
कोलंबो के आर. प्रेमदासा स्टेडियम का नाम सुनते ही क्रिकेट फैंस के जहन में टेस्ट क्रिकेट का एक ऐसा मुकाबला तरोताजा हो जाता है, जिसने रिकॉर्ड बुक्स के पन्नों को पूरी तरह बदलकर रख दिया। साल 1997 में भारत और श्रीलंका के बीच खेला गया यह टेस्ट मैच सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि बल्लेबाजों के दबदबे और गेंदबाजों की कड़ी परीक्षा की एक अमर कहानी बन गया। एक ही मैदान पर दो ऐसे कीर्तिमान रचे गए, जिनकी चर्चा आज भी दुनिया भर के क्रिकेट गलियारों में बड़े चाव से की जाती है।
डेब्यू मैच की पहली ही गेंद पर रचा इतिहास
भारत की तरफ से इस मुकाबले में युवा स्पिनर नीलेश कुलकर्णी अपना टेस्ट डेब्यू कर रहे थे। उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत किसी सपने जैसी की। अपने टेस्ट करियर की पहली ही गेंद पर श्रीलंका के सलामी बल्लेबाज मार्वन अटापट्टू को आउट कर नीलेश कुलकर्णी ने इतिहास रच दिया। वह भारत के पहले और दुनिया के चुनिंदा ऐसे गेंदबाजों में शामिल हो गए, जिन्होंने टेस्ट मैच में अपनी पहली ही गेंद पर सफलता हासिल की हो। इस झटके के बाद भारतीय खेमे में उत्साह की लहर दौड़ गई थी, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि आगे क्या होने वाला है।
फिर आया श्रीलंकाई बल्लेबाजों का तूफान
शुरुआती झटका खाने के बाद श्रीलंकाई टीम के बल्लेबाजों ने मैदान पर जो खूंटा गाड़ा, उसने भारतीय गेंदबाजों के पसीने छुड़ा दिए। सनथ जयसूर्या और रोशन महानामा की जोड़ी ने पिच पर पैर जमाते हुए चौके और छक्कों की बरसात कर दी। जयसूर्या ने 340 रनों की मैराथन पारी खेली, जबकि महानामा ने भी 225 रन ठोक डाले। भारतीय गेंदबाजी आक्रमण पूरी तरह बेबस नजर आने लगा और श्रीलंकाई बल्लेबाजों ने मैदान के हर कोने में रन बटोरे।
70 ओवरों का खौफनाक और थका देने वाला स्पेल
पहली गेंद पर विकेट लेने वाले नीलेश कुलकर्णी के लिए खुशियों का क्षण जल्द ही कड़ी अग्निपरीक्षा में बदल गया। पहली गेंद पर सफलता पाने के बाद उन्हें विकेट तरसने लगा और उन्होंने इस मैच में कुल 70 ओवर गेंदबाजी की। इसी तरह अनिल कुंबले ने 72 ओवर और राजेश चौहान ने 78 ओवर फेंके। भारतीय गेंदबाज विकेट की तलाश में लगातार ओवर फेंकते रहे, लेकिन सपाट पिच और श्रीलंकाई बल्लेबाजों के धैर्य के सामने कोई भी रणनीति काम नहीं आ रही थी।
952 रनों का पहाड़ जैसा स्कोर और अमर रिकॉर्ड
श्रीलंका ने इस मुकाबले में 6 विकेट के नुकसान पर 952 रनों का विशालकाय स्कोर बनाकर पारी घोषित की। यह टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में किसी भी टीम द्वारा बनाया गया अब तक का सबसे बड़ा स्कोर है, जो आज भी एक अटूट विश्व रिकॉर्ड के रूप में कायम है। यह मुकाबला अंततः ड्रॉ पर समाप्त हुआ, लेकिन एक ही मैच में पहली गेंद पर विकेट लेने का कारनामा और 952 रनों का महा-रिकॉर्ड, दोनों ही घटनाएं क्रिकेट प्रेमियों की यादों में हमेशा के लिए दर्ज हो गईं।
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