
बिहार के अन्नदाताओं और कृषि उद्योग से जुड़े कारोबारियों के लिए इस वक्त की सबसे बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। राज्य में आगामी खरीफ विपणन सीजन के तहत धान की सरकारी खरीद को लेकर प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं, जिससे किसानों के साथ-साथ राइस मिलरों के चेहरों पर भी मुस्कान लौट आई है। सरकार के इस ताजा फैसले से न सिर्फ फसल बेचने की प्रक्रिया आसान होगी बल्कि समय पर मिलिंग और भुगतान का रास्ता भी साफ हो गया है। आइए जानते हैं कि इस बार की नीति में क्या कुछ खास बदला है और किसे कितना फायदा मिलने जा रहा है।
1 नवंबर से चरणबद्ध तरीके से शुरू होगी धान की खरीद
राज्य सरकार और सहकारिता विभाग द्वारा जारी नए शेड्यूल के मुताबिक बिहार में धान खरीद की शुरुआत तय तारीखों पर होगी। उत्तर बिहार के जिलों में पैक्स और व्यापार मंडलों के माध्यम से 1 नवंबर से धान की खरीद आधिकारिक तौर पर शुरू हो जाएगी, जबकि दक्षिण बिहार के जिलों में यह प्रक्रिया 15 नवंबर से आरंभ होगी। यह पूरी खरीद प्रक्रिया अगले साल यानी 31 मार्च तक suvidhaajanak तरीके से चलाई जाएगी। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह है कि राज्य के दूर-दराज के गांवों तक बैठे किसानों को उनकी मेहनत का सही समय पर पूरा मोल मिल सके और उन्हें बिचौलियों के चक्कर में न पड़ना पड़े।
राइस मिलरों के लिए आई गुड न्यूज और सुगम व्यवस्था
धान खरीद की इस प्रक्रिया में राइस मिलरों के लिए भी खास दिशा-निर्देश और सहूलियतें दी गई हैं। पिछले सत्रों में मिलरों को समय पर धान के उठाव और भंडारण को लेकर कई तरह की व्यावहारिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता था, जिसे ध्यान में रखते हुए इस बार सहकारिता विभाग ने पैक्स केंद्रों के साथ मिलरों के बेहतर तालमेल पर जोर दिया है। पर्याप्त मात्रा में बारदाने (जूट के बोरे) की उपलब्धता और समय पर चावल की मिलिंग का जिम्मा तय किया गया है ताकि गोदामों में जाम की स्थिति न बने। इस गुड न्यूज से राइस मिलर एसोसिएशन ने भी राहत की सांस ली है क्योंकि तय समय पर धान मिलने से कस्टम मिलिंग का काम सुचारू रूप से चल सकेगा और समय पर भारतीय खाद्य निगम को चावल की आपूर्ति हो सकेगी।
न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी और नया रेट चार्ट
किसानों को आर्थिक संबल प्रदान करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने इस बार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में इजाफा किया है। किसानों को सामान्य धान के लिए इस बार 2,441 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जाएगा, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग 72 रुपये प्रति क्विंटल अधिक है। वहीं, उच्च गुणवत्ता वाले ग्रेड-ए धान का समर्थन मूल्य 2,461 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। पिछले वर्ष की तुलना में यह बढ़ोतरी किसानों की आमदनी को बढ़ाने में सीधा मददगार साबित होगी। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़े हुए दामों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और बाजारों में भी नकदी का प्रवाह बेहतर होगा।
मात्र 48 घंटे के भीतर सीधे बैंक खाते में पहुंचेगी राशि
किसानों की सबसे बड़ी शिकायत हमेशा से भुगतान में होने वाली देरी की रही है, लेकिन इस बार सरकार ने इस प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और हाई-टेक बना दिया है। सहकारिता मंत्री द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार पैक्स केंद्र पर धान बेचने के महज 48 घंटे के भीतर किसान के सत्यापित बैंक खाते में डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से पूरी राशि ट्रांसफर कर दी जाएगी। इससे किसानों को खाद, बीज और अगली फसल की बुआई के लिए पैसों की तंगी का सामना नहीं करना पड़ेगा। भुगतान की यह तेज रफ्तार डिजिटल इंडिया और राज्य सरकार की पारदर्शिता की नीति का एक बेहतरीन उदाहरण है।
एग्रीस्टैक आईडी (Agri Stack ID) और ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य
यदि आप भी इस योजना का लाभ उठाकर अपना धान सरकारी सेंटर पर बेचना चाहते हैं, तो कुछ जरूरी औपचारिकताओं को समय रहते पूरा करना बेहद आवश्यक है। इस साल सरकार ने व्यवस्था को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए किसानों का कृषि विभाग के पोर्टल esahkari.bihar.gov.in पर रजिस्ट्रेशन होना अनिवार्य कर दिया है। इसके साथ ही, किसानों के पास एग्रीस्टैक आईडी (Agri Stack ID) होना भी जरूरी कर दिया गया है ताकि फर्जीवाड़े को रोका जा सके और केवल असली किसानों तक ही एमएसपी का लाभ पहुंचे। जो किसान अब तक अपनी आईडी नहीं बनवा सके हैं, वे अपने नजदीकी पैक्स अध्यक्ष या कॉमन सर्विस सेंटर की मदद से तुरंत यह प्रक्रिया पूरी कर लें।
भंडारण और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
धान खरीद के दौरान मौसम के मिजाज और खुले में रखे अनाज के भीगने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने इस बार पहले से ही पुख्तर इंतजाम किए हैं। सभी पैक्स और व्यापार मंडल गोदामों को दुरुस्त किया जा रहा है ताकि खरीद के तुरंत बाद धान को सुरक्षित रखा जा सके। इसके अलावा, बोरे की कमी किसी भी केंद्र पर न हो, इसके लिए जिलावार एडवांस में आपूर्ति भेज दी गई है। प्रशासनिक अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि यदि किसी केंद्र पर लापरवाही बरती जाती है तो तुरंत सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिससे किसानों और राइस मिलरों दोनों को सुचारू माहौल मिल सके।
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