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बिहार विधानसभा में 19 समितियों का गठन, स्पीकर प्रेम कुमार ने दी मंजूरी देखें पूरी लिस्ट और चेयरमैन के नाम

News India Live, Digital Desk: बिहार की सियासत और विधायी कामकाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। बिहार विधानसभा के अध्यक्ष प्रेम कुमार ने विधानसभा की 19 महत्वपूर्ण समितियों के गठन को औपचारिक मंजूरी दे दी है। इन समितियों का गठन सदन के कामकाज में तेजी लाने और विभिन्न सरकारी विभागों की निगरानी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया है। नई लिस्ट जारी होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच समितियों में जगह बनाने और चेयरमैन पद को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लग गया है।स्पीकर प्रेम कुमार ने जारी की नई लिस्टबिहार विधानसभा सचिवालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इन समितियों में सत्ताधारी गठबंधन (NDA) और विपक्षी दलों के विधायकों को उनके अनुभव और वरिष्ठता के आधार पर जगह दी गई है। स्पीकर प्रेम कुमार ने बताया कि समितियों का चयन पूरी तरह से नियमों के दायरे में रहकर किया गया है, ताकि विधायी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे। इन समितियों के माध्यम से विधायक अब सरकार के विभिन्न कार्यों, बजट आवंटन और जनहित की योजनाओं की बारीकी से समीक्षा कर सकेंगे।प्रमुख समितियां और उनके अध्यक्षों के नामगठित की गई 19 समितियों में लोक लेखा समिति, प्राक्कलन समिति और विशेषाधिकार समिति जैसी बेहद प्रभावशाली समितियां शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, लोक लेखा समिति (PAC) जैसे महत्वपूर्ण पदों पर अनुभवी चेहरों को तरजीह दी गई है। समितियों के सभापतियों के नामों की घोषणा के साथ ही उन्हें आवंटित विभागों के कार्यों की निगरानी की जिम्मेदारी भी सौंप दी गई है। विधानसभा की ये समितियां ‘मिनी असेंबली’ की तरह काम करती हैं, जो सदन की कार्यवाही न होने की स्थिति में भी सक्रिय रहती हैं।विधायी कामकाज में आएगी तेजीइन समितियों के गठन का मुख्य लाभ यह होगा कि अब विधानसभा के पास लंबित विधेयकों और विभागीय रिपोर्टों की जांच तेजी से हो सकेगी। प्रत्येक समिति में अलग-अलग दलों के सदस्य शामिल किए गए हैं, जिससे लोकतांत्रिक संतुलन बना रहे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन समितियों के सक्रिय होने से बिहार सरकार की जवाबदेही बढ़ेगी और विकास कार्यों की गुणवत्ता पर भी नजर रखी जा सकेगी। जल्द ही इन समितियों की पहली बैठक बुलाए जाने की संभावना है, जिसमें आगामी सत्र की रूपरेखा और विभागीय जांच के एजेंडे तय किए जाएंगे।