Wednesday , September 30 2026

बिहार की राजनीति में बड़ा धमाका, क्या तेजस्वी की RJD सच में बिखरने वाली है? इस मंत्री के दावे ने उड़ाई नींद

News India Live, Digital Desk: बिहार की राजनीति और वहाँ का सियासी मौसम कभी भी बदल सकता है, ये बात तो हम सब जानते हैं। लेकिन साल 2026 की शुरुआत के साथ ही जो खबरें निकलकर आ रही हैं, वे राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और तेजस्वी यादव के लिए थोड़े पसीने छुड़ाने वाली हो सकती हैं।ताजा मामला नीतीश सरकार के एक मंत्री के उस बयान से जुड़ा है जिसने बिहार के सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। दरअसल, दावा यह किया गया है कि तेजस्वी यादव की पार्टी, जो फिलहाल विधानसभा में सबसे बड़ा दल (78 विधायक) होने का दम भरती है, उसकी हालत पतली होने वाली है और कई विधायक पार्टी छोड़ने के लिए गेट पर खड़े हैं।“78 से 25 पर आ जाएगी RJD”दावे में कितनी सच्चाई?एनडीए (NDA) के कद्दावर नेताओं और नीतीश के मंत्रियों की तरफ से यह बात बार-बार कही जा रही है कि आरजेडी के विधायकों में गहरी नाराजगी है। हाल ही में आए एक बयान के अनुसार, राजद केकरीब 20 से 25 विधायक एनडीए के नेताओं के संपर्क में हैं। कहा तो यहाँ तक जा रहा है कि अगर जल्द ही चुनाव हुए या हालात बिगड़े, तो आरजेडी की संख्या 78 से घटकर सीधा 25 पर सिमट सकती है।अब सवाल यह है कि क्या ये सिर्फ राजनीतिक बयानबाज़ी है या फिर परदे के पीछे सच में कुछ बड़ा पक रहा है?तेजस्वी यादव को मिली ‘खास’ सलाहबिहार के मंत्री राम कृपाल (या जो भी संबंधित मंत्री हैं) ने तेजस्वी यादव को साफ़ शब्दों में सलाह दी है कि उन्हें इधर-उधर की बातों में वक्त बर्बाद करने के बजाय अपने ‘कुनबे’ यानी अपनी पार्टी को संभालना चाहिए। दावे के मुताबिक, विधायकों का मोह भंग इसलिए हो रहा है क्योंकि उन्हें अपना राजनीतिक भविष्य धुंधला नज़र आ रहा है।अक्सर यह देखा गया है कि जब भी किसी बड़े नेता के विधायक टूटने की खबरें आती हैं, तो उसके पीछे या तो नेतृत्व से नाराजगी होती है या फिर सत्ता की चाबी अपने हाथ में रखने की चाहत।क्या बिहार में फिर ‘पल्टा मार’ वाली स्थिति बनेगी?नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सरकार फिलहाल मज़बूत दिख रही है। लेकिन बिहार की राजनीति की तासीर ऐसी है कि यहाँ ‘अनिश्चितता’ ही सबसे बड़ी हकीकत है। अगर आरजेडी के विधायक सच में टूटे, तो विपक्षी खेमे के लिए यह एक बहुत बड़ा झटका होगा। तेजस्वी यादव के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस वक्त यही है कि वे कैसे अपने विधायकों के भरोसे को फिर से जीतें और एनडीए की सेंधमारी से बचें।जमीनी हकीकत क्या है?हकीकत तो यह है कि विधानसभा चुनावों के करीब आते ही ऐसी बयानबाजियाँ और ‘तोड़-फोड़’ की कोशिशें बढ़ जाती हैं। जहाँ एनडीए का दावा है कि उनके यहाँ ऑल इज़ वेल है, वहीं महागठबंधन इन बातों को अफवाह बताकर सिरे से खारिज कर रहा है। लेकिन धुआँ तभी उठता है जब कहीं न कहीं थोड़ी आग तो लगी होती है।2026 बिहार के लिए सियासी दांव-पेच का साल साबित होने वाला है। देखना दिलचस्प होगा कि तेजस्वी अपने किले को बचा पाते हैं या नीतीश-बीजेपी की जोड़ी आरजेडी में सेंध लगाने में कामयाब हो जाती है।आप इस पूरे सियासी खेल को किस तरह देख रहे हैं? क्या सच में तेजस्वी के विधायक बागी हो सकते हैं? अपनी राय हमें कमेंट्स में ज़रूर बताएं।