
News India Live, Digital Desk: देश की सबसे बड़ी अदालत, सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों को यौन अपराधों से बचाने वाले सख्त कानून POCSO (पॉक्सो) एक्ट के गलत इस्तेमाल पर गहरी चिंता व्यक्त की है। कोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि यह कानून बच्चों को यौन शिकारियों से बचाने के लिए बनाया गया था, न कि उन किशोरों को अपराधी बनाने के लिए जो आपसी सहमति से रोमांटिक रिश्ते में हैं।क्या था पूरा मामला, जिस पर कोर्ट ने की यह टिप्पणी?सुप्रीम कोर्ट एक ऐसे ही मामले की सुनवाई कर रहा था, जहां एक नाबालिग लड़के और लड़की के बीच आपसी सहमति से रिश्ता था। बाद में लड़की गर्भवती हो गई और उसके परिवार ने लड़के के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज करा दिया, जिसके बाद लड़के को जेल हो गई। इसी मामले में लड़के की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह अहम टिप्पणी की।कानून का हो रहा है गलत इस्तेमालजस्टिस अभय एस. ओका और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने कहा कि देश में ऐसे मामलों की बाढ़ सी आ गई है, जहां दो किशोर-किशोरी अपनी मर्जी से संबंध बनाते हैं, लेकिन बाद में जब रिश्ता बिगड़ जाता है या परिवार वालों को पता चलता है, तो लड़के के खिलाफ इस कानून का इस्तेमाल एक हथियार की तरह किया जाता है।कोर्ट ने कहा, “इस कानून का उद्देश्य बच्चों को यौन शोषण से बचाना था। लेकिन इसका इस्तेमाल किशोरों के बीच के प्रेम संबंधों को अपराध बनाने के लिए किया जा रहा है। इससे नाबालिग लड़कों का भविष्य बर्बाद हो रहा है और उन पर अपराधी का ठप्पा लग जाता है।”संसद को इस पर ध्यान देना चाहिएअदालत ने यह भी कहा कि कानून में बदलाव करना या उसमें संशोधन करना संसद का काम है, लेकिन जिस तरह से इस कानून का दुरुपयोग हो रहा है, उसे देखते हुए विधायिका (संसद) को इस मामले पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि वे अपने स्तर पर कानून नहीं बदल सकते, लेकिन वे इस गंभीर समस्या की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित कर सकते हैं।इस मामले में कोर्ट ने लड़के और लड़की के बीच सहमति से संबंध होने की बात को ध्यान में रखते हुए आरोपी लड़के को जमानत दे दी।सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी उन हजारों मामलों के लिए एक बड़ा संकेत है, जहां किशोरों के बीच के आपसी रिश्तों को कानूनी दांव-पेंच में फंसा दिया जाता है, जिससे उनकी पूरी जिंदगी प्रभावित होती है।
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