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बिहार राजनीति संभल जाइये लालू यादव के पीछे पड़े पुराने दुश्मन ने अब निकाल दिया जमीन का नया पंगा

News India Live, Digital Desk : बिहार की राजनीति में अगर आप चारा घोटाले (Fodder Scam) के दिनों को याद करेंगे, तो एक नाम जरूर दिमाग में आएगा ‘गुड्डू बाबा’। यह वही शख्स हैं जिन्होंने कभी आरटीआई (RTI) और याचिकाओं के जरिये बड़े-बड़े नेताओं की नींद हराम कर दी थी। और अब, 2026 की शुरुआत में, गुड्डू बाबा फिर से एक्टिव हो गए हैं। इस बार उनके निशाने पर फिर से लालू प्रसाद यादव और उनका परिवार है।मामला पटना के पॉश इलाके ‘कौटिल्य नगर’ (Kautilya Nagar) का है। और जैसे ही गुड्डू बाबा ने बिहार के डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा (Vijay Sinha) को चिट्ठी लिखी, सियासी गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है।आखिर चिट्ठी में है क्या?दरअसल, गुड्डू बाबा ने आरोप लगाया है कि कौटिल्य नगर में ‘एम पी 16’ (MP-16) नाम का एक आवास या भूखंड है, जो नियमों को ताक पर रखकर आवंटित किया गया है। उनका दावा है कि यह आवंटन किसी ट्रस्ट या सामाजिक कार्य के नाम पर नहीं, बल्कि प्रभाव का इस्तेमाल करके लिया गया है। इशारा साफ तौर पर लालू यादव की तरफ है।गुड्डू बाबा ने सीधे डिप्टी सीएम से मांग की है कि इस आवंटन की जांच कराई जाए। उनका कहना है कि सरकारी जमीन का बंदरबांट कैसे हुआ, इसकी परतें खुलनी चाहिए।लालू परिवार की टेंशन क्यों बढ़ी?बात सिर्फ एक जमीन के टुकड़े की नहीं है। बात टाइमिंग और सरकार की है। बिहार में इस वक्त एनडीए (NDA) की सरकार है और विजय सिन्हा डिप्टी सीएम होने के साथ-साथ बीजेपी के फायरब्रांड नेता भी हैं। अगर यह चिट्ठी ‘ठंडे बस्ते’ में नहीं डाली गई और फाइलें खुलीं, तो लालू परिवार के लिए एक नया कानूनी पंगा खड़ा हो सकता है। वैसे भी लैंड फॉर जॉब (Land For Job) मामले में यादव परिवार पहले से ही जांच एजेंसियों का सामना कर रहा है।गुड्डू बाबा का ‘ट्रैक रिकॉर्ड’ डराने वालालालू यादव के लिए चिंता की बात ये भी है कि शिकायत करने वाले ‘गुड्डू बाबा’ हैं। ये वही योगेंद्र राय उर्फ गुड्डू बाबा हैं, जिनकी जनहित याचिकाओं (PIL) ने चारा घोटाले में बड़ी भूमिका निभाई थी। अब अगर वो कौटिल्य नगर वाली जमीन के पीछे पड़ गए हैं, तो जाहिर है उन्होंने पूरी तैयारी की होगी।फिलहाल, सबकी नजरें विजय सिन्हा पर हैं कि वो इस चिट्ठी पर क्या एक्शन लेते हैं। क्या पटना में बुल्डोजर चलेगा या फिर फाइलों में जांच शुरू होगी? जो भी हो, लालू यादव के लिए नए साल का स्वागत थोड़ा ‘कड़वा’ साबित हो रहा है।