
हिंदू धर्म और वैदिक पंचांग में सावन मास की पूर्णिमा तिथि का अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक महत्व माना गया है। यह वही पावन दिन है जब भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व मनाया जाता है, अमरनाथ यात्रा का समापन होता है और भगवान शिव व चंद्र देव की विशेष आराधना की जाती है। इस बार सावन पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) का अत्यंत दुर्लभ और खगोलीय व ज्योतिषीय संयोग बन रहा है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन पूर्णिमा के दिन किए गए गंगा स्नान, तप और दान का फल सामान्य दिनों की तुलना में हजार गुना अधिक प्राप्त होता है। वहीं ग्रहण के दौरान और ग्रहण की समाप्ति (मोक्ष काल) के बाद किए गए दान-पुण्य से कुंडली के बड़े से बड़े ग्रह दोष, पितृ दोष और मानसिक तनाव समाप्त हो जाते हैं।
यदि आप भी सावन पूर्णिमा के दिन भगवान भोलेनाथ और चंद्र देव की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, तो स्नान-दान का सटीक समय और ग्रहण के बाद दान की जाने वाली पवित्र वस्तुओं की पूरी सूची विस्तार से जान लें।
सावन पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण का समय और सूतक काल के नियम
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, चंद्र ग्रहण का प्रभाव पृथ्वी और सभी 12 राशियों के जातकों पर प्रत्यक्ष रूप से पड़ता है।
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सूतक काल का नियम: चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण स्पर्श होने से ठीक 9 घंटे (3 प्रहर) पहले शुरू हो जाता है। सूतक काल लगते ही मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं, किसी भी प्रकार की मूर्ति पूजा या शुभ मांगलिक कार्य वर्जित हो जाते हैं और भोजन पकाने व खाने से परहेज किया जाता है।
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गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए नियम: ग्रहण काल के दौरान गर्भवती महिलाओं को धारदार वस्तुओं (कैंची, चाकू, सुई) का इस्तेमाल न करने और घर के अंदर रहने की सलाह दी जाती है। पके हुए भोजन, दूध और पीने के पानी में तुलसी दल या कुशा (घास) पहले से डाल दी जाती है ताकि नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव न पड़े।
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मंत्र जाप का समय: ग्रहण काल में सोने या व्यर्थ बातचीत करने के बजाय महामृत्युंजय मंत्र, गायत्री मंत्र या 'ॐ सों सोमाय नमः' का मानसिक जाप करना सर्वोत्तम माना गया है।
सावन पूर्णिमा पर पवित्र स्नान और दान का सबसे शुभ मुहूर्त
सावन पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त से लेकर पूरे दिन स्नान और दान का पुण्य काल मान्य रहता है। हालांकि, ग्रहण के संदर्भ में स्नान-दान के दो विशेष चरण होते हैं:
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प्रातः कालीन स्नान-दान मुहूर्त (ब्रह्म मुहूर्त): सुबह 04:30 बजे से लेकर सुबह 06:15 बजे तक का समय सूर्योदय कालीन पवित्र नदी स्नान और सूर्य देव को अर्घ्य देने के लिए सर्वश्रेष्ठ है।
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सूतक से पहले का दान काल: सूतक काल शुरू होने से पहले ब्राह्मणों, जरूरतमंदों और कन्याओं को यथाशक्ति भोजन, फल और दक्षिणा दान करना अत्यंत फलदायी होता है।
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ग्रहण मोक्ष के बाद का महास्नान मुहूर्त: ग्रहण समाप्त होते ही (मोक्ष काल के तुरंत बाद) ताजे जल या गंगाजल मिले पानी से पूरे शरीर का शुद्धिकरण स्नान किया जाता है और उसके बाद 'मोक्ष दान' का संकल्प लिया जाता है।
चंद्र ग्रहण समाप्त होने के बाद किन चीजों का दान करने से मिलता है महापुण्य?
शास्त्रों में विधान है कि ग्रहण के मोक्ष के तुरंत बाद किया गया दान सीधे पितरों और देवताओं तक पहुंचता है तथा राहु-केतु और चंद्रमा के अशुभ प्रभावों को शांत करता है। सावन पूर्णिमा पर इन वस्तुओं का दान विशेष रूप से फलदायी माना गया है:
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सफेद वस्तुएं (चंद्रमा की शांति के लिए): चंद्र देव के कारकत्व को मजबूत करने और मानसिक शांति के लिए कच्चा दूध, चावल (अक्षत), सफेद बताशे, चीनी (शक्कर), खीर, दही और सफेद चंदन का दान करें।
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अनाज और सूखा राशन (अन्नदान): 7 प्रकार के अनाज (सप्तधान्य), गेहूं, चने की दाल और आटे का किसी जरूरतमंद परिवार या मंदिर के अन्नक्षेत्र में दान करने से घर में अन्न-धन का भंडार कभी खाली नहीं होता।
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चांदी का दान (Silver Charity): यदि सामर्थ्य हो, तो सावन पूर्णिमा पर चांदी का सिक्का, चांदी का छोटा नाग-नागिन का जोड़ा या चांदी का शिवलिंग दान करने से कालसर्प दोष और पितृ दोष से तत्काल मुक्ति मिलती है।
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वस्त्र दान: गरीबों या भिक्षुकों को सफेद धोती, कुर्ता, साड़ियां या तौलिया दान करें। इससे स्वास्थ्य लाभ होता है और लंबी बीमारियों से छुटकारा मिलता है।
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तिल और गुड़ (राहु-केतु शांति): काले तिल, सफेद तिल और गुड़ का दान ग्रहण जनित अशुभ प्रभावों को दूर कर जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाता है।
ग्रहण मोक्ष के बाद घर के शुद्धिकरण के 5 अनिवार्य नियम
ग्रहण समाप्त होते ही घर की शुद्धि और देव पूजन के लिए निम्नलिखित विधि-विधान का पालन अवश्य करना चाहिए:
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मोक्ष स्नान: घर के सभी सदस्य ताजे पानी में कुछ बूंदें गंगाजल डालकर स्नान करें और स्वच्छ धुले हुए वस्त्र धारण करें।
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घर और पूजा स्थल का शुद्धिकरण: पूरे घर में, विशेष रूप से रसोई घर और मंदिर में गंगाजल छिड़कें ताकि ग्रहण की सूतक छाया समाप्त हो सके।
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भगवान का जलाभिषेक: घर के मंदिर के कपाट खोलें, देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को गंगाजल और पंचामृत से स्नान कराएं, नए वस्त्र पहनाएं और ताजे फूल व भोग अर्पित करें।
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दीपक प्रज्वलित करें: घर के मुख्य द्वार और पूजा घर में गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाएं और पूरे घर में कपूर और धूपबत्ती की धूनी दें।
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बासी भोजन का त्याग: ग्रहण से पहले बने बिना तुलसी वाले भोजन को पशुओं या पक्षियों को डाल दें और ग्रहण समाप्ति के बाद ताजा सात्विक भोजन ही बनाकर पहले भगवान को भोग लगाएं और फिर स्वयं ग्रहण करें।
सावन पूर्णिमा पर शिवलिंग पर अर्पित करें ये 5 पवित्र सामग्रियां
सावन का अंतिम दिन होने के कारण पूर्णिमा पर भगवान शिव की विशेष आराधना का फल कई जन्मों के पुण्यों के बराबर माना जाता है। ग्रहण के बाद शिवलिंग पर:
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गंगाजल और कच्चे दूध से अभिषेक करें।
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108 बेलपत्र पर चंदन से 'ॐ नमः शिवाय' लिखकर अर्पित करें।
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सफेद मदार (आक) के फूल, धतूरा और भस्म चढ़ाएं।
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शहद और सफेद जनेऊ अर्पित कर परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें।
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