
News India Live, Digital Desk: बिहार के अपराध जगत में रामधनी यादव का नाम एक समय खौफ का पर्याय माना जाता था। लेकिन ईओ कृष्ण भूषण हत्याकांड के बाद पुलिस ने जब इस बाहुबली पर शिकंजा कसा, तो जो मंजर सामने आया वह किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं था। आज रामधनी यादव की मौत के बाद वह मुठभेड़ एक बार फिर चर्चा में है, जब उसने भागलपुर पुलिस को खुली चुनौती दे दी थी। पुलिस की घेराबंदी और रामधनी की ओर से हुई जवाबी फायरिंग के बीच सुल्तानगंज की गलियां गोलियों की आवाज से गूंज उठी थीं।कृष्ण भूषण हत्याकांड और पुलिस का ‘मिशन रामधनी’ कार्यपालक पदाधिकारी (EO) कृष्ण भूषण की हत्या के बाद भागलपुर पुलिस पर भारी दबाव था। जांच की सुई जैसे ही रामधनी यादव की ओर घूमी, पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए जाल बिछाना शुरू कर दिया। इनपुट मिला कि रामधनी अपने गुर्गों के साथ इलाके में ही छिपा हुआ है। तत्कालीन जांबाज पुलिस अधिकारियों की अगुवाई में भारी फोर्स ने रामधनी के ठिकाने को चारों तरफ से घेर लिया। पुलिस का इरादा सरेंडर कराने का था, लेकिन रामधनी के इरादे कुछ और ही थे।जब शुरू हुई गोलियों की बारिश: आमने-सामने की जंग जैसे ही पुलिस की गाड़ियां रामधनी के करीब पहुंचीं, उसने और उसके साथियों ने पुलिस टीम पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। अचानक हुए इस हमले से पुलिस को भी बचाव की मुद्रा में आना पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो कई राउंड गोलियां चलीं। पुलिस ने लाउडस्पीकर से बार-बार सरेंडर करने की चेतावनी दी, लेकिन रामधनी पुलिस पर भारी पड़ने की कोशिश कर रहा था। पुलिस की जवाबी कार्रवाई और कड़े घेरे ने आखिरकार बाहुबली को बैकफुट पर धकेल दिया।खेतों से लेकर घरों तक पीछा, फिर हुई गिरफ्तारी मुठभेड़ के दौरान रामधनी ने भागने की पूरी कोशिश की। उसने खेतों और संकरी गलियों का सहारा लिया, लेकिन पुलिस की विशेष टीम (Special Team) ने उसे भागने का कोई मौका नहीं दिया। अंततः चारों तरफ से घिर जाने और गोला-बारूद खत्म होने की स्थिति में पुलिस ने रामधनी यादव को दबोच लिया। यह एनकाउंटर भागलपुर पुलिस की एक बड़ी कामयाबी मानी गई थी, क्योंकि रामधनी को पकड़ना किसी चुनौती से कम नहीं था।एनकाउंटर के बाद का खौफ और राजनीतिक सफर इस मुठभेड़ और गिरफ्तारी के बाद रामधनी यादव का रसूख कम होने के बजाय चर्चा में और बढ़ गया। जेल जाने के बावजूद उसके प्रभाव में कमी नहीं आई, जिसका प्रमाण उसकी पत्नी नीलम देवी का 2020 में एलजेपी से चुनाव लड़ना था। आज जब रामधनी की मौत की खबर आई है, तो लोग उस दौर को याद कर रहे हैं जब भागलपुर में पुलिस और अपराधियों के बीच ‘आर-पार’ की जंग छिड़ी थी। इस एनकाउंटर ने यह साबित कर दिया था कि कानून के हाथ अपराधियों की पहुंच से हमेशा लंबे होते हैं।
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