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“पहले फाइनल डील, फिर मिलेंगे अरबों डॉलर!” ईरान को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का सबसे बड़ा ऐलान

"पहले फाइनल डील, फिर मिलेंगे अरबों डॉलर!" ईरान को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का सबसे बड़ा ऐलान

वाशिंगटन और तेहरान के बीच जारी भीषण कूटनीतिक और सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बेहद सख्त और बड़ा रणनीतिक ऐलान किया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने पूरी दुनिया के सामने यह साफ कर दिया है कि अमेरिका अब ईरान के साथ किसी भी तरह का आंशिक, अधूरा या अस्थायी समझौता (Temporary Deal) बिल्कुल नहीं करेगा। उन्होंने दो टूक शब्दों में अल्टीमेटम देते हुए कहा कि जब तक ईरान के साथ एक अंतिम और व्यापक परमाणु समझौता नहीं हो जाता, तब तक तेहरान की फ्रीज (जब्त) की गई अरबों डॉलर की संपत्तियों को रिहा नहीं किया जाएगा और न ही उस पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों में कोई ढील दी जाएगी। ट्रंप के इस रुख से साफ है कि अमेरिका अब ईरान पर चौतरफा दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है।

'मीट द प्रेस' इंटरव्यू में ट्रंप ने खोले पत्ते, लेबनान को लेकर कही यह बात

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह अहम बातें 'एनबीसी न्यूज' (NBC News) के मशहूर टॉक शो 'मीट द प्रेस' में दिए गए एक विशेष और बेबाक साक्षात्कार के दौरान कहीं। जब ट्रंप से सवाल पूछा गया कि क्या अंतिम समझौते से पहले ईरान को राहत देने के लिए उसकी फ्रीज संपत्तियों तक पहुंच या प्रतिबंधों में थोड़ी ढील दी जा सकती है? तो ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'यह सब बाद में होगा… हां, अगर वे अच्छा व्यवहार करेंगे और सही काम करेंगे तो हम निश्चित रूप से आगे बढ़ेंगे।' इस दौरान ट्रंप ने एक और बड़ा कूटनीतिक खुलासा करते हुए कहा कि वे लेबनान को तेहरान के साथ किसी भी तरह के शॉर्ट-टर्म समझौते में शामिल करने के लिए कोई दबाव नहीं बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि लेबनान भले ही इसे देखना चाहेगा, लेकिन अमेरिकी प्रशासन इस पर जोर नहीं दे रहा है।

यूरेनियम को नष्ट करने की शर्त, दोस्ती नहीं तो 'सैन्य ऐक्शन' के लिए रहें तैयार

राष्ट्रपति ट्रंप ने भविष्य में होने वाली किसी भी संभावित डील के लिए अमेरिका की बेहद कड़ी शर्तें दुनिया के सामने रखीं। उन्होंने संकेत दिया कि आगामी समझौते में न केवल ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से स्थाई रूप से रोकने की गारंटी होगी, बल्कि अमेरिका और ईरान मिलकर तेहरान के पास मौजूद अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम (Highly Enriched Uranium) को हटाने और उसे पूरी तरह नष्ट करने का काम करेंगे। ट्रंप ने कहा, 'अगर हम यह समझौता कर लेते हैं कि अब हम मित्रवत हैं, तो हम सब साथ चलेंगे। यह हमारा उपकरण होगा। हम उस यूरेनियम को बाहर निकालेंगे और नष्ट कर देंगे… चाहे वह उनके परिसर के भीतर हो या फिर उसे बाहर ले जाया जाए।' इसके साथ ही उन्होंने बेहद कड़े लहजे में चेतावनी दी कि अगर यह शांति वार्ता विफल रहती है, तो फिर अमेरिका 'सैन्य रूप से बहुत सख्ती' के साथ कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

ईरान ने ट्रंप के दावों को नकारा, कहा— यूरेनियम ट्रांसफर का कोई वादा नहीं हुआ

दूसरी तरफ, ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इन दावों और शर्तों को सिरे से खारिज करते हुए पूरी तरह काल्पनिक बताया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ किया कि अपने संवर्धित यूरेनियम को देश से बाहर किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने को लेकर अमेरिका के साथ ऐसा कोई समझौता नहीं हुआ है और न ही मौजूदा बातचीत के टेबल पर ऐसा कोई प्रस्ताव कभी रखा गया था। गौरतलब है कि अमेरिकी और इजरायली वायुसेना ने 28 फरवरी को ईरान के कई ठिकानों पर भीषण हवाई हमले किए थे, जिसके बाद से ही ईरान के परमाणु ठिकानों की वर्तमान स्थिति और सुरक्षा को लेकर वैश्विक स्तर पर भारी अनिश्चितता और तनाव का माहौल बना हुआ है।

आईएईए (IAEA) की रिपोर्ट और 2015 के परमाणु समझौते का उल्लंघन

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की हालिया रिपोर्ट के आंकड़ों पर नजर डालें तो इन हमलों से पहले जून 2025 तक ईरान के पास लगभग 440 किलोग्राम 60 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम का एक बड़ा भंडार मौजूद था। यह मात्रा साल 2015 में हुए ऐतिहासिक ईरान परमाणु समझौते (JCPOA) द्वारा निर्धारित की गई कानूनी सीमा से कई गुना ज्यादा है। हालांकि, मौजूदा वक्त में दोनों देशों के राजनयिकों के बीच पर्दे के पीछे बातचीत का दौर तो जारी है, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के इस हालिया और आक्रामक बयान ने यह साफ कर दिया है कि वाशिंगटन किसी भी कीमत पर झुकने के मूड में नहीं है और आने वाले दिनों में मध्य पूर्व (Middle East) की यह सियासी जंग और ज्यादा आक्रामक रूप ले सकती है।