News India Live, Digital Desk: बिहार की सियासत में एक बड़े ऐतिहासिक बदलाव की घड़ी आ गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बिहार की कमान किसके हाथों में होगी। सूत्रों के मुताबिक, आगामी 10 अप्रैल को देश की राजधानी दिल्ली में भाजपा आलाकमान और एनडीए (NDA) के शीर्ष नेताओं की एक बेहद अहम बैठक होने जा रही है। इस बैठक में बिहार के नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लगेगी। ‘पीछले दो दशकों से नीतीश कुमार के इर्द-गिर्द घूमने वाली बिहार की राजनीति अब एक नए मोड़ पर खड़ी है, जहाँ भाजपा पहली बार अपना मुख्यमंत्री बनाने की तैयारी में है।’नीतीश कुमार का इस्तीफा और राज्यसभा की राहराजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। दिल्ली जाने से पहले वह 8 अप्रैल को पटना में अपनी कैबिनेट की आखिरी बैठक कर सकते हैं। इसके बाद वह दिल्ली रवाना होंगे और शपथ ग्रहण के बाद वापस लौटकर राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप देंगे। नीतीश कुमार का यह कदम बिहार में एक नए गठबंधन स्वरूप और सत्ता के केंद्र में बदलाव का साफ संकेत है। जेडीयू और भाजपा के बीच सत्ता के हस्तांतरण की रूपरेखा लगभग तैयार कर ली गई है।रेस में ये नाम सबसे आगे, ‘सरप्राइज’ कार्ड भी तैयारभाजपा के खेमे में नए मुख्यमंत्री को लेकर मंथन का दौर जारी है। रेस में सबसे आगे डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय के नाम चल रहे हैं। सम्राट चौधरी को जहां उनके आक्रामक तेवर और ओबीसी (OBC) वोट बैंक पर पकड़ के लिए जाना जाता है, वहीं नित्यानंद राय केंद्रीय नेतृत्व के बेहद भरोसेमंद माने जाते हैं। इनके अलावा विजय कुमार सिन्हा और दिलीप जायसवाल के नामों की भी चर्चा है। हालांकि, भाजपा अक्सर अपने फैसलों से चौंकाती रही है, ऐसे में किसी ‘डार्क हॉर्स’ (चौंकाने वाले चेहरे) के नाम से भी इनकार नहीं किया जा सकता।दिल्ली की बैठक में खिंचेगी बिहार की नई ‘सियासी रेखा’10 अप्रैल की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और जेपी नड्डा के साथ नीतीश कुमार खुद भी मौजूद रह सकते हैं। इस बैठक में न केवल मुख्यमंत्री का नाम तय होगा, बल्कि नए मंत्रिमंडल के स्वरूप और जेडीयू के साथ भविष्य की साझेदारी पर भी विस्तार से चर्चा होगी। माना जा रहा है कि 14 अप्रैल के बाद बिहार में नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जा सकता है। फिलहाल, पटना से लेकर दिल्ली तक सियासी हलचल तेज है और हर किसी को 10 अप्रैल के फैसले का इंतजार है।
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