
भारतीय रेलवे में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों और अधिकारियों को विभाग की ओर से कल्याणकारी सुविधाओं के तहत मुफ्त यात्रा के लिए पास (Railway Pass) और रियायती टिकट आदेश (PTO) जारी किए जाते हैं। आम जनता के बीच अक्सर यह आम धारणा रहती है कि रेलवे का कर्मचारी या उसका परिवार देश की किसी भी ट्रेन में, किसी भी डिब्बे में सिर्फ पास दिखाकर पूरी तरह मुफ्त में कहीं भी घूम सकता है। हालांकि, यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। भारतीय रेलवे के सेवा नियमों और बोर्ड की गाइडलाइंस के तहत कर्मचारियों के सफर को लेकर सख्त शर्तें, क्लास की सीमाएं और ट्रेनों की पाबंदियां तय की गई हैं।
1. क्या हर ट्रेन में मान्य होता है रेलवे पास?
रेलवे कर्मचारियों को मिलने वाला प्रिविलेज पास (Privilege Pass) देश की सभी ट्रेनों में लागू नहीं होता:
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सामान्य व सुपरफास्ट मेल/एक्सप्रेस: नियमित एक्सप्रेस, मेल, पैसेंजर और उपनगरीय लोकल ट्रेनों में पास पूरी तरह मान्य होता है।
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प्रीमियम ट्रेनें (राजधानी, शताब्दी, वंदे भारत, दुरंतो, गतिमान): इन ट्रेनों में कर्मचारी पास का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए कोटा और पद/पे-लेवल की सख्त शर्तें होती हैं। हर प्रीमियम ट्रेन में पास धारकों के लिए सीमित सीटें (Pass Quota) ही आरक्षित होती हैं।
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लग्जरी और टूरिस्ट ट्रेनें (पूरी तरह नो-एंट्री): महाराजा एक्सप्रेस, पैलेस ऑन व्हील्स, गोल्डन चैरियट या आईआरसीटीसी द्वारा संचालित विशेष टूरिस्ट और भारत गौरव ट्रेनों में रेलवे पास बिल्कुल मान्य नहीं होता। इन विशेष ट्रेनों में सफर करने के लिए रेलवे कर्मचारियों को भी आम यात्रियों की तरह पूरा टिकट खरीदना पड़ता है।
2. किस डिब्बे (Class) में बैठ सकते हैं? पद और पे-लेवल का गणित
कोई भी कर्मचारी अपनी मर्जी से किसी भी क्लास (जैसे सीधे फर्स्ट एसी या एग्जीक्यूटिव क्लास) में नहीं बैठ सकता। पास की पात्रता कर्मचारी के पे-मैट्रिक्स लेवल और ग्रुप (Group A, B, C, D) से तय होती है:
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ग्रुप 'ए' और उच्च अधिकारी: इन्हें गोल्ड, सिल्वर या ब्रॉन्ज मेटल पास और फर्स्ट क्लास 'ए' पास मिलते हैं, जिसके तहत वे ड्यूटी या प्रिविलेज के दौरान फर्स्ट एसी, सेकंड एसी या वंदे भारत की एग्जीक्यूटिव क्लास (EC) के पात्र होते हैं।
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ग्रुप 'बी' और 'सी' (सुपरवाइजर व मध्यम पे-लेवल): इन्हें फर्स्ट क्लास या सेकंड क्लास 'ए' पास मिलता है, जिससे वे 2nd AC, 3rd AC या वंदे भारत की चेयर कार (CC) में सफर कर सकते हैं।
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ग्रुप 'सी' और 'डी' (शुरुआती वेतन स्तर): सेवा के शुरुआती वर्षों में कर्मचारियों को सेकंड क्लास पास मिलता है, जिससे वे केवल स्लीपर (Sleeper) या सेकंड सीटिंग (2S) में ही यात्रा कर सकते हैं।
यदि कोई कर्मचारी अपनी पात्रता से उच्च श्रेणी (Higher Class) में यात्रा करना चाहता है, तो उसे किराए के अंतर (Fare Difference) का नियमानुसार भुगतान करना पड़ता है।
3. क्या पास से यात्रा असीमित (Unlimited) होती है?
रेलवे कर्मचारियों को पूरे साल असीमित मुफ्त सफर की छूट नहीं होती। बोर्ड के नियमों के अनुसार:
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ग्रुप 'सी' और 'डी' के गैर-राजपत्रित कर्मचारियों को सेवा के पहले 5 वर्षों तक प्रति वर्ष केवल 1 सेट प्रिविलेज पास मिलता है।
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5 वर्ष की नियमित सेवा पूरी होने के बाद उन्हें प्रति वर्ष 3 सेट प्रिविलेज पास दिए जाते हैं।
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राजपत्रित (Gazetted) अधिकारियों को प्रति वर्ष 6 सेट पास तक की पात्रता होती है।
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रिटायरमेंट के बाद भी कर्मचारियों को सेवा अवधि के आधार पर सीमित संख्या में 'पोस्ट रिटायरमेंट कॉम्प्लीमेंट्री पास' (PRCP) की सुविधा दी जाती है।
4. PTO (प्रिविलेज टिकट ऑर्डर) पूरी तरह मुफ्त नहीं होता
पास के अलावा कर्मचारियों को हर साल 4 सेट पीटीओ (PTO) की सुविधा भी मिलती है। पीटीओ कोई मुफ्त पास नहीं होता, बल्कि यह एक रियायती वाउचर होता है। पीटीओ के जरिए टिकट बुक कराने पर कर्मचारी को सामान्य किराए का एक-तिहाई (1/3rd Fare) हिस्सा अपनी जेब से चुकाना होता है।
5. बिना कन्फर्म रिजर्वेशन के कोच में नहीं चढ़ सकते
पहले के समय में पेपर पास दिखाकर सीधे ट्रेन में चढ़ने की जो धारणा थी, वह अब ई-पास (HRMS पोर्टल) व्यवस्था के बाद पूरी तरह समाप्त हो चुकी है।
आरक्षित श्रेणी (AC या Sleeper) में यात्रा करने के लिए कर्मचारी को पहले IRCTC पोर्टल या रेलवे काउंटर पर जाकर अपने पास नंबर के जरिए बाकायदा टिकट बुक करना होता है। यदि सीट कन्फर्म या आरएसी (RAC) नहीं होती और वेटिंग रह जाती है, तो कर्मचारी आरक्षित डिब्बे में बिना अनुमति यात्रा नहीं कर सकता।
इस प्रकार, रेलवे पास एक कर्मचारी कल्याण लाभ जरूर है, लेकिन यह पूरी तरह नियमों, तय कोटे और प्रशासनिक पाबंदियों के दायरे में बंधा हुआ है।
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