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विधानसभा में हाई-वोल्टेज ड्रामा राज्यपाल ने बदला भाषण, CM ने तुरंत पास कर दिया प्रस्ताव

News India Live, Digital Desk: किसी राज्य की विधानसभा का सबसे महत्वपूर्ण दिन, साल का पहला सत्र। हॉल खचाखच भरा हुआ है, मुख्यमंत्री, सारे मंत्री और विधायक मौजूद हैं। परंपरा के अनुसार, राज्यपाल महोदय सरकार की उपलब्धियों वाला भाषण पढ़ने के लिए खड़े होते हैं… लेकिन तभी कुछ ऐसा होता है कि पूरे देश में राजनीतिक भूचाल आ जाता है।तमिलनाडु में बिल्कुल यही हुआ।कहानी की शुरुआत भाषण से हुईहुआ ये कि राज्यपाल आर.एन. रवि विधानसभा में सरकार द्वारा तैयार किया गया भाषण पढ़ने के लिए खड़े हुए। लेकिन उन्होंने उस भाषण के कुछ हिस्सों को पढ़ने से ही इनकार कर दिया या यूँ कहें कि उन्हें छोड़ दिया। और ये हिस्से कोई मामूली पैराग्राफ नहीं थे।खबरों के मुताबिक, उन्होंने भाषण से “द्रविड़ मॉडल” जैसे शब्दों को हटा दिया, जो कि तमिलनाडु की सत्ताधारी DMK सरकार की पहचान है। इसके अलावा, उन्होंने पेरियार, अंबेडकर, कामराज और अन्नादुरई जैसे बड़े नेताओं के नामों का ज़िक्र भी नहीं किया, जो कि भाषण का हिस्सा था।फिर आया कहानी में असली मोड़!जैसे ही राज्यपाल ने भाषण में ये बदलाव किए, मामला गरमा गया। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन अपनी सीट से खड़े हुए और उन्होंने तुरंत एक ऐसा प्रस्ताव पेश कर दिया, जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। उन्होंने कहा कि सदन के रिकॉर्ड में राज्यपाल द्वारा पढ़ा गया भाषण नहीं, बल्कि सरकार द्वारा तैयार किया गयामूल भाषण ही दर्ज किया जाए।यानी एक तरह से मुख्यमंत्री ने राज्यपाल के बदले हुए भाषण को सदन में ही खारिज कर दिया। विधानसभा में यह प्रस्ताव तुरंत पास भी हो गया।और फिर… गवर्नर का वॉकआउटयह घटनाक्रम शायद राज्यपाल आर.एन. रवि को नागवार गुज़रा। मुख्यमंत्री का यह कदम उठाने के बाद, राज्यपाल राष्ट्रगान का इंतज़ार किए बिना ही सदन से बाहर चले गए। यह एक बहुत बड़ी और अभूतपूर्व घटना थी।यह मामला सिर्फ एक भाषण का विवाद नहीं है। यह राज्य सरकार और केंद्र द्वारा नियुक्त राज्यपाल के बीच चल रहे टकराव का एक बड़ा उदाहरण बन गया है। इस एक घटना ने पूरे देश में यह बहस छेड़ दी है कि एक राज्यपाल के अधिकार क्या हैं और एक चुनी हुई सरकार की इच्छा का कितना सम्मान होना चाहिए।