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रविंद्र कुमार के खिलाफ रची गई साजिश: केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के फर्जी लेटर पैड और जाली हस्ताक्षर का पर्दाफाश

बिहार के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में उस वक्त भारी हड़कंप मच गया जब देशरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड, यानी लोकप्रिय बरौनी डेयरी के प्रबंधन को निशाना बनाकर एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज मामला सामने आया। डेयरी के प्रबंध निदेशक (MD) रविंद्र कुमार के खिलाफ एक शिकायत पत्र सीधे राज्य के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग को भेजा गया था, जिसमें दावा किया गया था कि यह पत्र किसी और का नहीं बल्कि कद्दावर केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह का है। इस पत्र के सामने आते ही हड़कंप मच गया क्योंकि इसमें प्रबंधन पर तमाम तरह के वित्तीय और प्रशासनिक आरोप मढ़े गए थे। लेकिन जब इस मामले की तह तक जाकर प्रशासनिक स्तर पर छानबीन की गई, तो जो सच सामने आया उसने सबको चौंका दिया। यह पत्र पूरी तरह से फर्जी और जाली निकला, जिसे किसी शातिर दिमाग ने बरौनी डेयरी की छवि को धूमिल करने और वहां की व्यवस्था में खलल डालने के नापाक इरादे से तैयार किया था। इस हाई-प्रोफाइल साजिश के खुलासे के बाद अब प्रशासनिक महकमे में यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर इस जालसाजी के पीछे असली चेहरे कौन हैं और इसके क्या निहितार्थ हैं।

इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में मौजूद रविंद्र कुमार वर्तमान में देशरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड यानी बरौनी डेयरी के प्रबंध निदेशक (MD) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनकी नियुक्ति और कार्यभार संभालने का सफर भी काफी महत्वपूर्ण रहा है। इससे पहले इस पद पर रविंद्र प्रसाद तैनात थे, लेकिन इसी साल जनवरी 2026 में वित्तीय अनियमितताओं और कुछ गंभीर घोटालों के आरोप सामने आने के बाद उन्हें उनके पद से हटा दिया गया था। उनके हटने के बाद रविंद्र कुमार को बरौनी डेयरी के एमडी पद की जिम्मेदारी सौंपी गई और वे पिछले करीब 9 महीनों से इस पद पर पूरी निष्ठा के साथ कार्यरत हैं। उनके कार्यभार संभालने के बाद से ही डेयरी के कामकाज में सुधार और पारदर्शिता लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। संस्थान को सुचारू रूप से चलाने और दूध उत्पादक किसानों के हितों की रक्षा करने के लिए वे लगातार कड़े कदम उठा रहे हैं, यही वजह है कि उनकी बढ़ती सक्रियता और पारदर्शिता से कुछ असामाजिक तथा स्वार्थी तत्व असहज महसूस करने लगे थे, जिनके द्वारा इस तरह की गंदी और ओछी साजिशों का ताना-बाना बुना गया।

साजिशकर्ताओं ने अपनी चाल को पुख्ता और असरदार बनाने के लिए देश के कद्दावर केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के नाम और उनके आधिकारिक लेटर पैड का दुरुपयोग करने की हिमाकत की। इस जाली पत्र में केंद्रीय मंत्री के नाम पर हस्ताक्षर को भी हूबहू कॉपी करने की कोशिश की गई थी और इसे बिहार सरकार के संबंधित विभाग के मंत्री व सचिव को संबोधित किया गया था। पत्र की विषयवस्तु में बरौनी डेयरी के वर्तमान प्रबंधन और एमडी रविंद्र कुमार के खिलाफ कई तरह के मनगढ़ंत और भ्रामक आरोप लगाए गए थे ताकि विभाग तुरंत हरकत में आए और डेयरी प्रबंधन के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई की जाए। पत्र की शैली ऐसी थी कि एक बार देखने पर किसी को भी यह असली लग सकता था, लेकिन जब इसकी सत्यता की जांच करने के लिए आधिकारिक चैनलों का उपयोग किया गया, तो पूरी कलई खुलकर सामने आ गई। राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इस बात की कड़ी निंदा की जा रही है कि कैसे किसी ने अपनी निजी रंजिश या स्वार्थ के लिए एक केंद्रीय मंत्री के पद और प्रतिष्ठा का दुरुपयोग करने से भी गुरेज नहीं किया।

जब यह पूरा मामला केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के संज्ञान में आया, तो उन्होंने इस पर तीव्र नाराजगी व्यक्त करते हुए तुरंत स्थिति को स्पष्ट किया। ललन सिंह ने न केवल इस पत्र को सिरे से खारिज किया, बल्कि यह दो टूक कहा कि उन्होंने ऐसा कोई भी पत्र या शिकायती नोट कभी जारी ही नहीं किया है और इसमें उनके जो हस्ताक्षर दिखाए जा रहे हैं वे पूरी तरह से जाली हैं। केंद्रीय मंत्री ने अपनी ओर से स्पष्टीकरण देते हुए डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के सचिव को खुद इस बात की जानकारी दी और निर्देश दिया कि इस तरह की जालसाजी करने वालों को बख्शा नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि फर्जी पत्रों और जाली लेटर पैड के जरिए वरिष्ठ अधिकारियों और मंत्रियों के नाम का गलत इस्तेमाल करके प्रशासनिक व्यवस्था को भ्रमित करने की यह एक खतरनाक साजिश है। ललन सिंह के इस स्पष्ट निर्देश के बाद विभाग के सचिव शीर्षत कपिल अशोक ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल प्रभाव से अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने और सख्त कानूनी कार्रवाई करने का आदेश जारी कर दिया।

केंद्रीय मंत्री के स्तर से पत्र के फर्जी होने की पुष्टि होने के बाद बरौनी डेयरी प्रबंधन ने भी चैन की सांस ली है और इस पूरी घटना के खिलाफ कानूनी रूप से आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। एमडी रविंद्र कुमार ने मीडिया और प्रशासन के सामने आकर स्पष्ट रूप से कहा कि पत्र में लगाए गए तमाम आरोप पूरी तरह से निराधार, मनगढ़ंत और झूठे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि बरौनी डेयरी का प्रत्येक कार्य और वित्तीय गतिविधि पूरी पारदर्शिता, नियमों के दायरे और संस्था के व्यापक हितों को ध्यान में रखकर ही संचालित की जा रही है। एमडी ने कहा कि यह साजिश सिर्फ उनकी व्यक्तिगत छवि को धूमिल करने के लिए नहीं रची गई थी, बल्कि इसके पीछे बरौनी डेयरी जैसी प्रतिष्ठित सहकारी संस्था के कामकाज को बाधित करने की मंशा थी। फिलहाल, पुलिस और साइबर सेल की टीमें इस बात की गहन जांच-पड़ताल में जुटी हुई हैं कि आखिर वह कौन सा शख्स या गिरोह था जिसने केंद्रीय मंत्री का फर्जी लेटर पैड तैयार किया, जाली हस्ताक्षर किए और इसे सुनियोजित तरीके से सरकारी विभाग तक पहुंचाया। इस उच्चस्तरीय जांच के बाद जल्द ही उन चेहरों से नकाब उठने की उम्मीद है जो इस गंदे खेल के पीछे पर्दे के पीछे छिपे बैठे हैं।