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पूर्व PM के बेटे से करोड़ों का खेल: 7.8 करोड़ रुपये ले उड़े शातिर ठग, तरीका जान पुलिस भी रह गई दंग

देश की राजधानी दिल्ली के सबसे सुरक्षित और हाई-प्रोफाइल माने जाने वाले इलाके से एक बेहद सनसनीखेज और चौंकाने वाली ठगी की वारदात सामने आई है। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल (IK Gujral) के बेटे के साथ जालसाजों ने एक या दो लाख नहीं, बल्कि पूरे 7 करोड़ 80 लाख रुपये (₹7.8 करोड़) की भारी-भरकम धोखाधड़ी को अंजाम दिया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले के सामने आते ही दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं। ठगों ने जिस गजब और शातिराना तरीके से देश के पूर्व पीएम के परिवार के सदस्य को अपना निशाना बनाया, उसने हाई-टेक साइबर अपराधियों की चालाकी को एक बार फिर उजागर कर दिया है और इस मामले ने पूरे लुटियंस दिल्ली में हड़कंप मचा दिया है।

ऐसे बुना गया देश के सबसे रसूखदार परिवार के खिलाफ जाल

शुरुआती जांच और सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस पूरी धोखाधड़ी की स्क्रिप्ट को ठगों ने बेहद प्रोफेशनल अंदाज में तैयार किया था। जालसाजों ने पीड़ित का भरोसा जीतने के लिए फर्जी दस्तावेजों, कागजातों और लुभावने निवेश या किसी सरकारी क्लियरेंस का बहाना बनाया था। पूर्व प्रधानमंत्री के बेटे को झांसे में लेने के लिए अपराधियों ने खुद को बड़े कॉर्पोरेट घराने का प्रतिनिधि या प्रभावशाली अधिकारी के तौर पर पेश किया। कदम-कदम पर कानूनी और प्रामाणिक दिखने का नाटक रचते हुए ठगों ने अलग-अलग किश्तों में कुल 78,000,000 रुपये अपने बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए। जब तक पीड़ित को इस बात का अहसास हुआ कि वे किसी बड़े वित्तीय जाल चक्रव्यूह में फंस चुके हैं, तब तक देर हो चुकी थी और जालसाज रकम समेटकर रफूचक्कर हो चुके थे।

दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) एक्शन में

करोड़ों रुपये की इस हाई-प्रोफाइल ठगी की शिकायत दर्ज होते ही दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (Economic Offences Wing) और साइबर सेल ने मामले को तुरंत अपने हाथ में ले लिया है। पुलिस उन तमाम बैंक खातों की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है, जिनमें यह भारी-भरकम रकम ट्रांसफर की गई थी। इसके साथ ही डिजिटल फुटप्रिंट्स, मोबाइल लोकेशन और संदिग्ध ईमेल आईडी की बारीकी से जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह किसी संगठित अंतरराष्ट्रीय या अंतरराज्यीय साइबर सिंडिकेट का काम हो सकता है, जो तकनीकी रूप से बेहद सक्षम हैं। इस मामले में देश के कुछ बड़े शहरों के साथ-साथ एनसीआर (NCR) के इलाकों में भी छापेमारी की तैयारी की जा रही है ताकि आरोपियों को जल्द से जल्द दबोचा जा सके।

बड़े-बड़े रसूखदार भी क्यों बन रहे हैं साइबर ठगों का शिकार

यह कोई पहला मौका नहीं है जब किसी बेहद पढ़े-लिखे और रसूखदार परिवार के सदस्य को इस तरह चूना लगाया गया हो। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आज के आधुनिक जालसाज 'सोशल इंजीनियरिंग' (Social Engineering) का सहारा लेते हैं, जिसमें वे पीड़ित की प्रोफाइल, उनकी कमजोरियों और उनके सामाजिक रसूख का पहले गहराई से अध्ययन करते हैं। इसके बाद वे 'सॉफ्ट टारगेट' बनाकर बेहद सधे हुए तरीके से उनके साथ फ्रॉड करते हैं। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि साइबर ठगी और वित्तीय धोखाधड़ी के इस डिजिटल युग में कोई भी सुरक्षित नहीं है। विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी भी बड़े लेन-देन या निवेश से पहले संबंधित व्यक्ति या संस्था की पूरी तरह से स्वतंत्र जांच (Due Diligence) करना बेहद जरूरी है।