
वैश्विक राजनीति के मंच पर भारत का मान लगातार बढ़ रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अब तक दुनिया के 34 देश अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाज चुके हैं. लेकिन देश के भीतर अक्सर घरेलू राजनीति में प्रधानमंत्री पद की गरिमा और मर्यादा को तार-तार करने वाले बयान सामने आते रहते हैं. इस बीच, भारत के संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी नेताओं के इस आचरण को लेकर ब्रिटेन (UK) के वेस्टमिंस्टर संसदीय मॉडल का एक ऐसा उदाहरण पेश किया है, जिसने देश के राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर एक नई कानूनी बहस छेड़ दी है. किरेन रिजिजू ने ब्रिटिश संसद का एक वीडियो साझा करते हुए सवाल उठाया है कि क्या भारत को भी पीएम पद की संवैधानिक मर्यादा बनाए रखने के लिए अंग्रेजों के कड़े नियमों को अपनाना चाहिए?
ब्रिटिश संसद में क्या हुआ था? जानिए पाकिस्तानी मूल की सांसद के सस्पेंशन की इनसाइड स्टोरी
यह पूरा मामला इसी साल अप्रैल महीने का है, जब ब्रिटेन की संसद (House of Commons) में अमेरिका के राजदूत के रूप में पीटर मैंडेलसन की नियुक्ति को लेकर गरमागरम बहस चल रही थी. इसी दौरान लेबर पार्टी की सांसद और पाकिस्तानी मूल की ब्रिटिश नागरिक जारा सुल्ताना (Zarah Sultana) ने तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर पर तीखा व्यक्तिगत हमला बोल दिया. उन्होंने पीएम कीर स्टार्मर को 'बेयर-फेस्ड लायर' यानी सीधे तौर पर 'निर्लज्ज झूठा' कह दिया. जारा सुल्ताना ने सदन में कहा था कि प्रधानमंत्री पीटर मैंडेलसन का बचाव इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वे उनके निजी हितों के लिए काम करते हैं और ऐसा करके प्रधानमंत्री पूरे देश को धोखा दे रहे हैं.
जैसे ही जारा सुल्ताना के मुंह से 'झूठा' शब्द निकला, ब्रिटिश संसद के स्पीकर सर लिंडसे हॉयल ने तुरंत दखल दिया. उन्होंने जारा सुल्ताना को आदेश दिया कि वे अपने इस असंसदीय शब्द को तुरंत वापस लें और मर्यादा में रहें. लेकिन जब जारा सुल्ताना ने अपना बयान वापस लेने से साफ इनकार कर दिया, तो स्पीकर ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा—'बैठ जाओ और तुरंत सदन से बाहर जाओ.' नियमों की अवहेलना करने पर जारा सुल्ताना को तत्काल प्रभाव से 5 दिनों के लिए संसद से निलंबित (Suspend) कर दिया गया. इसी दिन रिफॉर्म यूके के एक अन्य सांसद ली एंडरसन को भी प्रधानमंत्री को 'झूठा' कहने के कारण सदन से बाहर का रास्ता दिखाया गया था.
आखिर क्यों ब्रिटेन में पीएम के अपमान पर तुरंत होती है जेल और सस्पेंशन जैसी कार्रवाई?
ब्रिटेन का वेस्टमिंस्टर मॉडल अपनी संसदीय परंपराओं और भाषा की शुचिता के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है. वहां की रूलबुक के अनुसार, संसद के भीतर कुछ खास शब्दों के इस्तेमाल पर पूरी तरह से कानूनी पाबंदी है. ब्रिटिश संसदीय नियमों के तहत:
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प्रतिबंधित शब्द: सदन के अंदर किसी भी सदस्य को 'लायर' (झूठा) या 'डिसऑनेस्ट' (बेईमान) कहना पूरी तरह वर्जित है.
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नीतियों बनाम व्यक्तिगत टिप्पणी: कोई भी सांसद सरकार की नीतियों, फैसलों और बजट की कितनी भी कड़ी आलोचना कर सकता है, लेकिन वह देश के प्रधानमंत्री पर किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत या अमर्यादित टिप्पणी नहीं कर सकता.
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स्पीकर के असीमित अधिकार: यदि कोई सांसद इन नियमों को तोड़ता है, तो स्पीकर के पास उसे बिना किसी देरी के तुरंत सदन से निष्कासित करने का पूर्ण अधिकार होता है.
भारत के नियम क्या कहते हैं और यहाँ कार्रवाई क्यों नहीं होती?
ब्रिटेन के इस कड़े एक्शन की तुलना अगर भारतीय संसद से की जाए, तो तस्वीर बिल्कुल अलग नजर आती है. भारत में भी लोकसभा और राज्यसभा की रूलबुक के नियम 380 और 381 के तहत सदन में असंसदीय भाषा (Unparliamentary Language) के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध है. इसके अलावा नियम 222 के तहत विशेषाधिकार हनन (Breach of Privilege) की कार्रवाई का भी प्रावधान है. भारत में राहुल गांधी से लेकर मल्लिकार्जुन खरगे और अधीर रंजन चौधरी जैसे कई बड़े नेता समय-समय पर प्रधानमंत्री के खिलाफ 'चोर' या 'कायर' जैसे शब्दों का प्रयोग कर चुके हैं.
लेकिन भारत में राजनीतिक और दलीय दबाव के कारण अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल होने पर सदन में सिर्फ भारी हंगामा और नारेबाजी होती है, मगर सांसदों के खिलाफ वैसी त्वरित और कड़ी निलंबन की कार्रवाई देखने को नहीं मिलती जैसी ब्रिटेन में हुई. भारतीय संसद में ज्यादा से ज्यादा यह होता है कि स्पीकर के आदेश पर उन विवादित शब्दों को सदन की आधिकारिक कार्यवाही के रिकॉर्ड (Expunged from Records) से हटा दिया जाता है, लेकिन अपराधी सांसद पर कोई बड़ा एक्शन नहीं हो पाता. यही वजह है कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू अब भारत में एक ऐसा मजबूत स्वदेशी संसदीय ढांचा बनाने की वकालत कर रहे हैं, जो प्रधानमंत्री के संवैधानिक पद की गरिमा की रक्षा करे और नेताओं को जनता के प्रति अधिक जिम्मेदार बनाए.
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