
News India Live, Digital Desk: पाकिस्तान के अशांत माने जाने वाले बलूचिस्तान प्रांत की हिंगोल नदी के किनारे एक ऐसा चमत्कारिक स्थान है, जो भारत और पाकिस्तान की सीमाओं से परे करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। हम बात कर रहे हैं ‘हिंगलाज माता मंदिर’ की, जिसे 51 शक्तिपीठों में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। रेगिस्तानी पहाड़ियों के बीच स्थित यह गुफा मंदिर न केवल हिंदुओं के लिए पावन है, बल्कि स्थानीय मुस्लिम भी इसे ‘नानी पीर’ या ‘नानी का हज’ कहकर बेहद सम्मान देते हैं।सती के अंगों से जुड़ा है गौरवशाली इतिहासपौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने शिव के मोह को भंग करने के लिए माता सती के पार्थिव शरीर को अपने चक्र से काटा था, तब माता का ‘ब्रह्मरंध्र’ (सिर का ऊपरी हिस्सा) इसी स्थान पर गिरा था। यही कारण है कि हिंगलाज शक्तिपीठ को अत्यंत शक्तिशाली और फलदायी माना जाता है। दुर्गम रास्तों और मरुस्थल के बीच स्थित होने के बावजूद, यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा भक्तों को अपनी ओर खींच लाती है।जब रावण वध के बाद भगवान राम ने किया था यहां स्नानहिंगलाज माता मंदिर का संबंध केवल सतयुग से ही नहीं, बल्कि त्रेतायुग से भी है। मान्यताओं के अनुसार, रावण का वध करने के बाद ब्रह्महत्या के दोष से मुक्ति पाने के लिए मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने भी हिंगलाज माता की शरण ली थी। उन्होंने यहां के ‘चंद्रकूप’ मिट्टी के ज्वालामुखी में दर्शन किए थे और माता की पूजा अर्चना की थी। आज भी श्रद्धालु अपनी यात्रा के दौरान उन्हीं परंपराओं का पालन करते हैं।’नानी का हज’: सांप्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसालविभाजन की कड़वाहट के बावजूद, हिंगलाज माता मंदिर सांप्रदायिक एकता का प्रतीक बना हुआ है। स्थानीय बलोच मुस्लिम इस मंदिर की सुरक्षा करते हैं और इसे अपनी संस्कृति का हिस्सा मानते हैं। उनके लिए यह ‘मदर नानी’ का स्थान है। हर साल होने वाली ‘हिंगलाज यात्रा’ के दौरान मुस्लिम समुदाय के लोग हिंदू तीर्थयात्रियों की सेवा में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं, जो पूरी दुनिया को शांति का संदेश देता है।दुर्गम रास्ता और आस्था की कठिन परीक्षाहिंगलाज माता के दर्शन करना किसी कठिन परीक्षा से कम नहीं है। कराची से लगभग 250 किलोमीटर दूर स्थित इस मंदिर तक पहुँचने के लिए उबड़-खाबड़ रास्तों और सूखे पहाड़ों से गुजरना पड़ता है। गुफा के भीतर माता की कोई मानव निर्मित मूर्ति नहीं है, बल्कि एक छोटा सा शिलाखंड है जिसे सिंदूर से रंगा गया है। भक्त इसी रूप में माता का पूजन करते हैं। कहा जाता है कि जो भी सच्चे मन से यहां मन्नत मांगता है, हिंगलाज भवानी उसकी झोली कभी खाली नहीं रहने देतीं।
UK News