
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा भीषण युद्ध अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है, जिससे वैश्विक राजनीति में तनाव काफी बढ़ गया है। ब्लैक सी (Black Sea) क्षेत्र में रूसी जहाजों पर लगातार हो रहे ड्रोन हमलों से बौखलाए रूस ने यूक्रेन पर सीधा और आक्रामक हमलावर रुख अख्तियार कर लिया है। मॉस्को ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए आरोप लगाया है कि यूक्रेन जानबूझकर उन अंतरराष्ट्रीय जहाजों और व्यापारिक मार्गों को निशाना बना रहा है जो रूस के मित्र देशों से जुड़े हुए हैं। इस बयान के बाद से समुद्री व्यापारिक मार्गों पर सुरक्षा को लेकर भारी संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
क्या है पूरा मामला और क्यों बढ़ रहा है ब्लैक सी में तनाव?
रूस के विदेश मंत्रालय और रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, यूक्रेन लगातार समुद्री ड्रोन (Sea Drones) और मिसाइलों का इस्तेमाल करके उन पोतों और कमर्शियल जहाजों को अपना निशाना बना रहा है जो रूस और उसके सहयोगी देशों के बीच साझी आर्थिक गतिविधियों को संचालित कर रहे हैं। मॉस्को का कहना है कि यह केवल रूसी हितों पर हमला नहीं है, बल्कि यह उन तमाम मित्र देशों की संप्रभुता और आर्थिक सुरक्षा पर भी सीधा प्रहार है जो स्वतंत्र रूप से व्यापार कर रहे हैं। इस ताजा घटनाक्रम के बाद ब्लैक सी में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा कर दिया गया है और रूस की नौसेना हाई अलर्ट मोड पर आ गई है।
वैश्विक व्यापार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर क्या होगा असर?
यूक्रेन और रूस के बीच समुद्री मोर्चे पर बढ़ते इस टकराव का सीधा असर वैश्विक कमोडिटी मार्केट, ईंधन की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पर पड़ सकता है। जानकारों का मानना है कि यदि ब्लैक सी में जहाजों पर हमले इसी तरह जारी रहे, तो खाद्यान्न और ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने का खतरा और ज्यादा गहरा जाएगा। पश्चिमी देशों और रूस के बीच कूटनीतिक दूरियां पहले से ही चरम पर हैं, ऐसे में इस नए समुद्री विवाद ने दुनिया भर के देशों की चिंताएं और बढ़ा दी हैं, जिस पर संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक मंचों की भी पैनी नजर बनी हुई है।
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