Friday , June 5 2026

रक्षा बाजार में ‘मेड इन भारत’ का डंका! दुनिया के बड़े-बड़े देशों की पहली पसंद बने ये 5 स्वदेशी हथियार

वैश्विक रक्षा बाजार (ग्लोबल डिफेंस मार्केट) में पिछले कुछ सालों के भीतर एक ऐसा ऐतिहासिक बदलाव आया है जिसने पूरी दुनिया के सैन्य विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है। कभी दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक (इंपोर्टर) रहने वाला भारत अब बहुत तेजी से दुनिया के प्रमुख हथियार निर्यातक (एक्सपोर्टर) देशों की कतार में आकर खड़ा हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' के विजन को धरातल पर उतारते हुए भारत के वैज्ञानिकों और इंजीनियर्स ने ऐसे अत्याधुनिक हथियार तैयार किए हैं, जो आज दुनिया की पहली पसंद बन चुके हैं। रक्षा क्षेत्र से आ रही ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, भारत में बने पांच सबसे घातक और भरोसेमंद हथियारों को खरीदने के लिए दुनिया भर के देशों में होड़ मची हुई है। समंदर से लेकर आसमान तक भारत के इस मिसाइल सिस्टम का खौफ भारत की रक्षा ताकत की जब भी बात होती है, तो सबसे पहला नाम सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल 'ब्रह्मोस' का आता है। भारत और रूस के संयुक्त प्रयास से बनी यह मिसाइल आज पूरी तरह 'मेड इन भारत' ब्रांड की पहचान बन चुकी है। अपनी बेजोड़ रफ्तार (ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना तेज) और अचूक मारक क्षमता के कारण फिलीपींस जैसे कई दक्षिण-पूर्व एशियाई देश इसे अपनी नौसेना और तटीय सुरक्षा के लिए खरीद चुके हैं। ब्रह्मोस के अलावा भारत का स्वदेशी आकाश एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम भी दुनिया भर में तहलका मचा रहा है। कम लागत में दुश्मन के लड़ाकू विमानों, ड्रोन और मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने की इसकी क्षमता को देखते हुए आर्मेनिया सहित कई मध्य-पूर्वी देशों ने इसे अपनी सेना का हिस्सा बनाया है। लड़ाकू विमान तेजस की उड़ान ने पूरी दुनिया को किया आकर्षित हवाई युद्ध के मैदान में भारत का स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) 'तेजस' दुनिया के सबसे बेहतरीन लड़ाकू विमानों में शुमार हो चुका है। चौथी पीढ़ी (4.5 Generation) का यह सुपरसोनिक फाइटर जेट बेहद हल्का, फुर्तीला और आधुनिक रडार और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम से लैस है। अमेरिकी और यूरोपीय फाइटर जेट्स की तुलना में बेहद किफायती और रखरखाव में आसान होने के कारण मलेशिया, अर्जेंटीना, मिस्र और कई अफ्रीकी देशों ने तेजस को खरीदने में गहरी दिलचस्पी दिखाई है। तेजस की इस सफलता ने भारत को दुनिया के उन चुनिंदा देशों की लीग में शामिल कर दिया है जो खुद के लड़ाकू विमान बनाने और बेचने की तकनीक रखते हैं। एडवांस्ड आर्टिलरी गन 'एटाग्स' और पिनाका रॉकेट सिस्टम की धमक भारतीय थल सेना की ताकत को कई गुना बढ़ाने वाली और भारत में ही डिजाइन की गई 'एटाग्स' (ATAGS) यानी एडवांस्ड टाऊड आर्टिलरी गन सिस्टम दुनिया की सबसे आधुनिक तोपों में से एक है। इसकी लंबी दूरी तक सटीक गोला दागने की क्षमता ने दुनिया के कई देशों के सैन्य जनरलों को प्रभावित किया है। तोपखाने के साथ-साथ भारत का 'पिनाका' मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम भी रक्षा निर्यात के मामले में एक बड़ा गेम चेंजर साबित हुआ है। महज कुछ ही सेकंड में दुश्मन के पूरे सैन्य ठिकाने को मलबे के ढेर में तब्दील कर देने वाला यह स्वदेशी रॉकेट सिस्टम हाल ही में युद्ध के मैदानों में अपनी ताकत का लोहा मनवा चुका है, जिसके चलते इसकी अंतरराष्ट्रीय मांग आसमान छू रही है। भारत में बने स्वदेशी हथियारों की बढ़ती मांग के पीछे के मुख्य कारण आखिर क्या वजह है कि अमेरिका, रूस और फ्रांस जैसे पारंपरिक हथियार निर्माताओं के बीच 'मेड इन भारत' के हथियार दुनिया की पहली पसंद बन रहे हैं? सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि इसके पीछे तीन सबसे बड़े कारण हैं- पहली, भारतीय हथियारों की बेजोड़ क्वालिटी और अत्याधुनिक तकनीक; दूसरी, पश्चिमी देशों के हथियारों की तुलना में इनकी बेहद प्रतिस्पर्धी और कम कीमत; और तीसरी सबसे महत्वपूर्ण वजह है भारत की 'नो स्ट्रिंग्स अटैच्ड' (बिना किसी राजनीतिक शर्त के) नीति। भारत अपने रक्षा खरीदारों के साथ एक भरोसेमंद पार्टनर की तरह व्यवहार करता है, जो आज के अनिश्चित वैश्विक माहौल में दुनिया के छोटे और विकासशील देशों को बहुत ज्यादा आकर्षित कर रहा है।