऐसी होती हैं जिनके कारण यह समस्या बार-बार या अधिक तीव्रता के साथ होने लगती है। सबसे बड़ा कारण अत्यधिक मानसिक तनाव, एंग्जाइटी और दिनभर की भागदौड़ के कारण होने वाली थकान है। जब दिमाग जरूरत से ज्यादा सोच रहा होता है, तो वह आसानी से गहरी नींद में नहीं जा पाता। इसके अलावा, रात में सोने से ठीक पहले अत्यधिक मात्रा में कैफीन यानी चाय, कॉफी या एनर्जी ड्रिंक्स का सेवन करना भी नर्वस सिस्टम को उत्तेजित रखता है। अनियमित नींद की आदतें, सोने का कोई निश्चित समय न होना, शरीर में पानी की कमी या कुछ खास तरह की दवाइयों का असर भी इस तरह के झटकों को ट्रिगर कर सकता है। जब शरीर पूरी तरह से थका हुआ होता है लेकिन मस्तिष्क अत्यधिक सक्रिय रहता है, तो दोनों के बीच का यह असमंजस नींद के शुरुआती पलों में इस प्रकार के झटकों को और अधिक बढ़ावा देता है।
क्या यह कोई गंभीर बीमारी है और इससे बचाव के लिए क्या उपाय अपनाएं?
अक्सर लोग इस तरह के झटकों को किसी बड़ी न्यूरोलॉजिकल बीमारी या दिल की समस्या से जोड़कर घबरा जाते हैं, लेकिन डॉक्टरों का मानना है कि यदा-कदा होने वाला हिप्निक जर्क पूरी तरह से सामान्य है और इससे स्वास्थ्य को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है। यह इस बात का संकेत है कि आपका तंत्रिका तंत्र सामान्य रूप से काम कर रहा है और शरीर को बचाने के लिए तुरंत प्रतिक्रिया दे रहा है। हालांकि, यदि यह समस्या बहुत अधिक बढ़ जाए और हर रात आपकी नींद बार-बार इस वजह से टूटने लगे, तो यह अनिद्रा या स्लीप डिसऑर्डर का रूप ले सकती है। इससे बचने के लिए सबसे जरूरी है कि आप अपनी जीवनशैली में सुधार करें। सोने से कम से कम दो घंटे पहले किसी भी प्रकार के गैजेट्स का इस्तेमाल बंद कर दें, शांत और अंधेरे कमरे में सोएं, और सोने से पहले कैफीनयुक्त पदार्थों से दूरी बनाएं। नियमित रूप से प्राणायाम, ध्यान या हल्की स्ट्रेचिंग करने से मानसिक तनाव कम होता है, जिससे शरीर और मस्तिष्क दोनों को शांत नींद मिलने में मदद मिलती है और आप इस तरह के अजीबोगरीब झटकों से राहत पा सकते हैं।
UK News
