
News India Live, Digital Desk: करवा चौथ का व्रत न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह पति-पत्नी के रिश्ते को मज़बूत करने का एक जरिया भी है. यह व्रत कठोर नियमों और पूरी श्रद्धा के साथ किया जाता है. व्रत के दौरान शारीरिक और मानसिक शुद्धता बनाए रखना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है.क्या करवा चौथ पर शारीरिक संबंध बनाना सही है?धार्मिक मान्यताओं और करवा चौथ व्रत की पवित्रता को देखते हुए, ऐसी सलाह दी जाती है कि करवा चौथ के दिन शारीरिक संबंध बनाने से बचना चाहिए. इस दिन को पूर्ण रूप से आत्म-संयम, भक्ति और पति के प्रति प्रेम के समर्पण के लिए रखा जाता है. व्रत का मुख्य उद्देश्य आध्यात्मिक शुद्धि और देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त करना है. ऐसे में, शारीरिक संबंधों से दूर रहना व्रत की पवित्रता को बनाए रखने और एकाग्रता को भंग होने से बचाने के लिए अच्छा माना जाता है. यह दिन पति-पत्नी के बीच एक अलग तरह की भावनात्मक और आध्यात्मिक निकटता बढ़ाने का होता है.करवा चौथ व्रत के कुछ अन्य ज़रूरी नियम:निर्जला व्रत: करवा चौथ का व्रत सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला रखा जाता है, यानी पानी भी नहीं पीते. यह व्रत की सबसे कठिन शर्त है.सरगी का महत्व: सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करना ज़रूरी है. यह सास द्वारा बहू को दिया जाता है, जिसमें फल, मिठाई और अन्य पौष्टिक चीजें होती हैं, ताकि महिला दिन भर ऊर्जावान रह सके.पूजा और कथा: शाम को चंद्रोदय से पहले, करवा माता, भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की विधिवत पूजा की जाती है. इस दौरान करवा चौथ की कथा सुनना या पढ़ना बहुत शुभ माना जाता है.सोलह श्रृंगार: व्रत करने वाली महिलाएं इस दिन सोलह श्रृंगार करती हैं, जो सुहाग और समृद्धि का प्रतीक है.क्रोध और वाद-विवाद से बचें: व्रत वाले दिन किसी पर क्रोध करने, अपशब्द बोलने या वाद-विवाद करने से बचना चाहिए. मन को शांत और सकारात्मक रखना चाहिए.किसी का अपमान न करें: घर के बड़ों या किसी भी व्यक्ति का अपमान करने से बचना चाहिए. इससे व्रत का फल नहीं मिलता.चंद्र दर्शन और अर्घ्य: चंद्रमा के दर्शन होने के बाद उन्हें अर्घ्य दिया जाता है. यह व्रत का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है.पति के हाथ से पानी: चंद्र दर्शन के बाद पति के हाथ से पानी पीकर और भोजन ग्रहण करके व्रत खोला जाता है.दान-दक्षिणा: पूजा के बाद या व्रत खोलने के बाद ब्राह्मणों या ज़रूरतमंदों को दान-दक्षिणा देना शुभ माना जाता है.यह व्रत केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि पति-पत्नी के रिश्ते की गहराई और प्रेम का एक सुंदर प्रतीक है. इन नियमों का पालन करने से व्रत का पूरा फल मिलता है और वैवाहिक जीवन में खुशियां बनी रहती हैं.
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