
News India Live, Digital Desk: लखनऊ शहर अपनी नज़ाकत और तहज़ीब के लिए जाना जाता है, लेकिन इन दिनों यहाँ की हवाओं में पहाड़ों की ख़ुशबू घुली हुई है। गोमती नगर के उत्तराखंड महापरिषद मैदान में ‘उत्तराखंड महोत्सव 2025’ का आगाज़ हो चुका है और इसी के साथ शहर के बीचों-बीच मानो एक छोटा सा उत्तराखंड बस गया है। यह महोत्सव सिर्फ़ एक मेला नहीं, बल्कि उस पूरी संस्कृति, स्वाद और कला का संगम है, जो सीधे देवभूमि से चलकर नवाबों के शहर आई है।रविवार की शाम जब इस महोत्सव का उद्घाटन हुआ, तो पूरा माहौल ढोल-दमाऊ की दमदार गूंज और पारंपरिक पहाड़ी संगीत से जीवंत हो उठा। मंच पर कलाकारों ने कुमाऊंनी और गढ़वाली संस्कृति के ऐसे रंग बिखेरे कि देखने वाले बस देखते ही रह गए।कला, संस्कृति और स्वाद का संगममहोत्सव में घुसते ही सबसे पहले आपका ध्यान खींचते हैं वो स्टॉल, जहाँ उत्तराखंड की कला और परंपरा सजी हुई है। कहीं दीवारों पर टंगी ख़ूबसूरत ‘ऐपण’ कलाकारी दिखती ہے, तो कहीं दुल्हन की शान कहे जाने वाले ‘पिछौड़े’ का सुनहरा रंग। इन स्टॉल्स पर उत्तराखंड के पारंपरिक परिधान, ऊनी कपड़े और हाथ से बने सजावटी सामान लोगों को ख़ूब पसंद आ रहे हैं।लेकिन इस महोत्सव की असली जान तो यहाँ के स्वाद में बसती है। फ़ूड कोर्ट में पहुँचते ही गरम-गरम बाल मिठाई की मीठी ख़ुशबू आपका स्वागत करती है। यहाँ आपको मंडुवे की रोटी के साथ भट्ट की चुड़कानी, झंगोरे की खीर और आलू के गुटके जैसे पहाड़ों के वो सारे पारंपरिक व्यंजन मिलेंगे, जिनका स्वाद एक बार ज़ुबान पर चढ़ जाए तो भूलता नहीं।लोक संगीत पर थिरके लोगपहले दिन की शाम को ख़ास बनाया मशहूर लोकगायक हेमंत बिष्ट और कई दूसरे कलाकारों के सुरों ने। उनके गाए गीतों पर लोग झूमने को मजबूर हो गए। इस महोत्सव का एक और बड़ा आकर्षण जागर सम्राट प्रीतम भरतवाण का कार्यक्रम भी है, जिनका इंतज़ार लखनऊ के पहाड़ी समाज के लोग बेसब्री से कर रहे हैं।यह महोत्सव सिर्फ़ उत्तराखंड के लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि हर उस इंसान के लिए एक ख़ास मौक़ा है जो पहाड़ों की सादगी, वहाँ के संगीत और वहाँ के स्वाद से प्यार करता है। अगर आप लखनऊ में हैं, तो शहर की भीड़ से निकलकर ‘मिनी उत्तराखंड’ के इस अनुभव को जीने का मौक़ा बिल्कुल न छोड़ें।
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