
बिहार विधान परिषद के कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र (Kosi Graduates Constituency) के लिए वोटों की गिनती का काम पूर्णिया स्थित मतगणना केंद्र (पूर्णिया जिला स्कूल परिसर) पर बेहद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जारी है। 14 जिलों और 1.34 लाख से अधिक स्नातक मतदाताओं वाले इस विशाल और हाई-प्रोफाइल क्षेत्र में इस बार का मुकाबला बहुकोणीय और बेहद दिलचस्प हो चुका है। बीजेपी (BJP) ने अपने मौजूदा निवर्तमान विधान पार्षद डॉ. एनके यादव पर दांव लगाते हुए उन्हें हैट्रिक बनाने के लिए मैदान में उतारा है। वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रत्याशी डॉ. नितेश कुमार, कांग्रेस के मनोज कुमार जायसवाल और प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) की जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी डॉ. रजनीश रंजन के मैदान में उतरने से वोटों के समीकरण पूरी तरह से उलझ गए हैं। 14 टेबल पर 14 राउंड में चल रही मतगणना प्रक्रिया में प्रथम और द्वितीय वरीयता के वोटों की गिनती की जा रही है। आइए जानते हैं कि मतगणना केंद्र से क्या ताजा रुझान निकलकर सामने आ रहे हैं और किस प्रत्याशी की किस्मत का ताला खुलने वाला है।
#1 बीजेपी के एनके यादव की साख दांव पर, क्या लगा पाएंगे जीत की हैट्रिक?
कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र पिछले कुछ कार्यकालों से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। बीजेपी प्रत्याशी डॉ. एनके यादव ने 2020 के पिछले चुनाव में आरजेडी के नीतेश कुमार को 6,901 मतों के अंतर से पराजित कर जीत का परचम लहराया था। हालांकि, इस बार एनके यादव के लिए राह उतनी आसान नहीं मानी जा रही है। 14 जिलों—भागलपुर, नवगछिया, सहरसा, मधेपुरा, सुपौल, पूर्णिया, अररिया, किशनगंज, कटिहार, खगड़िया, मुंगेर, लखीसराय, शेखपुरा और जमुई में फैले इस निर्वाचन क्षेत्र में एंटी-इंकंबेंसी और बौद्धिक वर्ग की नई अपेक्षाएं उनके सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर रही हैं। एनडीए खेमे को भरोसा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शासन मॉडल और स्नातकों के लिए किए गए कार्यों के बल पर एनके यादव अपनी सीट बचाने में सफल रहेंगे।
#1 आरजेडी के नितेश कुमार और कांग्रेस के मनोज जायसवाल की रणनीति
विपक्ष की ओर से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने एक बार फिर डॉ. नितेश कुमार को अपना प्रत्याशी बनाया है। नितेश कुमार ने पिछले चुनाव में भी कड़ी टक्कर दी थी और इस बार वे स्नातकों की बेरोजगारी, उच्च शिक्षा में लेट-लतीफी और स्थानीय मुद्दों को जोर-शोर से उठाकर अपनी स्थिति मजबूत करने का दावा कर रहे हैं। वहीं महागठबंधन के भीतर से ही कांग्रेस प्रत्याशी मनोज कुमार जायसवाल के मैदान में होने से विपक्षी वोटों में बिखराव देखा जा रहा है। इसके बावजूद आरजेडी का मानना है कि इस बार स्थानीय और जातिगत समीकरणों के साथ-साथ युवाओं का रुझान बदलाव के पक्ष में है, जिससे परिणाम उनके पक्ष में आ सकते हैं।
#1 प्रशांत किशोर की जन सुराज का पहला बड़ा दांव: रजनीश रंजन बिगाड़ेंगे किसका खेल?
बिहार की राजनीति में नए विकल्प के रूप में उभरी प्रशांत किशोर की 'जन सुराज पार्टी' (Jan Suraaj) ने कोसी स्नातक सीट पर डॉ. रजनीश रंजन पर भरोसा जताया है। जन सुराज पहली बार विधान परिषद चुनाव के मैदान में सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारकर किस्मत आजमा रही है। युवाओं, प्रोफेसरों, डॉक्टरों और पढ़े-लिखे स्नातकों के बीच प्रशांत किशोर के जमीनी अभियानों का असर देखने को मिला है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रजनीश रंजन द्वारा काटे जाने वाले वोट सीधे तौर पर बीजेपी और आरजेडी दोनों के परंपरागत वोट बैंक में सेंध लगा रहे हैं। यदि जन सुराज प्रत्याशी प्रथम वरीयता (First Preference Votes) में मजबूत वोट हासिल करते हैं, तो द्वितीय वरीयता के वोटों की गिनती के दौरान मुकाबला किसी भी दिशा में मुड़ सकता है।
#1 14 राउंड की गिनती और वरीयता मतों का पेचीदा गणित
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव आम विधानसभा या लोकसभा चुनावों से बिल्कुल अलग होता है। इसमें मतपत्र (Ballot Paper) पर बैंगनी रंग के स्केच पेन से मतदाताओं को अपनी पसंद (1, 2, 3…) दर्ज करनी होती है। चुनाव जीतने के लिए उम्मीदवार को कुल वैध मतों का 50% + 1 का 'कोटा' (Quota) हासिल करना अनिवार्य होता है। पूर्णिया जिला स्कूल परिसर स्थित स्ट्रॉन्ग रूम और काउंटिंग सेंटर पर कुल 14 टेबल बनाए गए हैं। यदि 14 राउंड की प्रथम वरीयता की गिनती के बाद कोई भी प्रत्याशी कोटा हासिल नहीं कर पाता है, तो सबसे कम वोट पाने वाले उम्मीदवारों को एलिमिनेट कर उनके द्वितीय वरीयता (Second Preference) के वोट शीर्ष प्रत्याशियों में बांटे जाएंगे। इसी कारण से यह मुकाबला देर शाम या देर रात तक खिंचने के पूरे आसार हैं।
#1 पूर्णिया मतगणना केंद्र पर त्रिस्तरीय सुरक्षा और सीसीटीवी से निगरानी
सत्यता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने मतगणना केंद्र पर सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए हैं। पूर्णिया के प्रमंडलीय आयुक्त और जिलाधिकारी (जिला निर्वाचन पदाधिकारी) स्वयं मतगणना हॉल की निगरानी कर रहे हैं। त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरे के भीतर केवल वैध प्रवेश पत्र धारक एजेंटों और गणना कर्मियों को ही जाने की अनुमति दी गई है। पूरे परिसर की वीडियोग्राफी और सीसीटीवी कैमरों से लाइव मॉनिटरिंग की जा रही है। कोसी अंचल के 14 जिलों के हजारों स्नातकों की नजरें अब मतगणना केंद्र के आधिकारिक लाउडस्पीकर और चुनाव आयोग की राउंड-वार घोषणाओं पर टिकी हुई हैं।
UK News
