
देश भर में तेजी से बढ़ रहे ऑनलाइन साइबर फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट और फर्जी सिम कार्डों के जरिए होने वाली वित्तीय धोखाधड़ी पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार और दूरसंचार विभाग (DoT) ने सिम कार्ड की बिक्री और ग्राहक सत्यापन (KYC) से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। दूरसंचार अधिनियम (Telecommunications Act) के सख्त प्रावधानों के तहत अब नया सिम कार्ड खरीदना पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी, तकनीकी रूप से सुरक्षित और कड़ाई से नियंत्रित कर दिया गया है। नए नियमों का सीधा उद्देश्य जाली दस्तावेजों पर सक्रिय होने वाले सिम कार्डों के अवैध नेटवर्क को जड़ से खत्म करना है।
1. पेपर बेस्ड केवाईसी पूरी तरह बंद, केवल डिजिटल और बायोमेट्रिक ई-केवाईसी मान्य
नए नियमों के अनुसार, सिम खरीदने के लिए पुराने फिजिकल पेपर फॉर्म भरने और फोटोकॉपी जमा करने की व्यवस्था को पूरी तरह बंद कर दिया गया है।
अब नया सिम कार्ड जारी करने के लिए केवल डिजिटल ई-केवाईसी (Digital e-KYC) और आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण ही अनिवार्य होगा:
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ग्राहक को सिम स्टोर पर लाइव फेशियल रिकग्निशन (Live Photo Capture) और फिंगरप्रिंट/आइरिस स्कैन के जरिए सत्यापित किया जाएगा।
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दुकानदार द्वारा ली गई ग्राहक की लाइव फोटो में जियो-टैगिंग और टाइम-स्टैम्पिंग अनिवार्य रूप से दर्ज होगी, जिससे फर्जी या पहले से खींची गई तस्वीरों का इस्तेमाल असंभव हो जाएगा।
2. सिम कार्ड डीलर्स और वेंडर्स का अनिवार्य पुलिस वेरिफिकेशन
फर्जी सिम जारी करने में शामिल बिचौलियों और अनधिकृत दुकानदारों पर नकेल कसने के लिए सभी टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स (जैसे जियो, एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया) को अपने पीओएस (Point of Sale) एजेंटों और सिम डीलर्स का अनिवार्य पुलिस सत्यापन कराने का निर्देश दिया गया है।
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हर छोटे-बड़े सिम विक्रेता को दूरसंचार कंपनी के साथ लिखित अनुबंध और आधिकारिक पंजीकरण करना होगा।
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यदि कोई सिम विक्रेता जाली दस्तावेजों पर सिम जारी करते हुए पकड़ा जाता है, तो उस पर ₹10 लाख तक का भारी जुर्माना, दुकान का ब्लैकलिस्टिंग और आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
3. बल्क सिम (थोक में सिम खरीद) पर पूर्ण प्रतिबंध: केवल कॉर्पोरेट कनेक्शन की अनुमति
अक्सर साइबर अपराधी फर्जी कंपनियों के नाम पर दर्जनों और सैकड़ों की संख्या में 'बल्क सिम कार्ड' खरीदकर कॉल सेंटर और ठगी के रैकेट चलाते थे।
नए नियमों के तहत आम नागरिकों या गैर-पंजीकृत संस्थाओं को थोक में सिम (Bulk SIM) जारी करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। किसी भी कंपनी या संस्थान को अपने कर्मचारियों के लिए व्यावसायिक सिम लेने के लिए 'बिजनेस या कॉर्पोरेट कनेक्शन' प्रक्रिया अपनानी होगी, जिसमें कंपनी के लीगल रजिस्ट्रेशन और सिम इस्तेमाल करने वाले प्रत्येक कर्मचारी का अलग व्यक्तिगत ई-केवाईसी कराना अनिवार्य होगा।
4. 1 आईडी पर अधिकतम 9 सिम की सीमा और जुर्माना
दूरसंचार विभाग के नियमों के तहत एक व्यक्ति के आधार या पहचान पत्र पर पूरे देश में अधिकतम 9 सिम कार्ड (जम्मू-कश्मीर, असम और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए अधिकतम 6 सिम) ही जारी किए जा सकते हैं।
यदि कोई व्यक्ति धोखाधड़ी, गलत पहचान या छुपाकर निर्धारित सीमा से अधिक सिम कार्ड रखता है या जारी करवाता है, तो पहली बार पकड़े जाने पर ₹50,000 और दोबारा पकड़े जाने पर ₹2 लाख तक का जुर्माना और कनेक्शन काटने की कार्रवाई की जा सकती है।
5. 'संचार साथी' पोर्टल से घर बैठे जांचें अपने नाम पर चल रहे सिम
नागरिकों को साइबर सुरक्षा देने के लिए सरकार के 'संचार साथी' पोर्टल (sancharsaathi.gov.in) को और अधिक सशक्त बनाया गया है:
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पोर्टल के 'TAFCOP' मॉड्यूल के जरिए कोई भी नागरिक अपना मोबाइल नंबर डालकर तुरंत चेक कर सकता है कि उसके आधार नंबर पर कुल कितने मोबाइल कनेक्शन सक्रिय हैं।
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यदि आपकी आईडी पर कोई ऐसा अज्ञात सिम कार्ड चालू दिखता है जिसे आपने कभी नहीं खरीदा, तो आप पोर्टल से ही उस नंबर को तुरंत ब्लॉक और डिस्कनेक्ट करने की ऑनलाइन रिपोर्ट दर्ज कर सकते हैं।
दूरसंचार मंत्रालय का मानना है कि इन कड़े नियमों के लागू होने से जहां आम और वास्तविक उपभोक्ताओं को सिम खरीदने में महज 2 से 3 मिनट का समय लगेगा, वहीं फर्जी दस्तावेजों के सहारे चलने वाले साइबर ठगों के सिंडिकेट पर निर्णायक ताला लग सकेगा।
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