
लैटिन अमेरिका के सबसे बड़े और ताकतवर देश ब्राजील (Brazil) की राजनीतिक फिजाओं से इस वक्त एक बहुत ही बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। दुनिया भर की निगाहें इस वक्त ब्राजील पर टिकी हुई हैं, क्योंकि आज वहां राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए दूसरे दौर (Run-off Election) का मतदान हो रहा है। देश की सत्ता पर काबिज होने के लिए इस महामुकाबले में मौजूदा वामपंथी राष्ट्रपति और दिग्गज नेता लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा (Luiz Inacio Lula da Silva) और उनके सामने दक्षिणपंथी धुरंधर फ्लेवियो बोल्सोनारो (Flavio Bolsonaro) आमने-सामने हैं। चुनाव के इस अंतिम और बेहद रोमांचक चरण में अपनी जीत को पूरी तरह सुनिश्चित करने के लिए 80 वर्षीय राष्ट्रपति लूला ने जनता को लुभाने के लिए 5 बड़े लोकलुभावन वादों और फ्रीबीज का एक मास्टरस्ट्रोक चला है, जिसे उनका 'ट्रंप कार्ड' माना जा रहा है। आइए विस्तार से जानते हैं कि ब्राजील के इस बहुप्रतीक्षित चुनाव में क्या समीकरण बन रहे हैं और लूला के इन नए वादों का जनता पर कितना असर पड़ रहा है।
ब्राजील में राष्ट्रपति चुनाव का दूसरा दौर आज, लूला और बोल्सोनारो के बीच कांटे की टक्कर
ब्राजील की राजधानी ब्रासीलिया समेत पूरे देश में रविवार को राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे और निर्णायक दौर के लिए वोटिंग जारी है। इस चुनाव में राजनीति के पुराने खिलाड़ी और मौजूदा राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा एक बार फिर देश की सत्ता अपने हाथों में रखने के लिए चौथी बार ऐतिहासिक जीत दर्ज करने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं।
दूसरी ओर, उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में 45 वर्ष के युवा और ऊर्जावान दक्षिणपंथी सीनेटर फ्लेवियो बोल्सोनारो उन्हें कड़ी टक्कर दे रहे हैं। पहले दौर के मतदान में मिले परिणामों के बाद इस मुकाबले का रोमांच और अधिक बढ़ गया है। जहां एक तरफ बोल्सोनारो के समर्थक देश में कड़े बदलाव, संगठित अपराध के खिलाफ सख्त कार्रवाई और करों (Taxes) में कटौती की उम्मीद लगाए बैठे हैं, वहीं दूसरी तरफ लूला अपनी नीतियों के जरिए मतदाताओं को अपने पाले में खींचने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।
लूला ने चला 'ट्रंप कार्ड': जनता के लिए पांच बड़े आर्थिक राहत पैकेजों का किया एलान
चुनावी जंग में अपनी स्थिति को मजबूत करने और पहले दौर की पिछड़ी हुई स्थिति को पलटने के लिए राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा ने चुनाव प्रचार के अंतिम क्षणों में एक ऐसा मास्टरस्ट्रोक खेला है, जिसने राजनीतिक पंडितों को भी हैरान कर दिया है। लूला ने जनता को सीधे तौर पर आर्थिक राहत देने के लिए पांच बड़े और लोकलुभावन वादों का एलान किया है:
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सरकारी मदद में भारी इजाफा: गरीबों को मिलने वाली सरकारी वित्तीय सहायता को 15 प्रतिशत तक बढ़ाने की घोषणा की गई है, जिस पर लगभग 11,400 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस योजना से देश के करीब 5 करोड़ लोगों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है।
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कार्य संस्कृति में बदलाव: देश में हफ्ते में 6 दिन की जगह केवल 5 दिन काम करने का नियम लागू करने का प्रस्ताव।
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सस्ते कर्ज की सुविधा: छोटे कारोबारियों और मध्यम वर्ग को आगे बढ़ाने के लिए बेहद कम ब्याज दरों पर आसान कर्ज उपलब्ध कराना।
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ईंधन पर राहत: जनता को महंगाई से बड़ी राहत देते हुए पेट्रोल पर लगने वाले टैक्स को एक महीने के लिए पूरी तरह से खत्म करना।
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सार्वजनिक परिवहन: आम नागरिकों के लिए दो दिनों तक पब्लिक ट्रांसपोर्ट को पूरी तरह से मुफ्त करने का बड़ा एलान।
यह पूरा आर्थिक राहत पैकेज सीधे तौर पर गरीब और मध्यम वर्ग के मतदाताओं को साधने के लिए डिजाइन किया गया है, ताकि मतदान के दिन जनता का भारी समर्थन उनके पक्ष में आ सके।
नई पीढ़ी और जेन-जी को साधने की होड़, 80 साल के लूला ने सीखा स्मार्टफोन चलाना
इस चुनाव की एक और सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह मुकाबला सिर्फ दो राजनीतिक विचारधाराओं का नहीं, बल्कि दो अलग-अलग पीढ़ियों का भी है। एक तरफ 80 साल के अनुभवी राजनेता लूला डा सिल्वा हैं, तो दूसरी तरफ 45 साल के युवा फ्लेवियो बोल्सोनारो हैं।
युवा मतदाता यानी जेन-जी (Gen-Z) को अपने पक्ष में करने के लिए फ्लेवियो बोल्सोनारो सोशल मीडिया और आधुनिक तौर-तरीकों का बखूबी इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर उम्र के इस पड़ाव पर पहुंचकर भी लूला पीछे नहीं हटे हैं और उन्होंने नई पीढ़ी से जुड़ने के लिए स्मार्टफोन का इस्तेमाल करना और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय होना सीखा है। दोनों ही नेता डिजिटल माध्यमों से लेकर रैलियों तक के जरिए युवाओं के बीच अपनी पैठ बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
पहले दौर में आगे रहे थे बोल्सोनारो, क्या इतिहास बदल पाएंगे लूला
बीते 4 अक्टूबर को हुए राष्ट्रपति चुनाव के पहले दौर के मतदान में फ्लेवियो बोल्सोनारो ने बढ़त हासिल की थी और वे सबसे आगे रहे थे। उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी उनके प्रदर्शन की सराहना करते हुए इसे एक बड़ी जीत बताया था।
राजनीतिक इतिहास के पन्नों को पलटें तो ब्राजील के चुनावी इतिहास में ऐसा शायद ही कभी हुआ हो कि पहले दौर में पिछड़ने वाला कोई उम्मीदवार दूसरे दौर में बाजी पलटकर अंतिम रूप से राष्ट्रपति की कुर्सी पर कब्जा जमा सका हो। यही वजह है कि लूला के सामने इस बार इतिहास रचने की एक बड़ी चुनौती है। बोल्सोनारो के समर्थकों का मानना है कि वे देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देंगे और कानून-व्यवस्था को मजबूत करेंगे। उन्होंने मतदान से ठीक पहले मिनास गेरैस की राजधानी बेलो होरिज़ोंटे में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया, जिसे राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि 1980 के दशक से यह परंपरा रही है कि जो उम्मीदवार इस क्षेत्र में जीतता है, वही देश की सत्ता पर काबिज होता है।
कौन हैं फ्लेवियो बोल्सोनारो? राजनीतिक पृष्ठभूमि और वर्तमान हालात
फ्लेवियो बोल्सोनारो कोई नया चेहरा नहीं हैं; वे ब्राजील के पूर्व दक्षिणपंथी राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो (Jair Bolsonaro) के सुपुत्र हैं। जायर बोल्सोनारो 2022 के पिछले राष्ट्रपति चुनाव में हारने के बाद कथित तौर पर तख्तापलट की साजिश रचने के गंभीर मामलों में घिरे हुए हैं और वर्तमान में 27 साल की लंबी सजा काट रहे हैं।
पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए फ्लेवियो ने दक्षिणपंथी राजनीति के कट्टर समर्थकों को एकजुट किया है। आज हो रहे इस मतदान के नतीजे न केवल ब्राजील के भविष्य की दिशा तय करेंगे, बल्कि यह पूरे लैटिन अमेरिका की भू-राजनीति पर भी गहरा प्रभाव डालेंगे। देखना यह होगा कि लूला का 'ट्रंप कार्ड' काम आता है या युवा बोल्सोनारो बाजी मार ले जाते हैं।
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