
बिहार के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र और स्मार्ट सिटी मुजफ्फरपुर के निवासियों के लिए एक बेहद शानदार और बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है। राज्य सरकार ने मुजफ्फरपुर के चौमुखी विकास, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और स्थानीय समस्याओं से निजात दिलाने के लिए 288 करोड़ रुपये के मेगा बजट की एक बड़ी सौगात दी है। विकास योजनाओं की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने इस भारी-भरकम राशि के प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दिखाई है। हालांकि, इस बड़ी सौगात के साथ ही मुख्यमंत्री का बेहद कड़ा और सख्त तेवर भी देखने को मिला। योजनाओं की सुस्त रफ्तार और लेती-लतीफी पर भारी नाराजगी जताते हुए सीएम ने जिले के आला अधिकारियों को दो टूक लहजे में सिर्फ 30 दिनों का अल्टीमेटम दे दिया है, जिससे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। जानिए किन योजनाओं पर खर्च होंगे 288 करोड़ रुपये और कैसे चमकेगा पूरा मुजफ्फरपुर मुख्यमंत्री द्वारा स्वीकृत किए गए इस 288 करोड़ रुपये के बड़े बजट से मुजफ्फरपुर शहर और उसके आस-पास के इलाकों की सूरत पूरी तरह बदलने वाली है। इस राशि का एक बड़ा हिस्सा जलजमाव (Waterlogging) की गंभीर समस्या से मुक्ति दिलाने के लिए आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम के निर्माण, स्मार्ट सड़कों के चौड़ीकरण और फ्लाईओवर प्रोजेक्ट्स पर खर्च किया जाएगा। इसके साथ ही, शहर के सौंदर्यीकरण, पार्क निर्माण, बेहतर स्ट्रीट लाइटिंग और कचरा प्रबंधन (Waste Management) को लेकर भी कई महत्वपूर्ण उप-योजनाएं तैयार की गई हैं। इस बजट के धरातल पर उतरने के बाद मुजफ्फरपुर के लोगों को न सिर्फ जाम और जलजमाव से हमेशा के लिए राहत मिलेगी, बल्कि व्यापारिक गतिविधियों को भी एक नई रफ्तार मिलेगी। सीएम की हाई-लेवल मीटिंग में मची खलबली, अधिकारियों को दी सीधी चेतावनी- काम करो या कुर्सी छोड़ो विकास कार्यों की समीक्षा के लिए बुलाई गई इस हाई-लेवल मीटिंग में मुख्यमंत्री ने मुजफ्फरपुर के डीएम, कमिश्नर और नगर निगम के अधिकारियों की क्लास लगा दी। सूत्रों के मुताबिक, सीएम इस बात से बेहद खफा थे कि पूर्व में स्वीकृत कई योजनाएं फाइलों में ही दबी रह गईं और जनता परेशान होती रही। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनता के पैसे का सही समय पर इस्तेमाल होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि काम में किसी भी स्तर की लापरवाही या भ्रष्टाचार अब कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सीएम ने कहा कि यदि तय समय पर परिणाम नहीं दिखे, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ न केवल सस्पेंशन बल्कि विभागीय स्तर पर बड़ी दंडात्मक कार्रवाई भी की जाएगी। 30 दिन के भीतर दिखाना होगा जमीनी बदलाव, शुरू हुआ उल्टी गिनती का दौर मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए 30 दिनों के इस कड़े अल्टीमेटम के बाद अब मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गया है। इस डेडलाइन के तहत अधिकारियों को अगले एक महीने के भीतर सभी लंबित टेंडर प्रक्रियाओं को पूरा करना होगा, निर्माण कार्यों को जमीन पर शुरू करना होगा और किए गए कार्यों की प्रगति रिपोर्ट सीधे मुख्यमंत्री सचिवालय को सौंपनी होगी। जानकारों का मानना है कि सीएम के इस बेहद सख्त रुख के बाद मुजफ्फरपुर में ठप पड़े विकास कार्यों में जबरदस्त तेजी आएगी। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री के इस हंटर का असर कितनी जल्दी मुजफ्फरपुर की सड़कों और नालों की जमीनी हकीकत पर दिखाई देता है।
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