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Bihar Suicide Case : कर्ज की फांसी ने उजाड़ दिया पूरा हंसता-खेलता परिवार बैंक की प्रताड़ना से तंग आकर पिता और 3 बेटियों ने भी तोड़ा दम

News India Live, Digital Desk: बिहार के नवादा जिले से एक रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है। निजी बैंक के कर्ज और वसूली एजेंटों की प्रताड़ना ने एक भरे-पूरे परिवार को मौत के आगोश में सुला दिया। करीब दो साल पहले जिस परिवार के मुखिया ने अपनी तीन बेटियों के साथ फांसी लगाकर जान दे दी थी, उसी परिवार की इकलौती जीवित बची मां ने भी अब आत्महत्या कर ली है। इस घटना ने एक बार फिर बैंकों के ‘रिकवरी मॉडल’ और कर्ज के जाल में फंसे आम आदमी की बेबसी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।क्या है पूरा मामला? (The Background)यह दुखद कहानी 2022 के उस काले दिन से शुरू हुई थी, जब नवादा के रहने वाले केदारनाथ गुप्ता ने अपनी तीन मासूम बेटियों के साथ जहर खाकर सुसाइड कर लिया था।कर्ज का बोझ: केदारनाथ ने अपनी बेटियों की पढ़ाई और व्यापार के लिए निजी बैंकों और साहूकारों से मोटा कर्ज लिया था।वसूली का दबाव: आरोप है कि कर्ज न चुका पाने की स्थिति में बैंक के रिकवरी एजेंट उन्हें लगातार फोन पर और घर आकर प्रताड़ित कर रहे थे। सामाजिक बदनामी और मानसिक दबाव के चलते उन्होंने सामूहिक आत्महत्या का रास्ता चुना।मां की मौत: खत्म हुआ परिवार का आखिरी चिरागउस घटना के बाद केदारनाथ की पत्नी जीवित बच गई थीं, लेकिन वे गहरे सदमे और डिप्रेशन में थीं।अकेलापन और प्रताड़ना: स्थानीय सूत्रों के अनुसार, केदारनाथ की पत्नी पर अभी भी पुराने कर्ज को चुकाने का दबाव बनाया जा रहा था। ऊपर से पूरे परिवार को खोने का गम उन्हें अंदर ही अंदर खाए जा रहा था।आत्मघाती कदम: अंततः, दुखों का बोझ न सह पाने के कारण उन्होंने भी फंदा लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। इसके साथ ही केदारनाथ गुप्ता का पूरा वंश इस दुनिया से खत्म हो गया।पुलिस की कार्रवाई और जन-आक्रोशघटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। नवादा के एसपी (SP) ने कहा है कि मामले की गहन जांच की जा रही है और उन निजी बैंकों व साहूकारों की सूची तैयार की जा रही है जिन्होंने परिवार को प्रताड़ित किया था।ग्रामीणों का गुस्सा: स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते प्रशासन ने रिकवरी एजेंटों की मनमानी पर लगाम लगाई होती, तो आज यह परिवार सुरक्षित होता।विशेषज्ञ की राय: कर्ज के जाल से कैसे बचें?साइकोलॉजिस्ट और आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि कर्ज लेना गलत नहीं है, लेकिन प्रताड़ना की स्थिति में चुप रहना जानलेवा साबित हो सकता है।कानूनी मदद: आरबीआई (RBI) के नियमों के अनुसार, कोई भी रिकवरी एजेंट ग्राहक को मानसिक रूप से प्रताड़ित नहीं कर सकता।काउंसलिंग: यदि कोई व्यक्ति कर्ज के कारण मानसिक तनाव में है, तो उसे तुरंत परिवार या प्रोफेशनल काउंसलर से बात करनी चाहिए।