
News India Live, Digital Desk: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी तनाव और संभावित परमाणु समझौते को लेकर एक ऐसा बयान दिया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में नई बहस छेड़ दी है। ट्रंप ने दावा किया है कि यदि वे चाहें तो ईरान के साथ समझौता ‘महज एक मिनट’ में संपन्न हो सकता है। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने एक बड़ा ‘बट’ (लेकिन) भी लगा दिया है, जो यह दर्शाता है कि पर्दे के पीछे की कहानी उतनी सरल नहीं है जितनी नजर आ रही है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में युद्ध और शांति के बीच एक महीन रेखा खिंची हुई है।‘हमें वह चाहिए जो हमारे लिए सही हो’ ट्रंप की सख्त शर्तडोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान स्पष्ट किया कि वे समझौते के लिए जल्दबाजी में नहीं हैं। उन्होंने कहा, “हम एक मिनट में डील कर सकते हैं, लेकिन मुझे ऐसी डील नहीं चाहिए जो केवल नाम की हो। मुझे वह चाहिए जो अमेरिका और दुनिया की सुरक्षा के लिए सही हो।” ट्रंप का इशारा 2015 के उस परमाणु समझौते (JCPOA) की ओर था, जिसे उन्होंने अपने पिछले कार्यकाल में ‘सबसे खराब डील’ बताकर रद्द कर दिया था। अब वे एक ऐसे नए और कड़े समझौते पर अड़े हैं जिसमें ईरान के मिसाइल कार्यक्रम पर भी पाबंदियां हों।तनाव और बातचीत का ‘अनोखा’ दौरएक ओर जहां ट्रंप समझौते की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ईरान पर दबाव बनाने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे। होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसेना की बढ़ती तैनाती और ईरान पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों ने तेहरान को बातचीत की मेज पर आने के लिए मजबूर किया है। ट्रंप ने संकेत दिया कि उनकी ‘मैक्सिमम प्रेशर’ (Maximum Pressure) की नीति काम कर रही है। उन्होंने कहा कि ईरान की अर्थव्यवस्था अब उस मोड़ पर है जहां उन्हें जल्द ही कोई फैसला लेना ही होगा।ईरान की ओर से ‘मिश्रित’ संकेतट्रंप के इस दावे पर ईरान की ओर से भी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। तेहरान के कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि वे भी बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन अमेरिका को पहले उन प्रतिबंधों को हटाना होगा जो उनके देश की जनता की कमर तोड़ रहे हैं। ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वे किसी भी ऐसे समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे जो उनके संप्रभु अधिकारों का हनन करता हो। ऐसे में ट्रंप का ‘एक मिनट’ वाला दावा कूटनीतिक दबाव बनाने की एक कला (Art of the Deal) भी हो सकता है।क्या टल जाएगा महायुद्ध का खतरा?दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों की नजरें इस संभावित डील पर टिकी हैं। यदि ट्रंप और ईरान के बीच कोई बीच का रास्ता निकलता है, तो इससे न केवल कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आएगी, बल्कि मध्य पूर्व में मंडरा रहे युद्ध के बादल भी छंट सकते हैं। हालांकि, ट्रंप की ‘अनप्रिडिक्टेबल’ (अपूर्वानुमेय) छवि को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि ऊंट किस करवट बैठेगा। क्या यह ‘एक मिनट’ हकीकत में बदलेगा या फिर तनाव की आग और भड़केगी, यह आने वाले कुछ हफ्ते तय करेंगे।
UK News