
News India Live, Digital Desk : इन दिनों देश के एयरपोर्ट्स पर कोहराम मचा हुआ है। इंडिगो (Indigo) की फ्लाइट्स लगातार लेट हो रही हैं या कैंसिल हो रही हैं। यात्री घंटों जमीन पर बैठे इंतज़ार कर रहे हैं। इस मंजर को देखकर विमानन जगत (Aviation World) के जानकारों को 2017 का एक किस्सा याद आ गया है, जब यूरोप की एक मशहूर एयरलाइन ने ठीक ऐसी ही गलती की थी, लेकिन अंजाम बहुत अलग हुआ था।बात हो रही है रायनएयर (Ryanair) की। यह यूरोप की एक बहुत बड़ी एयरलाइन है। 2017 में इस कंपनी के साथ भी वही हुआ था जो आज इंडिगो के साथ हो रहा है।2017 में क्या हुआ था?रायनएयर के पास पायलटों की कमी हो गई थी (रोस्टरिंग की गड़बड़ी)। नतीजा यह हुआ कि कंपनी को 6 हफ्तों के अंदर लगभग 2000 फ्लाइट्स कैंसिल करनी पड़ीं। लाखों यात्रियों का प्लान धरा का धरा रह गया। गुस्सा वहां भी था और यहाँ भी है, लेकिन फर्क ‘सजा’ में है।यूरोप का सख्त कानून (EU 261)यूरोप में यात्रियों के अधिकार बहुत मज़बूत हैं। वहां EU 261 कानून चलता है।इसके तहत, अगर एयरलाइन अपनी गलती (जैसे पायलट की कमी या मैनेजमेंट की खामी) की वजह से फ्लाइट कैंसिल करती है, तो उसे यात्री को हर्जाना देना पड़ता है।2017 में रायनएयर को अपनी इस गलती के लिए यात्रियों को मुआवजे (Compensation) के तौर पर 25 मिलियन यूरो (आज के हिसाब से करीब 200 करोड़ रुपये से ज्यादा) चुकाने पड़े थे। जी हाँ, सिर्फ फ्लाइट का रिफंड नहीं, बल्कि मानसिक परेशानी के लिए अलग से भारी-भरकम मुआवजा।भारत में हम कहाँ खड़े हैं?अब वापस अपने देश आते हैं। भारत में DGCA (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) के नियम थोड़े अलग हैं। यहाँ अगर मौसम खराब है (जैसे अभी कोहरा है) या ‘असाधारण परिस्थितियां’ हैं, तो एयरलाइन हर्जाना देने के लिए बाध्य नहीं है।अगर फ्लाइट एयरलाइन की गलती से कैंसिल होती है और आपको समय पर नहीं बताया गया, तो यहाँ भी मुआवजे का प्रावधान है, लेकिन वो यूरोप की तरह लाखों में नहीं होता। अक्सर एयरलाइन्स यात्रियों को:दूसरी फ्लाइट में टिकट (Rebooking) दे देती हैं।या फिर पूरा पैसा रिफंड कर देती हैं।ज्यादा इंतज़ार हुआ तो चाय-नाश्ता ऑफर कर देती हैं।काश यहाँ भी नियम सख्त होते!रायनएयर की घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि भारतीय यात्रियों के हक में अभी और सख्त कानून होने चाहिए। सोचिये, अगर यूरोप वाला नियम भारत में लागू होता, तो एयरलाइन्स शायद अपनी सर्विस को लेकर और ज्यादा सतर्क रहतीं। फिलहाल तो इंडिगो के यात्री रिफंड मिल जाने को ही गनीमत मान रहे हैं।अगली बार जब आप एयरपोर्ट पर घंटों इंतज़ार करें, तो याद रखियेगा कहीं दूर यूरोप में इसके लिए नोट गिने जाते हैं!
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