
News India Live, Digital Desk: खाड़ी क्षेत्र (Persian Gulf) में जारी तनाव अब एक भीषण सैन्य टकराव में तब्दील हो गया है। मध्यस्थता की उम्मीद लगाए बैठे पाकिस्तान को उस समय बड़ा झटका लगा जब ईरान ने वार्ता की मेज पर आने के बजाय अमेरिकी जहाजों पर हमला बोल दिया। ईरानी मीडिया के अनुसार, ईरान की सेना ने ओमान की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना के जहाजों को निशाना बनाते हुए कई आत्मघाती ड्रोन लॉन्च किए हैं। इस हमले के बाद पूरे क्षेत्र में ‘रेड अलर्ट’ जारी कर दिया गया है और वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप मच गया है।वार्ता की उम्मीदों पर फिरा पानी: पाकिस्तान की मध्यस्थता फेल?हाल ही में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और ईरानी राष्ट्रपति के बीच फोन पर हुई बातचीत के बाद उम्मीद जगी थी कि इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच शांति वार्ता हो सकती है। अमेरिकी प्रतिनिधि भी बातचीत के लिए पाकिस्तान पहुंचने वाले थे, लेकिन ईरान के इस कदम ने कूटनीति के सारे दरवाजे बंद कर दिए हैं। जानकारों का कहना है कि ईरान ने यह हमला अमेरिका द्वारा अपने एक मालवाहक जहाज ‘तौस्का’ (Touska) को जब्त किए जाने के विरोध में किया है।’हॉर्मुज’ बना युद्ध का मैदान: अमेरिकी जहाजों पर भीषण प्रहारईरानी सैन्य प्रवक्ता इब्राहिम जोलफघारी ने पुष्टि की है कि यह कार्रवाई ‘अमेरिकी समुद्री डकैती’ का जवाब है। ईरान का दावा है कि अमेरिकी नौसेना ने अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन कर उनके जहाज पर फायरिंग की थी, जिसके प्रतिशोध में अब अमेरिकी युद्धपोतों को निशाना बनाया जा रहा है। दूसरी ओर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस हमले की पुष्टि करते हुए कहा है कि वे अपनी संपत्ति की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएंगे। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में अब दोनों देशों की नौसेनाएं आमने-सामने हैं।ट्रंप की घेराबंदी और ईरान का आखिरी दांवअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान की ‘आर्थिक नाकेबंदी’ के फैसले ने तेहरान को दीवार से सटा दिया था। ईरान ने पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि उसे तेल बेचने से रोका गया, तो वह पूरी दुनिया की तेल सप्लाई ठप कर देगा। अमेरिकी जहाजों पर यह ड्रोन हमला उसी ‘करो या मरो’ की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह दबाव में आकर कोई समझौता नहीं करेगा, बल्कि अपनी संप्रभुता के लिए युद्ध का रास्ता चुनेगा।दुनिया पर मंडराया तेल संकट, आसमान छुएंगी कीमतेंइस सैन्य टकराव का सबसे बुरा असर ग्लोबल इकोनॉमी पर पड़ने वाला है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले टैंकरों की आवाजाही ठप होने की कगार पर है। हमले की खबर आते ही कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा गया है। यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो भारत समेत कई देशों में पेट्रोल-डीजल की किल्लत पैदा हो सकती है। फिलहाल, सभी की निगाहें अमेरिका के पलटवार पर टिकी हैं, जो इस क्षेत्रीय तनाव को ‘तीसरे विश्व युद्ध’ की ओर धकेल सकता है।
UK News