
उत्तर प्रदेश में सड़क परिवहन के बुनियादी ढांचे को मजबूत और हाई-स्पीड बनाने के उद्देश्य से एक महत्वाकांक्षी मेगा प्रोजेक्ट पर काम तेजी से शुरू कर दिया गया है। राज्य सरकार जल्द ही प्रयागराज से सोनभद्र तक एक नए और अत्याधुनिक 'विंध्य एक्सप्रेसवे' का निर्माण कराने जा रही है। इस नए एक्सप्रेसवे के धरातल पर उतरते ही उत्तर प्रदेश का रोड नेटवर्क कई पड़ोसी राज्यों से सीधे और सुगमता से जुड़ जाएगा। इससे न केवल आम यात्रियों के लिए आवागमन का समय काफी घट जाएगा, बल्कि पूरे विंध्य और पूर्वांचल क्षेत्र में औद्योगिक व व्यापारिक गतिविधियों को भी जबर्दस्त रफ्तार मिलेगी।
333 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे: 4 जिलों के 341 गांवों से होकर गुजरेगा रूट
यह दूरगामी और रणनीतिक एक्सप्रेसवे कुल 333 किलोमीटर लंबा होगा। इसका शुरुआती पॉइंट प्रयागराज से तय किया गया है, जिसके बाद यह भदोही और मिर्जापुर जिलों की सीमाओं को छूते हुए सोनभद्र तक पहुंचेगा। इस पूरे प्रोजेक्ट के दायरे में 4 जिलों के कुल 341 गांव आ रहे हैं। एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए कुल 4913.93 हेक्टेयर (लगभग 4 करोड़ 91 लाख 39 हजार 300 वर्ग मीटर) विशाल भू-भाग का इस्तेमाल किया जाएगा।
किस जिले में कितनी जमीन होगी अधिगृहीत? जानिए जिलावार आंकड़े
विंध्य एक्सप्रेसवे के निर्माण में जमीन अधिग्रहण का सबसे बड़ा हिस्सा सोनभद्र जिले में आ रहा है। सोनभद्र के सबसे ज्यादा 108 गांवों की 2019.64 हेक्टेयर जमीन इस परियोजना के लिए ली जाएगी। वहीं दूसरे नंबर पर मिर्जापुर जिला है, जहां के 91 गांवों की 1258.79 हेक्टेयर जमीन अधिगृहीत होगी। इसके अलावा प्रयागराज जिले के 84 गांवों की 862.76 हेक्टेयर जमीन और भदोही जिले के 58 गांवों की 772.74 हेक्टेयर भूमि इस एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट के दायरे में आ रही है।
जमीन सत्यापन की प्रक्रिया तेज: बनाई जाएगी विशेष जिला स्तरीय कमेटी
विशाल पैमाने पर जमीन की आवश्यकता को देखते हुए शासन और प्रशासन द्वारा जमीन सत्यापन की कागजी प्रक्रिया को बहुत तेजी से निपटाया जा रहा है। राजस्व विभाग की टीमें जमीनों के अभिलेखों की गहन जांच में जुटी हैं। जैसे ही सत्यापन का कार्य पूरी तरह संपन्न हो जाएगा, संबंधित चारों जिलों में जिला स्तर पर एक विशेष कमेटी का गठन किया जाएगा। इस कमेटी का प्राथमिक कार्य किसानों और भू-स्वामियों से सीधे बातचीत कर बैनामे (रजिस्ट्री) के लिए जमीन की उचित और पारदर्शी दरें तय करना होगा। इसी तय मूल्यांकन के आधार पर मुआवजा देकर बैनामे की प्रक्रिया पूरी होगी, जिसके बाद निर्माण कार्य तेजी से शुरू हो जाएगा।
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