News India Live, Digital Desk: बिहार के किशनगंज जिले में भारत-नेपाल सीमा पर स्थित गांवों में इन दिनों जंगली हाथियों ने भारी उत्पात मचा रखा है। नेपाल के जंगलों से आए 14 हाथियों के झुंड ने दिघलबैंक प्रखंड के कई गांवों में डेरा डाल दिया है, जिससे सीमावर्ती इलाकों में दहशत का माहौल है। ये हाथी न केवल फसलों को बर्बाद कर रहे हैं, बल्कि अब रिहायशी बस्तियों के बेहद करीब पहुंच गए हैं, जिससे जान-माल का खतरा बढ़ गया है।एकड़ के एकड़ मक्के की फसल स्वाहाहाथियों का यह झुंड पिछले पांच दिनों से लगातार अलग-अलग जगहों पर मक्के के खेतों को अपना निशाना बना रहा है। दिघलबैंक प्रखंड की धनतोला पंचायत के बिहार टोला और मुलाबारी जैसे गांवों में हाथियों ने एकड़ के एकड़ मक्के की फसल को रौंद डाला है। किसानों का कहना है कि मक्के की फसल कटने के लिए तैयार थी, लेकिन हाथियों ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया है। हाथियों के डर से किसान अपने खेतों की ओर जाने से भी कतरा रहे हैं।नेपाल खदेड़ने की कोशिशें नाकामवन विभाग की टीम और स्थानीय वॉलंटियर्स हाथियों को वापस नेपाल की ओर खदेड़ने (Drive) की लगातार कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सफलता नहीं मिल रही है। बताया जा रहा है कि तीन दिन पहले 14 में से 10 हाथियों को नेपाल सीमा के पार खदेड़ दिया गया था, लेकिन बुधवार देर रात उनमें से 6 हाथी फिर से वापस लौट आए। फिलहाल 9 हाथी दिघलबैंक के इलाकों में डटे हुए हैं। जब भी इन्हें खदेड़ा जाता है, ये बूढ़ी कनकई नदी पार करने के बाद फिर से भारतीय क्षेत्र में घूम जाते हैं।मशाल और टीन बजाकर ‘रतजगा’ कर रहे लोगहाथियों के खौफ से ग्रामीण रात-भर सो नहीं पा रहे हैं। झुंड से भटककर कुछ हाथी रात के समय रिहायशी इलाकों और सड़कों तक पहुंच जाते हैं। स्थानीय लोग ढोल, टीन और थाली बजाकर तथा मशाल जलाकर हाथियों को डराने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि इस बार अभी तक किसी के घर को बड़ा नुकसान नहीं पहुंचा है, लेकिन हाथियों की मौजूदगी ने लोगों की रातों की नींद उड़ा दी है।प्रशासन और वन विभाग पर उठ रहे सवालकिशनगंज के सीमावर्ती इलाकों में हाथियों का यह उत्पात हर साल मक्के के सीजन में देखने को मिलता है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग के पास हाथियों को रोकने के लिए कोई ठोस और स्थाई उपाय नहीं है। रेंजर राधेश्याम राय के नेतृत्व में वनकर्मी कैंप तो कर रहे हैं, लेकिन मक्के के बड़े हो चुके पौधों के बीच हाथियों को लोकेट करना और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। प्रभावित किसानों ने सरकार से फसलों के नुकसान के मुआवजे की मांग की है।
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