
देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित संसद भवन के उच्च सदन यानी राज्यसभा में बुधवार को उस समय भारी हंगामा देखने को मिला जब पहनावे को लेकर की गई एक टिप्पणी पर विवाद खड़ा हो गया। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी CPI(M) के सांसद जॉन ब्रिटास और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सांसद सुष्मिता देव के बीच 'लुंगीवाला' टिप्पणी को लेकर तीखी बहस छिड़ गई। इस विवाद ने तूल तब पकड़ा जब सीपीएम नेता जॉन ब्रिटास ने बीजेपी सांसद के खिलाफ विशेषाधिकार हनन (Breach of Privilege) का औपचारिक नोटिस दर्ज करा दिया।
क्या है पूरा मामला और कैसे शुरू हुआ विवाद?
यह पूरा घटनाक्रम उस समय शुरू हुआ जब सीपीएम सांसद जॉन ब्रिटास ने आरोप लगाया कि सोमवार को सदन में जब वे अपने विधायी प्रस्ताव को पेश कर रहे थे, तब सत्ता पक्ष की एक सदस्य ने उनके पहनावे पर आपत्तिजनक टिप्पणी की और उन्हें बार-बार 'लुंगीवाला' कहकर संबोधित किया। इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए जॉन ब्रिटास ने सदन में अपनी बात रखते हुए कहा कि उन्हें एक भारतीय, दक्षिण भारतीय और विशेष रूप से मलयाली होने पर गर्व है। उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी भाषा, संस्कृति, खान-पान और अपने पारंपरिक पहनावे से बेहद प्रेम है।
ब्रिटास ने सदन में नाम लेते हुए आरोप लगाया कि एक सम्मानित सदस्य ने सदन के भीतर उनकी जिम्मेदारी के दौरान उन्हें परेशान किया और उनके परिधान पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि वैचारिक बहस और राजनीतिक मतभेद सदन का हिस्सा हैं, लेकिन किसी सांसद को इस तरह से 'लुंगीवाला' कहकर पुकारना पूरी तरह से अशोभनीय है।
बीजेपी सांसद सुष्मिता देव ने आरोपों को नकारा
दूसरी ओर, बीजेपी सांसद सुष्मिता देव ने जॉन ब्रिटास द्वारा लगाए गए तमाम आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि न तो उन्होंने और न ही सदन के किसी अन्य सदस्य ने किसी भी राज्य या क्षेत्र के पहनावे के खिलाफ कोई भी अपमानजनक टिप्पणी की है। उन्होंने यह भी कहा कि वे इस गलतफहमी को दूर करने के लिए व्यक्तिगत रूप से जॉन ब्रिटास से बात करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इस बीच, सदन में बढ़ते तनाव को देखते हुए नेता सदन जेपी नड्डा ने प्रस्ताव रखा कि दोनों सांसद इस गलतफहमी को दूर करने के लिए उनके कक्ष में बैठकर बातचीत कर सकते हैं।
सभापति सीपी राधाकृष्णन ने दी कड़ी नसीहत
सदन में गरिमा बनाए रखने के लिए सभापति सीपी राधाकृष्णन ने कड़ा रुख अपनाया और सभी माननीय सदस्यों को संयम बरतने की सलाह दी। सभापति ने कहा कि उन्होंने कुछ ऐसी घटनाएं देखी हैं जहां सदस्यों ने सदन में भाषण के दौरान दूसरे सदस्यों पर अभद्र और अशिष्ट टिप्पणियां की हैं। उन्होंने सभी सदस्यों को आगाह किया कि वे ऐसी किसी भी बात से बचें जिससे सह-सदस्यों की भावनाएं आहत हों।
सभापति सीपी राधाकृष्णन ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा कि हमारी भारतीय संस्कृति बेहद अनूठी है जिसमें देश के विभिन्न क्षेत्रों की क्षेत्रीय संस्कृतियां समाहित हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि हमारे सहयोगियों की सांस्कृतिक परंपराओं और क्षेत्रीय पहचान का कभी भी अनादर नहीं किया जाना चाहिए। सभापति ने अंत में यह भी आमंत्रित किया कि यदि किसी भी सदस्य को कोई शिकायत या बात रखनी है, तो वे उनके कक्ष में आकर चर्चा कर सकते हैं।
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