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पाकिस्तान की धरती से जयशंकर के नाम एक खत ,हमें आपसे जलन नहीं, प्रेरणा मिलती है

News India Live, Digital Desk: अक्सर हम भारत और पाकिस्तान के बीच तनातनी और कड़वाहट की खबरें ही सुनते हैं। सरहद पर तनाव हो या क्रिकेट का मैदान, माहौल हमेशा गर्म रहता है। लेकिन हाल ही में जब भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक के लिए इस्लामाबाद पहुंचे, तो वहां कुछ ऐसा हुआ जिसने सबको हैरान कर दिया। यह खबर किसी बम-बारूद की नहीं, बल्कि एक जज़्बात भरे ‘ओपन लेटर’ (खुले खत) की है जो पाकिस्तान के ही एक प्रमुख अखबार में छपा।आखिर उस खत में ऐसा क्या था?सोचिए, पाकिस्तान का एक बड़ा अखबार और उसमें भारत की शान में कसीदे पढ़े जा रहे हों। यह बात सुनने में थोड़ी अजीब लगती है, है ना? लेकिन यही सच है। जैसे ही जयशंकर पाकिस्तान की जमीन पर उतरे, वहां के एक जाने-माने पत्रकार ने एक ‘ओपन लेटर’ के जरिये अपने दिल की बात कह दी। इस खत में उन्होंने साफ़ लिखा- “भारत के पास हमारा अटूट समर्थन है।”लेकिन ठहरिए, इसका मतलब यह नहीं कि वे किसी सियासी मुद्दे पर भारत का साथ दे रहे थे। असल में, यह खत भारत की आर्थिक तरक्की, टेक्नोलॉजी और दुनिया में बढ़ते रुतबे को सलाम करने के बारे में था।”काश हम भी…” – पाकिस्तान का दर्द और भारत की तारीफलेखक ने बड़े ही भावुक अंदाज़ में तुलना की। उन्होंने लिखा कि कैसे भारत आज चाँद और मंगल तक पहुंच गया है, दुनिया की बड़ी-बड़ी कम्पनियां (जैसे Google और Microsoft) भारतीय लोग चला रहे हैं, और भारत की इकॉनमी कहाँ से कहाँ पहुंच गई। दूसरी तरफ, उन्होंने अपने मुल्क यानी पाकिस्तान के हालात पर अफ़सोस जताया।खत का लब्बोलुआब यह था कि पाकिस्तान के आम लोग भारत से नफरत नहीं करना चाहते, बल्कि वे तो भारत की तरक्की देखकर यह सोचते हैं कि “काश, हम भी सही रास्ते पर चले होते।”मेजबानी और उम्मीद की बातउस खत में एक और दिल को छू लेने वाली बात थी। लेखक ने एस. जयशंकर से कहा कि भले ही हमारे देशों के बीच कड़वाहट है, लेकिन आप हमारे मेहमान हैं और हम आपका दिल से स्वागत करते हैं। उन्होंने यह भी माना कि पाकिस्तान के आम नागरिक अब पुरानी लड़ाइयों में नहीं, बल्कि अपने बच्चों के भविष्य और दो वक्त की रोटी की फिक्र में ज्यादा उलझे हैं। वे भारत को एक ‘दुश्मन’ के तौर पर नहीं, बल्कि एक ‘पड़ोसी’ के तौर पर देखते हैं जिससे बहुत कुछ सीखा जा सकता है।यह हमारे लिए गर्व की बात क्यों है?एक भारतीय होने के नाते यह पढ़ना सुकून देता है कि हमारी मेहनत और तरक्की की गूंज अब सरहद पार भी साफ़ सुनाई दे रही है। यह खत इस बात का सबूत है कि ‘काम’ बोलता है। जब दुनिया भारत को सम्मान की नज़र से देखती है, तो विरोधी भी तारीफ करने पर मजबूर हो जाते हैं।यह घटना दिखाती है कि भले ही राजनीति अपनी जगह हो, लेकिन आम इंसान शांति और तरक्की ही चाहता है। जयशंकर जी का यह दौरा भले ही कूटनीतिक था, लेकिन इस ‘ओपन लेटर’ ने इसे भावनात्मक बना दिया।