
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और समूचे दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र (नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद) में मानसून का उग्र रूप लगातार देखने को मिल रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दिल्ली के सभी जिलों के लिए आंधी-तूफान, बिजली कड़कने और तेज हवाओं के साथ मध्यम से भारी बारिश का 'येलो अलर्ट' (Yellow Alert) जारी रखा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, शनिवार को दिन भर आसमान में घने काले बादल छाए रहेंगे और सुबह से लेकर देर रात तक अलग-अलग इलाकों में रुक-रुक कर मूसलाधार बारिश के दौर आते रहेंगे। इस दौरान तटीय और मैदानी हवाओं की गति 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।
बारिश और बादलों के इस पहरे के कारण दिल्ली का अधिकतम तापमान सामान्य से काफी नीचे गिरकर 31 से 33 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया जा रहा है, जबकि न्यूनतम तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। हालांकि इस मौसम से दिल्लीवासियों को महीनों से सता रही भीषण गर्मी और चिपचिपी उमस से बड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने राजधानी की अवसंरचना और जल निकासी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुरुग्राम के निचले इलाकों में भी बादलों का जमावड़ा बना हुआ है, जिससे स्थानीय प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
जलभराव और थमी रफ्तार: दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे से लेकर मिंटो ब्रिज तक विकराल स्थिति
लगातार हो रही मानसूनी बारिश का सबसे बड़ा और प्रत्यक्ष प्रभाव दिल्ली-एनसीआर के यातायात नेटवर्क पर देखने को मिल रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग-48 (NH-48) यानी दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे पर नरसिंहपुर, इफको चौक, रजोकरी और धौला कुआं के पास सड़कों पर दो से तीन फीट तक पानी भर जाने के कारण सुबह से ही वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं। धौला कुआं फ्लाई-ओवर से लेकर एयरपोर्ट रोड और एम्स (AIIMS) अंडरपास तक वाहन रेंग-रेंग कर चल रहे हैं। इसके अलावा, आईटीओ (ITO), मिंटो ब्रिज, तिलक ब्रिज, रोहतक रोड, मुंडका, नांगलोई, पालम, जनकपुरी और आयानगर के इलाकों में भारी जलभराव दर्ज किया गया है।
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और स्थानीय जिला प्रशासन ने नागरिकों के लिए आपातकालीन यात्रा एडवाइजरी जारी की है। ट्रैफिक पुलिस ने वाहन चालकों से अपील की है कि वे किसी भी महत्वपूर्ण कार्य पर निकलने से पहले आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल या लाइव नेविगेशन मैप्स के जरिए ट्रैफिक जाम और जलमग्न सड़कों का अपडेट अवश्य जांच लें। लोक निर्माण विभाग (PWD) और दिल्ली नगर निगम (MCD) की विशेष आपदा प्रतिक्रिया टीमों को संवेदनशील अंडरपासों पर भारी क्षमता वाले वॉटर-पंप सेटों के साथ तैनात किया गया है ताकि जमे हुए पानी की जल्द से जल्द निकासी की जा सके।
विमानन सेवाओं पर बुरा असर: इंडिगो, स्पाइसजेट और एयर इंडिया ने जारी की पैसेंजर एडवाइजरी
दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGIA) पर भी मौसम की इस मार का सीधा असर देखने को मिल रहा है। रनवे पर कम दृश्यता (Visibility) और आसमान में बादलों के घने जमावड़े के कारण कई उड़ानों के परिचालन में देरी दर्ज की गई है। देश की प्रमुख एयरलाइंस इंडिगो (IndiGo), स्पाइसजेट (SpiceJet), एयर इंडिया (Air India) और अकासा एयर (Akasa Air) ने अपने यात्रियों के लिए विशेष ट्रेवल एडवाइजरी जारी की है।
एयरलाइंस ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी है कि दिल्ली में खराब मौसम और मुख्य राजमार्गों पर धीमी गति से चल रहे ट्रैफिक के कारण एयरपोर्ट पहुंचने में अतिरिक्त समय लग सकता है। इसलिए यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे अपने निर्धारित बोर्डिंग समय से काफी पहले घर से निकलें और अपनी फ्लाइट का लाइव स्टेटस ऑनलाइन चेक करने के बाद ही एयरपोर्ट का रुख करें। हवाई अड्डे के आसपास के एप्रोच रोड्स पर भी जलभराव के कारण कैब सेवाओं का वेटिंग टाइम और किराया सामान्य से काफी अधिक बढ़ गया है।
मानसून ट्रफ की वापसी: आखिर क्यों राजधानी पर इतने मेहरबान हैं मानसूनी बादल?
मौसम विज्ञानियों के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में बारिश का यह उग्र और व्यापक दौर अचानक शुरू नहीं हुआ है। मध्य और पश्चिमी भारत पर बने कम दबाव के क्षेत्र के बाद अब 'मॉनसून ट्रफ' (Monsoon Trough) अपनी सामान्य स्थिति से उत्तर दिशा की ओर खिसककर इंडो-गंगा के मैदानी इलाकों यानी सीधे दिल्ली और हिमालय के तलहटी वाले क्षेत्रों के ऊपर से गुजर रही है। इसके साथ ही अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों दिशाओं से आ रही नम हवाओं का दुर्लभ मेल दिल्ली-एनसीआर के वायुमंडल में हो रहा है।
इसी सिनॉप्टिक मौसमी प्रणाली के कारण राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र पर लगातार घने गरज-चमक वाले बादलों (Cumulonimbus Clouds) का निर्माण हो रहा है। आईएमडी के दीर्घकालिक मॉडलों के अनुसार, मानसून की यह सक्रिय ट्रफ लाइन अगले दो से तीन दिनों तक उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में ही टिकी रहेगी। इसके परिणामस्वरूप, दिल्ली-एनसीआर में 10 अगस्त तक आमतौर पर बादल छाए रहेंगे और हल्की से मध्यम वर्षा का यह सिलसिला इसी तरह रुक-रुक कर जारी रहने का अनुमान जताया गया है।
वायु गुणवत्ता (AQI) में बड़ा सुधार और मौसम विभाग की सार्वजनिक सुरक्षा गाइडलाइंस
मूसलाधार बारिश का एक बेहद सकारात्मक पहलू यह रहा है कि दिल्ली की दूषित हवा पूरी तरह से साफ हो गई है। लगातार हो रही बारिश की वजह से हवा में मौजूद धूलकण और हानिकारक पीएम-10 व पीएम-2.5 प्रदूषक धुलकर नीचे बैठ गए हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली का औसतन वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 80 के आसपास दर्ज किया गया है, जो 'संतोषजनक' (Satisfactory) श्रेणी में आता है। लंबे समय बाद राजधानी के नागरिकों को इतने लंबे समय तक स्वच्छ और शुद्ध हवा में सांस लेने का अवसर मिला है।
खराब मौसम और तेज आंधी-तूफान की आशंका को देखते हुए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने सार्वजनिक सुरक्षा के लिए निम्नलिखित गाइडलाइंस जारी की हैं:
-
जलभराव वाले इलाकों से दूर रहें: वाहन चालक जलमग्न अंडरपास, ढलान वाले रास्तों या उफनते नालों के पास गाड़ियां ले जाने का जोखिम न उठाएं।
-
बिजली के बुनियादी ढांचे से दूरी: तेज बारिश और कड़कती बिजली के दौरान पुराने लोहे के खंभों, ट्रांसफार्मर, जर्जर इमारतों और बड़े पेड़ों के नीचे शरण न लें।
-
वर्क फ्रॉम होम को प्राथमिकता: कॉरपोरेट कंपनियों और निजी प्रतिष्ठानों को सलाह दी गई है कि वे अनावश्यक ट्रैफिक को रोकने के लिए कर्मचारियों को घर से काम करने (Work From Work) की सुविधा प्रदान करें।
-
यात्रा की पूर्व तैयारी: दैनिक यात्रियों और पर्यटकों को अपने गंतव्य पर निकलने से पहले आधिकारिक वेदर अपडेट्स और रूट डाइवर्जन एडवाइजरी जरूर देखनी चाहिए।
उत्तर प्रदेश के पश्चिमी जिलों और हरियाणा के तटीय इलाकों में भी इसी मानसूनी प्रणाली के चलते अगले 48 घंटों में भारी वर्षा होने की पूरी संभावना है। दिल्ली-एनसीआर का स्थानीय प्रशासन और आपदा राहत दल स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं ताकि जलभराव और किसी भी अप्रिय घटना से तुरंत निपटा जा सके।
UK News