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मानसून सत्र से पहले बिहार में सियासी घमासान! तेजस्वी यादव के ‘गायब’ होने पर बीजेपी-जेडीयू का तंज, गरमाई राजनीति

बिहार की सियासत में मानसून सत्र से पहले ही गर्मी का पारा अपने चरम पर है। आगामी 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र के ठीक पहले नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। सत्ताधारी एनडीए (BJP-JDU) गठबंधन ने तेजस्वी यादव के सत्र से पहले राज्य में न होने या सक्रियता न दिखाने पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष के इस प्रमुख चेहरे की चुप्पी और अनुपस्थिति पर सत्ता पक्ष ने इसे जनता से दूरी और जिम्मेदारी से भागने के तौर पर पेश करना शुरू कर दिया है, जिससे सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

सत्ता पक्ष का हमला, 'विपक्ष का नेता ही गायब'

बीजेपी और जेडीयू के नेताओं ने इसे बड़ा मुद्दा बनाते हुए कहा है कि मानसून सत्र जैसे महत्वपूर्ण समय में जब राज्य बाढ़, विकास और कानून-व्यवस्था जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा करने वाला है, तब विपक्ष का चेहरा ही नदारद है। एनडीए प्रवक्ताओं का कहना है कि तेजस्वी यादव अपनी राजनीतिक जिम्मेदारियों को छोड़कर विदेश यात्रा पर हैं या निजी व्यस्तताओं में हैं, जो साफ तौर पर बिहार की जनता की अनदेखी को दर्शाता है। बीजेपी का दावा है कि विपक्ष के पास सदन में चर्चा के लिए कोई ठोस मुद्दा नहीं है, इसलिए वे सत्र के माहौल को भांपकर ही भागने की कोशिश कर रहे हैं।

आरजेडी का पलटवार, कहा- 'राजनीति चमकाने का काम न करें'

दूसरी ओर, आरजेडी के नेताओं ने इन दावों को पूरी तरह से सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि तेजस्वी यादव की पूर्व निर्धारित व्यस्तताएं हैं और वे सत्र के दौरान सदन में पूरी मजबूती के साथ मौजूद रहेंगे। आरजेडी का आरोप है कि सरकार अपने नाकामियों को छिपाने के लिए विपक्ष पर बेबुनियाद सवाल उठा रही है ताकि ध्यान भटकाया जा सके। पार्टी ने पलटवार करते हुए कहा कि सरकार को इस बात की चिंता करनी चाहिए कि कैसे वह इस बार बाढ़ पीड़ितों के लिए काम करेगी, न कि इस बात पर कि विपक्ष का नेता कब और कहां है।

मानसून सत्र में क्या होगा बड़ा धमाका?

20 जुलाई से शुरू होने वाला यह मानसून सत्र बिहार के लिए काफी अहम माना जा रहा है। इसमें बिहार की वर्तमान आर्थिक स्थिति, शिक्षा विभाग के नए नियम, और हालिया अपराध की घटनाओं को लेकर सदन में हंगामे के पूरे आसार हैं। जानकार मान रहे हैं कि तेजस्वी यादव की वापसी के साथ ही विपक्ष सरकार को घेरने की कोई बड़ी रणनीति तैयार कर चुका है। एनडीए और आरजेडी दोनों के बीच जारी इस वार-पलटवार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस बार बिहार विधानसभा का सत्र हंगामेदार और चुनौतीपूर्ण होने वाला है, जिसमें आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति की आग और भड़क सकती है।