
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे भीषण युद्ध के मैदान से एक बेहद विचलित करने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है। ब्लैक सी यानी काले सागर के बेहद अशांत और खतरनाक वॉर जोन में एक मालवाहक जहाज फंसा हुआ है, जिसे अब 'मौत का जहाज' कहा जा रहा है। इस जहाज पर 13 भारतीय क्रू मेंबर (नाविक) सवार हैं, जिनकी जान इस वक्त बेहद गंभीर खतरे में है। युद्ध क्षेत्र के बिल्कुल बीचों-बीच फंसे होने के कारण इस जहाज के ऊपर से लगातार आत्मघाती ड्रोन और खतरनाक मिसाइलें गुजर रही हैं। स्थिति इतनी भयावह है कि इन भारतीय नागरिकों के लिए मौत हर सेकंड महज कुछ इंच की दूरी पर खड़ी नजर आ रही है।
युद्ध के सबसे खतरनाक हॉटस्पॉट में फंसा कमर्शियल वेसल
यह पूरा मामला काले सागर के उस समुद्री हिस्से का है जहां रूस और यूक्रेन दोनों एक-दूसरे के ठिकानों पर लगातार हवाई और समुद्री हमले कर रहे हैं। फंसे हुए भारतीय क्रू मेंबर्स ने बेहद डरावने वीडियो और संदेश भेजकर अपनी आपबीती सुनाई है। उनके मुताबिक, जहाज के आसपास के पानी में लगातार धमाके हो रहे हैं और रात के समय आसमान मिसाइलों की रोशनी से दहल उठता है। दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे पर हमले करने के लिए जिस रूट का इस्तेमाल कर रही हैं, यह बदकिस्मत जहाज ठीक उसी के नीचे फंसा हुआ है, जिससे किसी भी वक्त इस पर सीधे हमले की आशंका बनी हुई है।
राशन और पीने के पानी की भारी किल्लत
जहाज पर फंसे इन 13 भारतीयों की मुश्किलें सिर्फ आसमान से बरसती मौत तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि जहाज के भीतर के हालात भी बद से बदतर हो चुके हैं। पिछले कई दिनों से युद्ध क्षेत्र में फंसे होने के कारण जहाज पर मौजूद खाने-पीने का राशन लगभग खत्म होने की कगार पर है। पीने के साफ पानी की भारी किल्लत हो गई है और बिजली सप्लाई भी रुक-रुक कर आ रही है। मानसिक तनाव और मौत के साए में जीने के कारण कई क्रू मेंबर्स की तबीयत भी बिगड़ने लगी है, लेकिन इस हाई-रिस्क वॉर ज़ोन में किसी भी तरह की मेडिकल मदद का पहुंचना फिलहाल नामुमकिन बना हुआ है।
भारत सरकार और डिप्लोमैटिक चैनल्स हुए एक्टिव
इस बेहद संवेदनशील और गंभीर मामले की जानकारी मिलते ही नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय (MEA) पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। भारतीय राजनयिक लगातार रूस और यूक्रेन दोनों देशों के दूतावासों और स्थानीय अधिकारियों से संपर्क साध रहे हैं ताकि एक सुरक्षित समुद्री कॉरिडोर (Safe Maritime Corridor) बनाकर इन 13 निर्दोष भारतीयों को वहां से सकुशल निकाला जा सके। हालांकि, युद्ध क्षेत्र में लगातार जारी बमबारी और माइनफील्ड्स (समुद्री बारूदी सुरंगों) की मौजूदगी के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।
परिजनों की बढ़ी धड़कनें, वतन वापसी के लिए लगाई गुहार
इधर भारत में फंसे हुए क्रू मेंबर्स के परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। मुंबई, केरल और तमिलनाडु समेत देश के विभिन्न हिस्सों के रहने वाले इन नाविकों के परिजनों ने भारत सरकार और प्रधानमंत्री कार्यालय से हाथ जोड़कर भावुक अपील की है कि उनके बच्चों को जल्द से जल्द सुरक्षित वापस लाया जाए। सोशल मीडिया पर भी इन नाविकों को बचाने के लिए मुहिम तेज हो गई है। सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि जब तक दोनों देशों की तरफ से सीजफायर या किसी विशेष रेस्क्यू विंडो की मंजूरी नहीं मिलती, तब तक इन भारतीयों के लिए हर एक पल भारी रहने वाला है।
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