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यूजीसी के नए नियमों पर SC के स्टे के बाद RJD का बड़ा बयान, मृत्युंजय तिवारी बोले -यह दलित-पिछड़ा विरोधी सरकार की हार है

News India Live, Digital Desk : यूजीसी के नए इक्विटी रेगुलेशन 2026 (UGC Equity Regulations 2026) को लेकर देशव्यापी बवाल के बीच सुप्रीम कोर्ट ने इस पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। कोर्ट के इस फैसले के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। आरजेडी के कद्दावर प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने इसे ‘संवैधानिक मूल्यों की जीत’ और केंद्र सरकार की ‘विभाजनकारी नीतियों’ की हार करार दिया है।सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? (The Stay Order)चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने गुरुवार (29 जनवरी 2026) को सुनवाई करते हुए कहा:अस्पष्ट भाषा: कोर्ट ने माना कि 2026 के नियमों में ‘भेदभाव’ (Discrimination) की परिभाषा बहुत अस्पष्ट है और इसका दुरुपयोग हो सकता है।विभाजन का डर: कोर्ट ने टिप्पणी की कि शिक्षण संस्थानों को देश की एकता का प्रतीक होना चाहिए, न कि समाज को बांटने का माध्यम।अंतरिम आदेश: अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 को होगी। तब तक 2012 के पुराने नियम ही लागू रहेंगे।मृत्युंजय तिवारी (RJD प्रवक्ता) का कड़ा प्रहारसुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आरजेडी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने मीडिया से बातचीत में निम्नलिखित प्रमुख बातें कहीं:सामाजिक न्याय की जीत: तिवारी ने कहा, “हम शुरू से कह रहे थे कि यह बिल दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के हक को मारने की साजिश है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगाकर सरकार की काली करतूतों को उजागर कर दिया है।”भेदभाव का आरोप: उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ऐसे नियम ला रही थी जिससे कैंपस में छात्रों के बीच खाई पैदा हो। आरजेडी सामाजिक न्याय की लड़ाई सड़क से लेकर कोर्ट तक लड़ती रहेगी।सरकार से इस्तीफे की मांग: आरजेडी प्रवक्ता ने कहा कि शिक्षा जैसे पवित्र क्षेत्र में इस तरह का ‘अस्पष्ट और दोषपूर्ण’ कानून लाने के लिए सरकार को माफी मांगनी चाहिए।यूजीसी बिल 2026: विवाद के 3 मुख्य कारणविवादित बिंदुविरोध का कारणजाति आधारित परिभाषायाचिकाकर्ताओं का दावा है कि यह केवल एक वर्ग को ध्यान में रखकर बनाया गया है।सामान्य वर्ग की अनदेखीआरोप है कि इसमें सामान्य वर्ग के छात्रों के अधिकारों की रक्षा के प्रावधान नहीं हैं।धारा 3C (Section 3C)इसकी शब्दावली को लेकर सबसे ज्यादा विवाद है, जिसे कोर्ट ने भी ‘अस्पष्ट’ माना है।अमर उजाला विशेष: शिवानंद तिवारी का अलग सुर?दिलचस्प बात यह है कि जहाँ आरजेडी के आधिकारिक प्रवक्ता विरोध कर रहे हैं, वहीं पूर्व आरजेडी नेता शिवानंद तिवारी ने कुछ दिन पहले इन नियमों का बचाव किया था। उन्होंने कहा था कि सवर्ण समाज को इसे बिना पढ़े विरोध नहीं करना चाहिए। हालांकि, आधिकारिक तौर पर तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाली आरजेडी ने सुप्रीम कोर्ट के स्टे का स्वागत किया है।आगे क्या होगा?सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अब 19 मार्च को तय होगा कि इन नियमों में संशोधन किया जाएगा या इन्हें पूरी तरह रद्द कर दिया जाएगा। तब तक देश भर के विश्वविद्यालयों में 2012 के पुराने दिशा-निर्देश ही प्रभावी रहेंगे।