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सुपर-डूपर अल नीनो का खतरनाक रूप! लाल रंग में रंगी आधी से ज्यादा पृथ्वी, WMO ने जारी की 2027 तक के लिए भयानक चेतावनी

वैश्विक स्तर पर मौसम और जलवायु में हो रहे अमूल्य बदलावों ने वैज्ञानिकों और मौसम विशेषज्ञों की नींद उड़ा दी है। इस समय पूरी दुनिया 'सुपर-डूपर अल नीनो' (Super-Duper El Nino) के एक बेहद खतरनाक और अभूतपूर्व दौर से गुजर रही है। संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) और विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने चेतावनी जारी करते हुए इसे साल 1950 के बाद से अब तक का सबसे शक्तिशाली जलवायु घटनाक्रम करार दिया है।

मौसम वैज्ञानिकों द्वारा जारी किए गए हालिया जलवायु नक्शों में पृथ्वी का एक बहुत बड़ा हिस्सा गहरे लाल रंग में रंगा हुआ दिखाई दे रहा है, जो ग्लोबल वार्मिंग और बढ़ती गर्मी के बेहद भयानक स्तर को दर्शाता है।

क्या है 'सुपर-डूपर अल नीनो' और वैज्ञानिकों का मत

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) के पानी में भारी मात्रा में गर्मी जमा हो गई है, जिसके बाहर निकलने के कारण आने वाले महीनों में पृथ्वी का एक बड़ा भूभाग असामान्य रूप से गर्म रहेगा। जाने-माने मौसम वैज्ञानिक रयान माउ (Ryan Maue) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर दुनिया का एक जलवायु नक्शा साझा करते हुए बताया कि पृथ्वी लगभग पूरी तरह से लाल रंग में तब्दील हो चुकी है।

उन्होंने चेतावनी दी है कि अल नीनो का यह रूप सर्दियों के मौसम में भी अपनी पूरी ताकत के साथ सक्रिय रहेगा। इसके अलावा, एक अन्य प्रसिद्ध वैज्ञानिक जेक हॉसफादर ने बताया कि इस साल अल नीनो उस स्थिति में पहुंच चुका है जो इतिहास में पहले कभी नहीं देखी गई। अल नीनो के मुख्य केंद्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 3.4 डिग्री सेल्सियस से भी अधिक दर्ज किया जा चुका है, जो अब तक का एक नया रिकॉर्ड है। प्रसिद्ध मौसम विशेषज्ञ लियोन साइमन्स ने इस गंभीर स्थिति को 'सुपर-डूपर अल नीनो' का नाम दिया है।

क्यों खतरनाक है अल नीनो और क्या होंगे इसके प्रभाव

अल नीनो प्राकृतिक रूप से होने वाले 'अल नीनो-सदर्न ऑसिलेशन' (ENSO) चक्र का गर्म चरण होता है, जो दुनिया भर के मौसम को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। इसके असर से वैश्विक तापमान में तेजी से वृद्धि होती है और दुनिया के कई हिस्सों में बारिश का पैटर्न पूरी तरह से बिगड़ जाता है। कुछ इलाकों में भयंकर सूखा पड़ने की आशंका रहती है, तो वहीं कुछ हिस्सों में अत्यधिक मूसलाधार बारिश और बाढ़ जैसी आपदाएं देखने को मिलती हैं। सामान्य तौर पर यह चक्र हर दो से सात साल में सक्रिय होता है, लेकिन इस बार का रूप बेहद विकराल है।

शिकागो यूनिवर्सिटी की क्लाइमेट इंपैक्ट लैब के शोधकर्ताओं ने हाल ही में एक अनुमान जारी करते हुए यह चेतावनी दी है कि इस सुपर अल नीनो के प्रभाव के कारण जून से लेकर फरवरी 2027 के बीच दुनिया भर में 4 लाख 51 हजार से अधिक मौतें हो सकती हैं। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह खतरनाक जलवायु पैटर्न फरवरी 2027 तक लगातार बना रह सकता है, जिससे वैश्विक कृषि, जल संसाधनों और मानव जीवन पर बहुत बड़ा संकट आ सकता है।