
News India Live, Digital Desk: अगर आप विदेश जाने का सपना देख रहे हैं और पासपोर्ट-वीजा के चक्कर में काम अटका हुआ है, तो आपको तेलंगाना के ‘चिलकुर बालाजी’ मंदिर के बारे में जरूर जानना चाहिए। हैदराबाद के बाहरी इलाके में उस्मान सागर झील के किनारे स्थित इस मंदिर को दुनिया भर में ‘वीजा बालाजी’ के नाम से जाना जाता है। माना जाता है कि यहां मत्था टेकने मात्र से ही भक्तों के वीजा से जुड़ी हर बाधा दूर हो जाती है।साढ़े सात सौ साल पुराना है इतिहास चिलकुर बालाजी मंदिर कोई नया चमत्कार नहीं है, बल्कि इसका इतिहास करीब 500-800 साल पुराना बताया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक भक्त जो हर साल तिरुपति बालाजी के दर्शन करने जाता था, वृद्धावस्था के कारण जब असमर्थ हो गया, तो भगवान वेंकटेश्वर ने उसे दर्शन दिए और खुद प्रकट हुए। यह मंदिर अपनी प्राचीनता और अद्भुत सकारात्मक ऊर्जा के लिए प्रसिद्ध है।न दान-दक्षिणा, न वीआईपी कल्चर: सिर्फ 108 परिक्रमा! इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत इसकी सादगी है। चिलकुर बालाजी देश के उन चुनिंदा मंदिरों में से एक है जहां:कोई दान पेटी नहीं है: यहां भक्तों से किसी भी तरह का धन नहीं लिया जाता।कोई वीआईपी लाइन नहीं: चाहे अमीर हो या गरीब, सबको एक ही कतार में लगना पड़ता है।परिक्रमा का विधान: भक्त यहां आकर पहले 11 परिक्रमा करते हैं और मन्नत पूरी होने के बाद धन्यवाद देने के लिए 108 परिक्रमा लगाते हैं।वीजा बालाजी नाम पड़ने के पीछे की रोचक कहानी 1980 के दशक में यह मंदिर तब चर्चा में आया जब कुछ छात्रों का अमेरिकी वीजा रिजेक्ट हो गया था। उन्होंने यहां आकर मन्नत मांगी और चमत्कारिक रूप से उन्हें वीजा मिल गया। इसके बाद यह खबर आग की तरह फैल गई। आज स्थिति यह है कि हजारों की संख्या में सॉफ्टवेयर इंजीनियर और छात्र अपनी पासपोर्ट कॉपी लेकर यहां भगवान का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं।मंदिर प्रबंधन का अनूठा संदेश मंदिर के मुख्य पुजारी का मानना है कि आस्था और अनुशासन ही सच्ची पूजा है। मंदिर परिसर में किसी भी तरह के शोर-शराबे या फिजूलखर्ची की मनाही है। यहां का शांत वातावरण और भक्तों का अटूट विश्वास ही इसे खास बनाता है। यदि आप भी हैदराबाद की यात्रा पर हैं, तो इस अनोखे ‘वीजा गॉड’ के दर्शन करना एक यादगार अनुभव हो सकता है।
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