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बिहार में नाम बदलो की सियासत पटना जू और डेयरी संस्थान से हटेगा संजय गांधी का नाम? सम्राट चौधरी के बयान से मचा हड़कंप

News India Live, Digital Desk: बिहार की राजनीति में एक बार फिर नाम बदलने को लेकर नई बहस छिड़ गई है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (Samrat Choudhary) के एक हालिया संकेत ने राज्य के दो प्रमुख संस्थानों के नाम परिवर्तन की चर्चाओं को हवा दे दी है। खबर है कि पटना का प्रसिद्ध संजय गांधी जैविक उद्यान (Patna Zoo) और बिहार राज्य डेयरी तकनीकी संस्थान के नाम से ‘संजय गांधी’ का नाम हटाया जा सकता है।क्या है पूरी योजना? (The Renaming Proposal)रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्य सरकार कुछ प्रमुख संस्थानों के नामों की समीक्षा कर रही है। इसमें विशेष रूप से उन नामों को बदलने पर विचार किया जा रहा है जो किसी एक विशेष राजनीतिक कालखंड या परिवार से जुड़े हुए हैं।पटना जू (Patna Zoo): राजधानी पटना का सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल ‘संजय गांधी जैविक उद्यान’ के नाम को बदलकर किसी महापुरुष या स्थानीय ऐतिहासिक पहचान से जोड़ने का प्रस्ताव है।डेयरी तकनीकी संस्थान: इसी तरह, बिहार राज्य डेयरी टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट के नाम को भी अधिक ‘बिहार-केंद्रित’ या ‘तकनीकी-केंद्रित’ नाम देने की सुगबुगाहट है।सम्राट चौधरी का पक्ष (Samrat Choudhary’s Stance)डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने मीडिया से बात करते हुए इस बात के संकेत दिए हैं कि सरकार राज्य के गौरव को बढ़ाने वाले नामों को प्राथमिकता देगी। उनका मानना है कि:स्थानीय पहचान: संस्थानों के नाम बिहार की मिट्टी और यहां के महापुरुषों की पहचान को दर्शाने वाले होने चाहिए।राजनीतिक संदेश: इस कदम को बिहार में कांग्रेस और विपक्षी विचारधारा के प्रतीकों को कम करने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।विपक्ष की प्रतिक्रिया और राजनीतिक घमासानइस खबर के सामने आते ही विपक्षी दलों, विशेषकर राजद (RJD) और कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोल दिया है:इतिहास से छेड़छाड़: विपक्ष का आरोप है कि बीजेपी नीत सरकार विकास के मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए केवल नाम बदलने की राजनीति कर रही है।जनता की राय: कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि संस्थानों के नाम बदलने के बजाय उनकी सुविधाओं और गुणवत्ता में सुधार पर ध्यान देना चाहिए।ऐतिहासिक संदर्भपटना जू की स्थापना 1969 में हुई थी और बाद में इसका नाम बदलकर संजय गांधी जैविक उद्यान रखा गया था। यह देश के सबसे बेहतरीन चिड़ियाघरों में से एक माना जाता है। वहीं, डेयरी संस्थान राज्य में दुग्ध उत्पादन और तकनीक के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाता रहा है।