
News India Live, Digital Desk: भारतीय पेशेवरों के लिए ‘अमेरिकी सपना’ अब एक बुरे सपने में बदलता दिख रहा है। अमेरिकी संसद (Congress) में एक ऐसा विस्फोटक विधेयक (Bill) पेश किया गया है, जो अगर कानून बना तो अगले तीन साल तक H-1B वीजा जारी करने पर पूरी तरह रोक लग सकती है। ‘एंड H-1B वीजा एब्यूज एक्ट 2026’ (End H-1B Visa Abuse Act of 2026) नाम के इस प्रस्ताव ने सिलिकॉन वैली से लेकर बेंगलुरु तक खलबली मचा दी है। इस कदम को ट्रंप प्रशासन की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का सबसे कड़ा प्रहार माना जा रहा है।क्या है इस विवादित बिल की ‘इनसाइड स्टोरी’?रिपब्लिकन सांसद एली क्रेन द्वारा पेश किए गए इस बिल का तर्क है कि बड़ी कंपनियां सस्ते विदेशी श्रम के लिए अमेरिकी कामगारों के हितों की अनदेखी कर रही हैं। प्रस्ताव के मुताबिक, अगले तीन वर्षों के लिए नए H-1B वीजा पर पूरी तरह से ‘फ्रीज’ लगा दिया जाए। इतना ही नहीं, तीन साल बाद जब यह प्रोग्राम दोबारा शुरू हो, तब भी सालाना कोटा 65,000 से घटाकर मात्र 25,000 कर दिया जाए। यह उन हजारों भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियरों और छात्रों के लिए बड़ा झटका है जो हर साल अमेरिका जाने की उम्मीद संजोए रहते हैं।$200,000 की सैलरी और ‘लॉटरी’ का अंतयह बिल केवल संख्या कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह चयन प्रक्रिया को ही बदलने की वकालत करता है। अब तक किस्मत पर निर्भर ‘लॉटरी सिस्टम’ को खत्म कर ‘वेतन-आधारित’ चयन की बात कही गई है। प्रस्ताव में न्यूनतम वेतन सीमा बढ़ाकर $200,000 (लगभग ₹1.67 करोड़) करने का सुझाव दिया गया है। जानकारों का कहना है कि इतनी भारी-भरकम सैलरी देना हर कंपनी के बस की बात नहीं होगी, जिससे भारतीयों के लिए वहां टिकना लगभग नामुमकिन हो जाएगा। साथ ही, वीजा धारकों के परिवार (Dependents) के साथ रहने पर भी कड़े प्रतिबंधों की तैयारी है।भारतीय IT सेक्टर और छात्रों पर ‘दोहरी मार’भारत के लिए यह खबर इसलिए भी डरावनी है क्योंकि H-1B वीजा पाने वालों में 70% से अधिक भारतीय होते हैं। यदि यह बिल पास होता है, तो न केवल नई भर्तियों पर रोक लगेगी, बल्कि अमेरिका में पढ़ रहे भारतीय छात्रों के लिए मिलने वाला ‘OPT’ (वर्क परमिट) भी खत्म हो सकता है। ग्रीन कार्ड की राह देख रहे लाखों पेशेवर भी अधर में लटक जाएंगे। हालांकि, अभी यह विधेयक शुरुआती चरण में है और इसे कानून बनने के लिए सीनेट में 60 वोटों की जरूरत होगी, जो एक बड़ी चुनौती है। फिर भी, इस प्रस्ताव ने अंतरराष्ट्रीय जॉब मार्केट में अनिश्चितता का माहौल बना दिया है।
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