
देशभर में मौसम के दो अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। एक तरफ जहां दक्षिण-पश्चिम मानसून बिहार और महाराष्ट्र में पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और कई इलाकों में भारी बारिश हो रही है, वहीं उत्तर भारत और दिल्ली-NCR के लोग उमस भरी गर्मी के बीच इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि मानसून उनके यहां कब दस्तक देगा। इस बीच, अल नीनो (El Nino) के बढ़ते प्रभाव ने सरकार और किसानों की चिंता बढ़ा दी है। देश के करीब 315 जिलों में इस साल सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान है, जिससे खरीफ की फसलों को बचाने के लिए केंद्र सरकार ने एक विशेष मॉनिटरिंग सेल का गठन किया है।
बिहार में मानसून की मजबूती और उत्तर भारत का इंतजार
दक्षिण-पश्चिम मानसून अब बिहार में पूरी तरह से पैर पसार चुका है, जिसके चलते राज्य के अधिकांश हिस्सों में झमाझम बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, मानसून ने 11 जून को बिहार के कुछ हिस्सों में प्रवेश किया था और 12 जून तक इसने पूरे राज्य को कवर कर लिया। पूर्वी भारत में मानसून की इस सक्रियता को देखते हुए मौसम विभाग ने आज भी बिहार के कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। बिहार में हो रही इस अच्छी बरसात के बीच अब दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के लाखों लोगों के मन में यही सवाल है कि उनके यहां मानसून कब पहुंचेगा।
देश के कई राज्यों में मानसून की तेज रफ्तार
पिछले कुछ दिनों के भीतर मानसून ने देश के कई अन्य हिस्सों में तेजी से प्रगति की है। मौसम प्रणाली के मजबूत होने से मानसून महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड और बिहार के बचे हुए इलाकों में आगे बढ़ गया है। यही वेदर सिस्टम अब वित्तीय राजधानी मुंबई तक भी पहुंच चुका है। मौसम विभाग ने पश्चिमी तट के साथ-साथ पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत के राज्यों में भारी बारिश का अनुमान जताया है। इसके साथ ही कोंकण, गोवा, तटीय कर्नाटक, असम, मेघालय, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में बहुत भारी बारिश की आशंका व्यक्त की गई है।
दिल्ली-NCR में कब होगी मानसून की एंट्री?
दिल्ली-NCR में चिलचिलाती गर्मी और उमस से परेशान लोगों के लिए राहत की खबर यह है कि मौसम विभाग के मुताबिक राजधानी में 27 जून तक मानसून के पहुंचने की उम्मीद है। आमतौर पर भी दिल्ली में मानसून के दस्तक देने की आधिकारिक तारीख 27 जून ही मानी जाती है। हालांकि, इस साल जून के बीच में मानसून की रफ्तार करीब दो सप्ताह के लिए धीमी पड़ गई थी, जिसके कारण कुछ मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि दिल्ली में मानसून की एंट्री जुलाई के पहले सप्ताह तक खिंच सकती है। इसके बावजूद, आधिकारिक तौर पर मौसम विभाग ने अभी तक अपनी तय तारीख में कोई बदलाव नहीं किया है।
मुंबई में रातभर भारी आफत, पालघर में रेड अलर्ट जारी
महाराष्ट्र की बात करें तो मुंबई और उसके आस-पास के इलाकों में रातभर से मूसलाधार बारिश का सिलसिला जारी है। लगातार हो रही भारी बरसात को देखते हुए भारतीय मौसम विभाग ने मुंबई शहर, उपनगरों और पालघर जिले के लिए 'रेड अलर्ट' जारी कर दिया है। इसके अलावा ठाणे जिले के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' और रायगढ़, रत्नागिरी तथा सिंधुदुर्ग जिलों के लिए 'येलो अलर्ट' जारी किया गया है। तटीय इलाकों में 41 से 61 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और गरज-चमक के साथ बारिश होने की आशंका है। मुंबई से सटे कल्याण, डोंबिवली, कर्जत और नेरल जैसे इलाकों में भी रात से ही भारी बारिश हो रही है।
निचले इलाकों में जलभराव, दादर में गिरा पेड़
मुंबई के निचले इलाकों जैसे दादर और माटुंगा में देर रात 12 बजे से सुबह 6 बजे के बीच हुई भारी बारिश के कारण कई जगहों पर जलभराव (Water Logging) की स्थिति पैदा हो गई है, जिससे सुबह दफ्तर जाने वाले लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। दादर इलाके में भारी बारिश के चलते एक बड़ा पेड़ जड़ से उखड़कर सड़क पर गिर गया। हालांकि, राहत की बात यह रही कि जिस समय यह पेड़ गिरा, वहां कोई मौजूद नहीं था, जिससे किसी भी तरह के जान-माल का नुकसान होने से बच गया। नगर निगम की टीमें सड़कों से पानी निकालने और यातायात बहाल करने में जुटी हैं।
315 जिलों पर अल नीनो का साया, केंद्र सरकार अलर्ट
एक तरफ जहां कुछ इलाकों में भारी बारिश आफत बनी हुई है, वहीं दूसरी तरफ अल नीनो के प्रभाव के कारण देश के एक बड़े हिस्से में सूखे जैसी स्थिति का खतरा मंडरा रहा है। कृषि मंत्रालय के अनुसार, इस सीजन में देश के लगभग 315 जिलों में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है। इन जिलों में से 111 जिलों को 'हाई-प्रायोरिटी' यानी उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में रखा गया है, क्योंकि ये इलाके पूरी तरह से वर्षा आधारित खेती पर निर्भर हैं और यहां सिंचाई की सुविधाएं बेहद सीमित हैं। अल नीनो का सबसे ज्यादा असर मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश समेत कुल 12 राज्यों पर पड़ने की उम्मीद है।
कृषि मंत्री की हाई-लेवल बैठक, जमीन पर एक्शन के निर्देश
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कृषि मंत्रालय ने एक विशेष 'अल नीनो मॉनिटरिंग सेल' और 'क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप' का गठन किया है, जो देश के मौसम और फसलों की स्थिति पर चौबीसों घंटे नजर रखेंगे। कृषि मंत्री खुद इस बदलती स्थिति का आकलन करने के लिए नियमित रूप से उच्च स्तरीय समीक्षा बैठकें कर रहे हैं। हाल ही में हुई एक समीक्षा बैठक में कृषि मंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि तैयारियों को केवल कागजी प्लानिंग तक सीमित न रखकर जमीन पर समय पर लागू किया जाए। उन्होंने राज्यों से जिला स्तर की तैयारियों की लगातार समीक्षा करने और स्थानीय परिस्थितियों के हिसाब से रणनीति बनाने को कहा है।
किसानों और पशुओं की सुरक्षा के लिए मुख्य सपोर्ट सिस्टम
इस हाई-लेवल मीटिंग में लंबे समय तक सूखा या कम बारिश की स्थिति बनने पर किसानों और पशुधनों को सुरक्षित रखने के उपायों पर भी विस्तृत चर्चा की गई। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि संकट की स्थिति में किसानों के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY), किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और PM-किसान सम्मान निधि जैसी योजनाएं मुख्य सुरक्षा कवच का काम करेंगी। राज्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जरूरत पड़ने पर किसानों तक समय पर ऋण, राहत सामग्री और अन्य जरूरी मदद पहुंचाएं। इसके साथ ही, चारे की संभावित कमी से निपटने के लिए पशुपालकों को चारे का रिजर्व स्टॉक बनाने और सप्लाई चेन को मजबूत करने की सलाह दी गई है। मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में अभी बड़े पैमाने पर खरीफ की बुआई शुरू नहीं हो पाई है, जिससे आने वाले दिनों में बारिश यहां के किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाएगी।
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