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पीएम मोदी के झालमुड़ी ब्रेक से मचा बवाल TMC का आरोप- हेमंत सोरेन के चॉपर को नहीं मिली लैंडिंग

News India Live, Digital Desk: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के प्रचार के बीच ‘झालमुड़ी’ पर सियासत गरमा गई है। रविवार (19 अप्रैल 2026) को झारग्राम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक स्थानीय वेंडर से झालमुड़ी लेकर खाते नजर आए। लेकिन इस बीच टीएमसी ने गंभीर आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के इस ‘अनशेड्यूल्ड’ पड़ाव और फोटो-ऑप की वजह से झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन के हेलीकॉप्टर को झारग्राम में उतरने की अनुमति नहीं दी गई।1. क्या है पूरा विवाद?टीएमसी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल (X) पर दावा किया:लैंडिंग से इनकार: हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन को दांतन और केशियारी में जनसभाएं करने के बाद झारग्राम पहुँचना था।PM की मौजूदगी: जब सोरेन का चॉपर झारग्राम के पास पहुँचा, तो उस समय पीएम मोदी वहां मौजूद थे और एक स्टाल पर झालमुड़ी खा रहे थे।घंटों इंतज़ार: टीएमसी का कहना है कि मुख्यमंत्री को हवा में ही इंतज़ार कराया गया और अंततः सुरक्षा कारणों (PM’s presence in the vicinity) का हवाला देकर लैंडिंग की अनुमति नहीं दी गई, जिसके बाद उन्हें निराश होकर वापस राँची लौटना पड़ा।2. वीवीआईपी (VVIP) सिटी विजिट प्रोटोकॉल क्या है?प्रधानमंत्री की सुरक्षा और उनके दौरे के दौरान हवाई यातायात को लेकर सख्त ‘ब्लू बुक’ (Blue Book) नियम लागू होते हैं:No Fly Zone: प्रधानमंत्री के कार्यक्रम स्थल के आसपास एक निश्चित समय के लिए ‘नो फ्लाई ज़ोन’ घोषित कर दिया जाता है। इस दौरान किसी भी अन्य निजी या सरकारी विमान/हेलीकॉप्टर (भले ही वह किसी अन्य मुख्यमंत्री का क्यों न हो) को उतरने या उड़ान भरने की अनुमति नहीं दी जाती।एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC): सुरक्षा कारणों से पीएम के एयरक्राफ्ट के मूवमेंट के दौरान एटीसी अन्य सभी उड़ानों को होल्ड पर रखता है।समय में बदलाव: टीएमसी का आरोप है कि पीएम ने झालमुड़ी खाने के लिए अपना समय बढ़ा दिया, जिससे ‘नो फ्लाई ज़ोन’ की अवधि भी बढ़ गई और सोरेन का कार्यक्रम प्रभावित हुआ।3. टीएमसी और जेएमएम (JMM) का आरोप: ‘लोकतंत्र की हत्या’भेदभाव का आरोप: जेएमएम ने इसे ‘आदिवासी विरोधी’ मानसिकता बताया और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि विपक्षी स्टार प्रचारकों को रोकने के लिए प्रोटोकॉल का दुरुपयोग किया जा रहा है।चुनावी असर: बंगाल चुनाव के 23 अप्रैल और 29 अप्रैल के चरणों से पहले इस घटना ने आदिवासी बेल्ट (जंगलमहल) में भावनात्मक रंग ले लिया है।4. बीजेपी का पलटवारबीजेपी नेताओं ने इन आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) के अधीन होती है और सुरक्षा प्रोटोकॉल में कोई भी बदलाव स्थानीय पुलिस या राजनीतिक दल के हाथ में नहीं होता। पीएम ने बस स्थानीय संस्कृति का आनंद लिया, जिसे विवाद का विषय बनाना गलत है।