
देश के करोड़ों किसानों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी है। सरकार ने किसानों की आमदनी बढ़ाने और खेती-किसानी को और मजबूत बनाने के लिए कई नई योजनाओं की घोषणा की है। यह घोषणा महान समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण की जयंती के खास मौके पर की गई है। इन योजनाओं का मकसद सिर्फ फसल उगाना नहीं,बल्कि पशुपालन,मछली पालन और खाने-पीने की चीजों की प्रोसेसिंग (food processing)से जुड़े कामों को भी बढ़ावा देना है।चलिए,आसान भाषा में समझते हैं कि इन योजनाओं से आपको,यानी देश के किसानों को क्या-क्या फायदे मिलने वाले हैं।1.अब दालों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहना होगा:‘दाल आत्मनिर्भरता मिशन’भारत में दालों की खपत बहुत ज्यादा है,लेकिन उत्पादन उतना नहीं हो पाता,जिस वजह से हमें दूसरे देशों से दालें मंगवानी पड़ती हैं। इस समस्या को खत्म करने के लिए सरकार ने‘दाल आत्मनिर्भरता मिशन’शुरू किया है।क्या है लक्ष्य?:इस मिशन का लक्ष्य2030-31तक देश में दालों का उत्पादन250लाख टन से बढ़ाकर350लाख टन करना है।कितना खर्च होगा?:सरकार इस काम पर₹11,440करोड़ खर्च करेगी।किसानों को इससे क्या फायदा होगा?किसानों को अच्छी क्वालिटी के बीज और खेती की नई तकनीकें मिलेंगी।दाल उगाने वाले किसानों को खास ट्रेनिंग दी जाएगी,जिससे फसल की लागत कम होगी और पैदावार बढ़ेगी।सरकार की मदद से ज़्यादा से ज़्यादा किसान दालों की खेती करने के लिए प्रोत्साहित होंगे,जिससे उनकी कमाई बढ़ेगी।फसल बेचने के लिए बेहतर बाजार और सुविधाएँ मिलेंगी।2. 100पिछड़े जिलों की बदलेगी तस्वीर:‘प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना’देश के100ऐसे जिले,जहाँ खेती-किसानी की हालत बहुत अच्छी नहीं है,उनके विकास के लिए यह योजना बनाई गई है।कितना खर्च होगा?:इस योजना पर सरकार₹24,000करोड़ खर्च करेगी।क्या काम होगा?:इन जिलों में फसलों की पैदावार बढ़ाने और अलग-अलग तरह की फसलें उगाने पर जोर दिया जाएगा। सिंचाई की व्यवस्था को सुधारा जाएगा,और फसल रखने के लिए नए गोदाम बनाए जाएंगे।किसानों को सीधी मदद:इन जिलों के किसानों को खेती के काम के लिए बहुत ही आसान शर्तों पर लोन (कर्ज) भी मिलेगा।3.खेती के साथ पशुपालन और मछली पालन से भी होगी कमाईखेती के साथ-साथ जुड़े दूसरे कामों को बढ़ावा देने के लिए भी₹5,450करोड़ की परियोजनाओं की शुरुआत की गई है।दूध का उत्पादन बढ़ाने के लिए मेहसाणा,इंदौर और भीलवाड़ा में दूध पाउडर बनाने की नई फैक्ट्रियाँ शुरू की गई हैं।पशुओं की नस्ल सुधारने के लिए बेंगलुरु और जम्मू-कश्मीर में ट्रेनिंग सेंटर और असम में IVFलैब खोली गई है।तेजपुर में मछली का दाना (Fish Feed)बनाने की फैक्ट्री भी खोली गई है।इन सभी कदमों से किसानों और पशुपालकों के लिए कमाई के नए रास्ते खुलेंगे।किसानों का सम्मान,बढ़ेगा मनोबलइस कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने खुद उन किसानों को सर्टिफिकेट दिए जो प्राकृतिक खेती (Natural Farming)कर रहे हैं। साथ ही,उन्होंने दाल उगाने वाले कुछ किसानों से सीधी बातचीत भी की और उनकी मेहनत को सराहा। इस मौके पर कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी मौजूद रहे। अब तक करीब50लाख किसान10,000किसान उत्पादक संगठनों (FPOs)से जुड़ चुके हैं,जिससे उन्हें अपनी फसल का बेहतर दाम मिल रहा है।
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