
इस्राइल में चल रही राजनीतिक उठापटक के बीच एक बड़ा मोड़ आया है. देश की दो प्रमुख अरब पार्टियों ने लंबे समय से प्रधानमंत्री पद पर काबिज बेंजामिन नेतन्याहू को हटाने के लिए एक अनोखा फॉर्मूला पेश किया है. उन्होंने विपक्ष के नेता यायर लैपिड के नेतृत्व वाले गठबंधन को समर्थन देने का ऐलान किया है, लेकिन एक शर्त भी रखी है. इस खबर ने इस्राइल की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है.
अरब पार्टियों का फॉर्मूला
अरब पार्टियों, जिनमें 'रआम' (Ra'am) और 'ज्वाइंट लिस्ट' (Joint List) शामिल हैं, ने एक संयुक्त बयान जारी कर नेतन्याहू को हटाने के लिए विपक्ष को समर्थन देने का ऐलान किया है. वे मानते हैं कि नेतन्याहू का नेतृत्व देश के लिए हानिकारक है और वे अब बदलाव चाहते हैं. उनकी शर्त यह है कि आने वाली सरकार में अरब समुदाय की मांगों को ध्यान में रखा जाए, जिसमें समानता, न्याय और फिलीस्तीनी मुद्दे का समाधान शामिल हो. वे यह भी चाहते हैं कि सरकार अरब समुदाय के विकास के लिए बजट आवंटित करे.
विपक्षी गठबंधन की चुनौती
अरब पार्टियों के समर्थन के ऐलान के बावजूद, विपक्षी गठबंधन के लिए नेतन्याहू को हटाना इतना आसान नहीं है. विपक्षी गठबंधन में कई अलग-अलग विचारधाराओं वाली पार्टियां शामिल हैं, जिनके बीच कई मुद्दों पर मतभेद हैं. इसके अलावा, नेतन्याहू के पास अभी भी अपनी पार्टी लिकुड और कुछ अन्य पार्टियों का समर्थन है. उन्हें हटाने के लिए विपक्ष को संसद में बहुमत हासिल करने के लिए 61 सीटें चाहिए, जो वर्तमान में उनके पास नहीं है.
आइजेनकोट की शर्त
विपक्षी गठबंधन के सामने एक और चुनौती है – गाडी आइजेनकोट (Gadi Eisenkot). आइजेनकोट पूर्व सेना प्रमुख हैं और वे भी प्रधानमंत्री पद के दावेदार हैं. उन्होंने घोषणा की है कि वे विपक्ष के साथ शामिल होने के लिए तैयार हैं, लेकिन केवल तभी जब उन्हें गठबंधन का नेतृत्व करने का मौका मिले. इससे विपक्ष के भीतर तनाव पैदा हो गया है, क्योंकि लैपिड और अन्य नेता भी प्रधानमंत्री पद के लिए दावा कर रहे हैं.
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